Rajesh Yadav
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क्या आपने कपिल शर्मा (Kapil Sharma) का नया रूप देखा है? कितने स्मार्ट, कूल और हैंडसम लग रहे हैं! उनका वजन काफी कम हो गया, जिससे उनकी एक्टिवनेस और सेहत में जबरदस्त फर्क आया है। जिस बढ़ते वजन की वजह से वह पहले परेशान थे, उसने उनके करियर को भी प्रभावित किया था। लेकिन उन्होंने खुद को पूरी तरह बदल कर, एक नई मुस्कान और ऊर्जा के साथ वापसी की। तो सवाल यही है — क्या आप भी अपनी सेहत के लिए तैयार हैं, बदलाव के लिए?
यह केवल आपकी समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश में मोटापे का असर तेजी से बढ़ रहा है। खासकर बच्चों में, मोटापे की संख्या बढ़कर इमरजेंसी ले रही है। यह सब कारण हैं — बदलती जीवनशैली, बढ़ता जंक फूड का सेवन, और असंतुलित आहार। आइए जानते हैं, यह समस्या कितनी गंभीर है और हम क्या कर सकते हैं।
भारत बदल रहा है। देश की सरकार कह रही है कि विकास के साथ, हर आम आदमी का पूरा योगदान है। 1990 में मोटापे की दर केवल 9-10% थी, लेकिन 2025 तक यह बढ़कर 20-23% हो गई है। अनुमान है कि 2025 तक भारत की लगभग एक तिहाई आबादी मोटापे से प्रभावित हो जाएगी। पिछले बीस सालों में भारत की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है, जिसका असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ा है।
सरकार ने इसके लिए दो अभियान चलाए – फिट इंडिया मूवमेंट और इट राइट फूड। ये अभियान देश के लिए बहुत जरूरी हैं। सरकार ने तेल और चीनी की खपत 10% तक कम करने का अभियान शुरू किया है। साथ ही, देशभर में फिट इंडिया मूवमेंट और इट राइट फूड अभियान से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ये कदम देश में मोटापे को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
यूनिसेफ की रिपोर्ट कहती है कि भारत के स्कूलों में मोटे बच्चों की संख्या बढ़ी है, और पतले बच्चों की घट गई है। इसका कारण है हमारी बदलती आदतें, बढ़ता उपभोक्तावाद, खासकर जंक फूड पर बढ़ता खर्च। बड़े शहरों की सड़कों पर पैक किए हुए जंक फूड की दुकानों पर भीड़ रहती है। लोग शिक्षा पर कम खर्च करते हैं, पर जंक फूड पर ज्यादा।
तेल की मात्रा घटाने पर ध्यान देना होगा, क्योंकि पिछले तीन दशकों में भारत में प्रति व्यक्ति तेल की खपत करीब पाँच गुना बढ़ चुकी है, जो मोटापे, डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसे रोगों का प्रमुख कारण है। समोसे जैसे व्यंजन, जब बार-बार एक ही तेल में तले जाएं, तो वह नुकसानदेह हो जाते हैं। मीठा कम खाएं, दालें और फाइबर बढ़ाएं, और रोज़ाना टहलना जरूरी बनाएं।
बढ़ता शहरीकरण, असंतुलित खानपान, जंक फूड का सेवन, घरों में तेल की बेतहाशा खपत और मोबाइल-जेनरेशन की गतिहीनता — ये सब मिलकर इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ-साथ शारीरिक गतिविधि में कमी और बढ़ता तनाव भी मोटापे को बढ़ावा दे रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में हर चौथा वयस्क मोटापे से जूझ रहा है, और यह समस्या अब छोटे कस्बों और गांवों तक भी तेजी से फैल रही है।
मोटापा बढ़ रहा है, जो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर और ऑटोइम्यून डिजीज तक ला सकता है। यह जनरेशन को खास खतरा है। माता-पिता को जंक फूड कम करने और घर के खाना में तेल की मात्रा घटाने पर ध्यान देना होगा। बच्चों को बाहर खेलने और एक्टिव रहने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है।
मोबाइल जनरेशन के लिए, समय से पहले बचपन खत्म हो रहा है, इसलिए सोशल मीडिया के प्रभाव से सावधान रहना चाहिए। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में 27 मिलियन से अधिक बच्चे मोटापे से ग्रस्त होंगे, जो आने वाले समय में बड़ी चुनौती साबित होगी।
मोटापा न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। तनाव और डिप्रेशन बढ़ाता है। इसलिए फिट रहें, स्वस्थ खाएं, अपने परिवार का ध्यान रखें, और जीवनशैली बदलें। अगर सही समय पर जीवनशैली में सुधार न किया गया, तो यह समस्या और गंभीर स्वास्थ्य संकट में बदल जाएगी।
फिट इंडिया तभी बढ़ेगा, जब हर घर स्वस्थ होगा। खुद और अपने बच्चों का ख्याल रखें, लाइफस्टाइल बदलें, और मोटापे को अपनी ज़िंदगी से बाहर करें।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और पूर्व में दैनिक भास्कर और इंडिया टीवी जैसे कई बड़े संस्थानों में डिजिटल डेस्क हेड करते रहे हैं. उनके फेसबुक पेज से.)
Last Updated on September 21, 2025 12:26 pm
