MP: छतरपुर में पत्रकार पर हमला: शराब माफिया और पुलिस पर गंभीर आरोप

– धीरेंद्र गुप्ता

छतरपुर। जिले के बिजावर कस्बे में एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट और उसके बाद पुलिस की भूमिका पर उठे सवालों ने पूरे जिले में आक्रोश की स्थिति पैदा कर दी है। सोमवार को छतरपुर के पत्रकारों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और सांकेतिक अर्थी यात्रा निकालते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।

पत्रकारों ने आरोप लगाया कि शराब माफियाओं द्वारा की गई हिंसा के बावजूद पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित को ही आरोपी बना दिया। इसको लेकर पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर जमकर नारेबाजी की और कार्रवाई की मांग उठाई।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात बिजावर निवासी पत्रकार राकेश सिंह एक धार्मिक कार्यक्रम का कवरेज कर लौट रहे थे। इसी दौरान पिपट थाना क्षेत्र स्थित शराब दुकान पर मौजूद कुछ लोगों ने उनके साथ कथित रूप से गंभीर मारपीट की। आरोप है कि घटना के बाद भी पुलिस ने हमलावरों पर सख्त कार्रवाई नहीं की और उल्टा पीड़ित के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया।

पत्रकारों का यह भी कहना है कि शराब दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सार्वजनिक नहीं की जा रही है, जिससे पुलिस की भूमिका पर संदेह और गहरा गया है। उनका दावा है कि यदि फुटेज सामने आ जाए तो सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी।

सोमवार सुबह जिले भर के पत्रकार सर्किट हाउस में एकत्र हुए और वहां से पैदल मार्च करते हुए एसपी कार्यालय पहुंचे। इस प्रदर्शन को कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिला।

दो आरोपी गिरफ्तार, पुलिसकर्मी निलंबित, जांच के आदेश

मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों—हारून खान (बिजावर) और नरेंद्र खंगार (शाहगढ़)—को गिरफ्तार किया है। हालांकि पत्रकार संगठन इस कार्रवाई को अपर्याप्त बता रहे हैं।

पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने पिपट थाना में पदस्थ एक पुलिसकर्मी को निलंबित करने के मौखिक निर्देश दिए हैं, जबकि पूरे मामले की जांच का जिम्मा एएसपी आदित्य पटले को सौंपा गया है।

पत्रकारों की प्रमुख मांगें

पत्रकार संगठनों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें—

  • पत्रकार राकेश राय पर दर्ज कथित फर्जी प्रकरण को तत्काल निरस्त किया जाए
  • हमलावरों पर हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हो
  • थाना प्रभारी सुरेंद्र मरकाम और मुंशी ज्ञान सिंह को निलंबित किया जाए
  • छीने गए मोबाइल और अन्य सामान की बरामदगी हो
  • शराब ठेकेदारों और सहयोगियों की भूमिका की जांच कर लाइसेंस निरस्त किए जाएं
  • मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

राजनीतिक प्रतिक्रिया: सपा ने सरकार पर साधा निशाना

इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष कपूर सिंह यादव ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और अब पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित पत्रकार पर ही मामला दर्ज किया जाना न्याय के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सपा जिले में बड़ा आंदोलन करेगी।

दूसरा पक्ष: शराब दुकान संचालक ने आरोपों को बताया भ्रामक

वहीं इस मामले में दूसरा पक्ष भी सामने आया है। श्री बालाजी इंटरप्राइजेज के पार्टनर राजेश अवस्थी ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह दो व्यक्तियों के बीच निजी विवाद था।

उनका कहना है कि 23 अप्रैल की रात दुकान पर हुआ विवाद कर्मचारी नरेंद्र खंगार और राकेश राय के बीच था, जिसमें संस्थान की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के चलते उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

जांच जारी, निगाहें अगली कार्रवाई पर

फिलहाल पुलिस द्वारा मामले की जांच जारी है। हालांकि पत्रकार संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

छतरपुर में यह मामला अब केवल एक हमले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून व्यवस्था, पुलिस की निष्पक्षता और पत्रकारों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

Last Updated on April 28, 2026 7:37 am

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