OTT पर Censor Board क्यों नहीं? RSS ने उठाया ‘Cultural Pollution’ का मुद्दा

OTT Content को लेकर RSS ने एक Informal Panel बनाया है, जो कथित “Cultural Pollution” से निपटने के तरीके सुझाएगा. यह कदम Mohan Bhagwat के 2024 में OTT Content को “Moral Corruption” से जोड़ने वाले बयान के करीब दो साल बाद आया है. सवाल है- जब OTT के लिए 2021 से Rules मौजूद हैं, तो नई व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी?

OTT पर Censor Board क्यों नहीं?
OTT पर Censor Board क्यों नहीं?

RSS ने OTT Platforms के Content को लेकर एक अनौपचारिक Panel बनाया है, जो Video Streaming Platforms पर कथित “Cultural Pollution” से निपटने के तरीके सुझाएगा. The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समूह कुछ महीने पहले बनाया गया था और इसकी पहली बैठक पिछले महीने हुई.

सूत्रों के अनुसार, Panel में शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े कई लोग शामिल हैं, जिनमें कुछ पूर्व Vice-Chancellors और RSS Pracharaks भी हैं. समूह OTT Content के Regulation को लेकर अपनी सिफारिश तैयार करेगा, जिसे आगे Union Ministry of Culture और केंद्र सरकार से जुड़े अन्य Stakeholders के सामने रखा जा सकता है.

RSS को OTT Content से क्या आपत्ति है?

RSS के Sarsanghchalak Mohan Bhagwat पहले भी OTT Platforms पर दिखाए जाने वाले Content को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं.

12 अक्टूबर 2024 को Nagpur में अपने Vijayadashami संबोधन में Bhagwat ने OTT Content को कथित तौर पर “Moral Corruption” यानी नैतिक पतन का एक बड़ा कारण बताया था. उन्होंने OTT Platforms पर दिखाए जाने वाले कुछ Content को लेकर सख्त Regulation की जरूरत बताई थी.

अब RSS से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इसी तरह की चिंताओं और Kutumb Prabodhan से मिले Feedback के आधार पर इस Panel का गठन किया गया है.

Kutumb Prabodhan RSS की एक गतिविधि है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना, अलग-अलग पीढ़ियों के बीच संबंध बेहतर करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है.

“Censor Board जैसी व्यवस्था चाहिए”

RSS से जुड़े एक सूत्र ने The Indian Express को बताया कि यह एक informal group है और इसका उद्देश्य OTT Platforms पर मौजूद कथित आपत्तिजनक Content से निपटने के लिए एक Proposal तैयार करना है.

सूत्र के मुताबिक, संगठन चाहता है कि OTT Content के लिए कुछ ऐसी व्यवस्था हो जो परिवारों और खासकर युवा पीढ़ी पर पड़ने वाले कथित प्रभाव को नियंत्रित कर सके.

यानी सवाल सिर्फ Content को लेकर आपत्ति का नहीं है. चर्चा अब इस बात पर पहुंच गई है कि क्या OTT Platforms के लिए Censor Board जैसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए?

लेकिन OTT के लिए पहले से Rules हैं

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है.

Cinema Halls में रिलीज होने वाली फिल्मों को Central Board of Film Certification (CBFC) यानी Censor Board से Certification लेना पड़ता है. यह व्यवस्था Cinematograph Act, 1952 के तहत लागू है.

लेकिन OTT Platforms के लिए इसी तरह का कोई अलग Censor Board नहीं है.

OTT Content मुख्य रूप से Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 और संबंधित IT तथा Criminal Laws के दायरे में आता है.

यानी OTT Platforms पूरी तरह Regulation से बाहर नहीं हैं. हालांकि, इनके Regulation के तरीके और Cinema के Certification System में बड़ा अंतर है.

OTT Regulation में “Gap” की बहस

OTT Content को लेकर लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि मौजूदा Regulatory Framework पर्याप्त है या इसमें बदलाव की जरूरत है.

कुछ वर्गों की ओर से लगातार यह सवाल उठाया जाता रहा है कि OTT Platforms पर उपलब्ध Content के लिए स्पष्ट और प्रभावी Regulation होना चाहिए.

RSS का नया Panel इसी बहस को एक बार फिर सामने ला सकता है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि Panel अपनी Final Recommendation में किस तरह की व्यवस्था का सुझाव देगा.

सूत्रों के मुताबिक, Proposal तैयार करने से पहले Law से जुड़े लोगों और इस क्षेत्र के Experts के साथ व्यापक Consultation भी की जाएगी. Panel के लिए कोई निश्चित Deadline तय नहीं की गई है.

सरकार ने 50 OTT Platforms पर की कार्रवाई

OTT Regulation को लेकर केंद्र सरकार पहले भी कार्रवाई कर चुकी है.

22 जुलाई 2026 को Information and Broadcasting Ministry में Minister of State L. Murugan ने Lok Sabha में एक सवाल के जवाब में बताया था कि सरकार ने पिछले दो वर्षों में भारत में Public Access के लिए 50 OTT Platforms को Disable किया.

सरकार के मुताबिक, इन Platforms पर कथित तौर पर Obscene Content दिखाया जा रहा था और कुछ मामलों में IT Act, Bharatiya Nyaya Sanhita की Section 294 और Indecent Representation of Women (Prohibition) Act, 1986 की Section 4 के उल्लंघन के आरोप थे.

इससे साफ है कि OTT Content को लेकर कानूनी कार्रवाई की मौजूदा व्यवस्था मौजूद है. अब RSS का Panel इसी Framework को और सख्त या अलग तरीके से लागू करने की जरूरत पर क्या सुझाव देता है, यह महत्वपूर्ण होगा.

असली सवाल Regulation का है या Censorship का?

OTT Platforms ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में Entertainment के तरीके को तेजी से बदला है. Web Series, Films और दूसरे Digital Shows अब सीधे दर्शकों तक पहुंचते हैं.

एक तरफ Content की Freedom और Creative Expression का सवाल है, तो दूसरी तरफ बच्चों, युवाओं और परिवारों पर Content के प्रभाव को लेकर Regulation की मांग उठती रही है.

RSS का नया Panel इस बहस को एक नए चरण में ले जा सकता है. लेकिन फिलहाल कोई Final Proposal सामने नहीं आया है.

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अब बड़ा सवाल यही है कि क्या RSS का यह Panel सिर्फ मौजूदा OTT Rules को मजबूत करने की सिफारिश करेगा, या फिर OTT Content के लिए Censor Board जैसी नई Regulatory व्यवस्था का प्रस्ताव रखेगा?

Last Updated on September 16, 2026 8:29 am

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