Sohrabuddin Case फिर Supreme Court पहुंचा, 22 आरोपियों की बरी पर सवाल क्यों?

Sohrabuddin Shaikh Encounter Case में Supreme Court ने 22 आरोपियों की बरी के खिलाफ याचिका पर सुनवाई स्वीकार की है. कोर्ट ने 210 में से 92 गवाहों के hostile होने को गंभीर चिंता बताया. हालांकि, Bench ने साफ किया कि तत्कालीन Gujarat Home Minister Amit Shah का 2014 Discharge दोबारा नहीं खोला जाएगा.

2005 Sohrabuddin Encounter Case फिर चर्चा में, Supreme Court अब क्या देखेगा?
2005 Sohrabuddin Encounter Case फिर चर्चा में, Supreme Court अब क्या देखेगा?

नई दिल्ली। 2005 के कथित Sohrabuddin Shaikh Fake Encounter Case में बरी किए गए 22 आरोपियों के मामले को Supreme Court ने फिर से जांचने पर सहमति जताई है. हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया कि तत्कालीन Gujarat Home Minister और मौजूदा Union Home Minister Amit Shah को 2014 में मिली Discharge को दोबारा नहीं खोला जाएगा.

Chief Justice of India Surya Kant की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय Bench में Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana शामिल हैं. Bench ने Sohrabuddin Shaikh के भाई Rubabuddin Shaikh की याचिका पर 22 आरोपियों को नोटिस जारी किया है. याचिका में Bombay High Court के 7 मई 2026 के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें 2018 के acquittal को बरकरार रखा गया था.

92 गवाहों के Hostile होने पर Supreme Court की चिंता

सुनवाई के दौरान Supreme Court ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि ट्रायल के दौरान 210 में से 92 गवाह hostile हो गए थे.

CJI Surya Kant ने कहा कि कोर्ट का ध्यान मुख्य रूप से इस बात पर है कि आरोपियों का trial कितना fair था और acquittal के दौरान गवाहों के बयानों की क्या स्थिति रही.

Justice Bagchi ने भी 92 गवाहों के hostile होने को गंभीर मुद्दा माना. हालांकि, Bench ने यह स्पष्ट कर दिया कि Amit Shah को 2014 में discharge किए जाने वाले हिस्से को दोबारा नहीं खोला जाएगा.

Amit Shah का Discharge क्यों नहीं खुलेगा?

Amit Shah उस समय Gujarat के Home Minister थे, जब Sohrabuddin Shaikh की मौत हुई थी. उन्हें इस मामले में शुरुआत में आरोपी बनाया गया था, लेकिन 30 दिसंबर 2014 को Special CBI Court ने उन्हें discharge कर दिया था.

बाद में इस discharge को चुनौती देने वाली कानूनी कोशिशें भी आगे बढ़ीं, लेकिन higher courts ने इसे बरकरार रखा. Supreme Court ने अब सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि इस हिस्से को फिर से नहीं खोला जाएगा.

इसलिए मौजूदा Supreme Court proceedings का फोकस 22 अन्य आरोपियों के acquittal और trial की fairness पर रहेगा, न कि Amit Shah के पुराने discharge पर.

Sohrabuddin, Kausar Bi और Tulsiram की मौत का मामला

CBI के मुताबिक, Sohrabuddin Shaikh, उनकी पत्नी Kausar Bi और सहयोगी Tulsiram Prajapati को 2005-06 में कथित तौर पर Gujarat और Rajasthan Police से जुड़े लोगों ने निशाना बनाया.

CBI का आरोप था कि नवंबर 2005 में Sohrabuddin और Kausar Bi को Hyderabad से Sangli जा रही बस से कथित तौर पर उतारा गया. इसके बाद उन्हें Gujarat में अलग-अलग स्थानों पर ले जाने और हिरासत में रखने का आरोप लगाया गया.

26 नवंबर 2005 को Sohrabuddin को Vishala Circle के पास पुलिस ने कथित encounter में मारा गया बताया.

Kausar Bi का शव कभी बरामद नहीं हुआ. CBI का आरोप था कि उनकी भी हत्या की गई और शव को Narmada नदी में ठिकाने लगाया गया.

इसके करीब एक साल बाद 28 दिसंबर 2006 को Tulsiram Prajapati की भी पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई.

Supreme Court ने 2010 में CBI को सौंपी थी जांच

मामले की शुरुआती जांच Gujarat ATS और CID (Crime) कर रही थी. बाद में Sohrabuddin के परिवार की याचिका पर Supreme Court ने 2010 में जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया.

इसके बाद मामले को Gujarat से Mumbai transfer किया गया, ताकि trial निष्पक्ष तरीके से हो सके.

CBI ने अपनी जांच के बाद एक बड़ी chargesheet दाखिल की. इसमें उस समय के Gujarat Home Minister Amit Shah और Rajasthan के तत्कालीन Home Minister Gulab Chand Kataria समेत कई लोगों के नाम सामने आए थे.

CBI की prosecution theory में कथित politician-police nexus का भी जिक्र था. हालांकि, trial के दौरान यह आरोप अदालत में साबित नहीं हो सके.

2018 में 22 आरोपियों को Trial Court ने बरी किया

मामले में कुल 38 लोग आरोपी बनाए गए थे, लेकिन 2018 तक 22 आरोपी trial का सामना कर रहे थे. इनमें 21 Police personnel थे.

दिसंबर 2018 में Special CBI Court ने सभी 22 आरोपियों को acquit कर दिया.

अदालत के सामने 210 witnesses पेश हुए थे, जिनमें 92 hostile हो गए. Trial Court ने माना कि prosecution आरोपियों की भूमिका और कथित conspiracy को beyond reasonable doubt साबित नहीं कर सकी.

अदालत ने prosecution के उस दावे को भी स्वीकार नहीं किया कि मामले में कोई साबित politician-police nexus था.

Bombay High Court ने 2026 में Acquittal बरकरार रखा

7 मई 2026 को Bombay High Court ने 2018 के acquittal को बरकरार रखा और Sohrabuddin के भाइयों की appeals खारिज कर दीं.

High Court ने कहा कि acquittal के खिलाफ अपील में हस्तक्षेप के लिए prosecution को गंभीर कानूनी या तथ्यात्मक गलती दिखानी होगी. कोर्ट ने माना कि Trial Court का फैसला उपलब्ध evidence के आधार पर था और उसमें हस्तक्षेप का पर्याप्त आधार नहीं है.

High Court ने circumstantial evidence की chain में कई gaps का भी उल्लेख किया और कहा कि prosecution कथित conspiracy और आरोपियों की crime scene पर मौजूदगी को पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं कर सकी.

Judge Loya की मौत भी बनी थी बड़े विवाद का हिस्सा

इस केस की चर्चा Special CBI Judge B.H. Loya की मौत के कारण भी लंबे समय तक होती रही.

Judge Loya इस मामले की सुनवाई कर रहे थे और 1 दिसंबर 2014 को Nagpur में उनकी cardiac arrest से मौत हो गई.

उनकी मौत को लेकर परिवार और कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच की मांग उठी थी. हालांकि, Supreme Court ने 19 अप्रैल 2018 को स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली PILs को खारिज कर दिया और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर मौत को natural death माना था.

Judge Loya के बाद Justice M.B. Gosavi ने मामले की सुनवाई संभाली और 30 दिसंबर 2014 को Amit Shah को discharge किया.

अब Supreme Court में क्या होगा?

अब Supreme Court का फोकस 22 आरोपियों के acquittal और उससे जुड़े trial process, witness statements और fairness of trial पर रहेगा.

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 92 गवाहों के hostile होने, prosecution evidence में कथित gaps और 2018 के acquittal के बावजूद क्या Supreme Court को मामले की दोबारा judicial scrutiny की पर्याप्त वजह दिखाई देती है.

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लेकिन एक बात फिलहाल स्पष्ट है – Amit Shah का 2014 discharge इस सुनवाई का हिस्सा नहीं होगा. Supreme Court ने इस हिस्से को दोबारा खोलने से साफ इनकार किया है.

Last Updated on September 30, 2026 9:23 am

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