Kolkata Durga Puja Stampede: कोलकाता के चोरबागान स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में सप्तमी की शाम भगदड़ मचने से कम से कम 19 लोगों की मौत होने की खबर है. घटना के समय भारी बारिश हो रही थी और पंडाल के बाहर भीड़ बढ़ रही थी. हादसे के बाद पुलिस ने पंडाल में लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी. घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है और घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं.
पुलिस के मुताबिक, घटना शाम करीब 7:40 बजे पंडाल के निकास द्वार के पास हुई. सरदा पार्क का यह पंडाल गिरिश पार्क पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है. बचावकर्मियों ने घायलों को निकालकर कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया. कुछ घायलों के बेहोशी की हालत में अस्पताल लाए जाने की भी खबर है.
कैसे मची भगदड़?
हादसे की सटीक वजह अभी स्पष्ट नहीं है. अधिकारियों ने जांच कराने की बात कही है. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस शाम उत्तर और मध्य कोलकाता में तेज बारिश शुरू हो गई थी. सड़कों पर भारी जाम लगने के कारण पंडाल के बाहर इंतजार कर रहे कई लोग बारिश से बचने के लिए अंदर की ओर बढ़े.
इस दौरान धक्का-मुक्की शुरू हो गई और कई लोग गिर पड़े. आनंदबाजार पत्रिका के मुताबिक, पंडाल से बाहर निकलने के लिए श्रद्धालुओं को ऊंचे, गोलाकार गलियारे से होकर पूरा चक्कर लगाना पड़ता था. बताया गया कि भगदड़ इसी रास्ते पर हुई.
पंडाल में पहुंचीं दीपाली दास ने ABP को बताया कि बारिश तेज होने से पहले ही भीड़ बढ़ने लगी थी. इसके बाद और लोग अंदर आए, जिससे धक्का-मुक्की और चोट लगने की घटनाएं हुईं.
एक अन्य श्रद्धालु सैकत बनर्जी ने आरोप लगाया कि मौके पर आयोजक, स्वयंसेवक और पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे. उनके मुताबिक, लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे और कई लोग बीमार होकर गिर पड़े. कुछ अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने भी आरोप लगाया कि मदद के लिए गुहार लगाने के बावजूद तत्काल सहायता नहीं मिली.
आयोजक विकास दास ने कहा कि घटना की वजह अभी स्पष्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि फिलहाल घायलों को अस्पताल पहुंचाना प्राथमिकता है. उनके मुताबिक, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें घटनास्थल की ओर रवाना हो रही थीं.
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, घायलों का इमरजेंसी ऑब्जर्वेशन वार्ड में इलाज किया जा रहा था. खबरों के मुताबिक, 11 घायलों को SSKM अस्पताल भी भेजा गया. कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंदा अस्पताल पहुंचे.
मुआवजे का ऐलान, SIT करेगी जांच
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी शनिवार रात मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के साथ अस्पताल पहुंचे. उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और मृतकों के परिजनों को सहायता देने का आश्वासन दिया.
मुख्यमंत्री ने पूजा समिति के सदस्यों को पुलिस थाने में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी तय करने के लिए मामले की जांच की जाएगी और CCTV फुटेज जुटाए जाएंगे. घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश भी दिया गया है.
पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने भगदड़ में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है. प्रभावित परिवार के एक सदस्य को ग्रुप D की नौकरी देने की भी बात कही गई है. घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी और प्रत्येक घायल को 5 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के निकट परिजनों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की. उन्होंने हादसे पर दुख जताया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रविवार को घायलों से मिलने की संभावना जताई गई.
राज्य सरकार ने सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800345678 भी जारी किया है.
पूजा समिति के नेतृत्व पर राजनीतिक विवाद
इस हादसे के बाद पूजा समिति के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पूजा समिति से बीजेपी नेताओं के कथित संबंधों पर सवाल उठाए हैं.
रिपोर्टों में बीजेपी विधायक विजय ओझा का नाम समिति के अध्यक्ष के रूप में और देबदीप अधिकारी का नाम आयोजक के तौर पर सामने आया है. देबदीप मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के भतीजे बताए गए हैं.
बंगाल की राजनीति में ‘भाइपो’ यानी भतीजा शब्द का खास राजनीतिक संदर्भ है. बीजेपी अपने राजनीतिक अभियानों में अक्सर ममता बनर्जी के भतीजे और TMC नेता अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाती रही है.
TMC ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट कर सवाल उठाया कि चोरबागान पूजा पंडाल से सुवेंदु अधिकारी के भतीजे का कथित जुड़ाव है और एक बीजेपी विधायक समिति के अध्यक्ष हैं. पार्टी ने पूछा कि इन मौतों की जवाबदेही कौन लेगा और मुख्यमंत्री इस्तीफा कब देंगे.
ये राजनीतिक आरोप हैं. हादसे की जिम्मेदारी किसकी थी, यह जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध सबूतों से स्पष्ट होगा.
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
भारी बारिश और बढ़ती भीड़ के बीच भगदड़ कैसे हुई, निकास मार्ग पर भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, और मौके पर बचाव में देरी हुई या नहीं – इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल पाएंगे.
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अब सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं, बल्कि यह भी है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसने निभाई और क्या जांच के बाद जवाबदेही तय होगी?
Last Updated on October 18, 2026 8:32 am
