LPG shortage पर High Court सख्त, सरकार बोली- जनता को नहीं होने देंगे परेशानी

LPG shortage: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण एलपीजी की आपूर्ति पर पड़े असर को लेकर उठी चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि हालात से निपटने के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

मंगलवार को अदालत की नागपुर पीठ ने केंद्र सरकार के इस आश्वासन को स्वीकार करते हुए एलपीजी वितरकों द्वारा दायर याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरकार इस मामले में व्यक्तियों के हितों की रक्षा के लिए “सभी आवश्यक कदम” उठा रही है, ऐसे में याचिका में अब कुछ भी शेष नहीं रह जाता।

दरअसल, छह एलपीजी वितरकों ने याचिका दायर कर घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि ईरान युद्ध के चलते उत्पन्न ऊर्जा संकट ने वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे एलपीजी उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ा है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि नागपुर स्थित कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड, केंद्र के निर्देशों के बावजूद घरेलू एलपीजी आपूर्ति बढ़ाने में विफल रही। केंद्र ने पहले ही निर्देश दिया था कि मौजूदा संकट के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाए।

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अवर सचिव (एलपीजी) रमेश कृष्णा ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि सरकार हर स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं, लेकिन भारत सरकार लगातार निगरानी कर रही है और जरूरी कदम उठा रही है ताकि देश में किसी तरह की कमी या संकट न उत्पन्न हो।

हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया गया कि एलपीजी का भंडारण और वितरण मौजूदा नीतियों के अनुरूप ही किया जा रहा है। साथ ही, यदि किसी स्तर पर किसी वितरक द्वारा लापरवाही या नियमों का उल्लंघन होता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

केंद्र ने अदालत से यह भी कहा कि यह मामला व्यापक सार्वजनिक हित से जुड़ा है और इसका प्रभाव कुछ जिलों तक सीमित नहीं है। ऐसे में इस पर निर्णय लेने का अधिकार केंद्र और राज्य सरकारों को ही दिया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत को बताया कि सरकार कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत कर रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारत पर न पड़े। उन्होंने अदालत से याचिका को समाप्त करने का अनुरोध करते हुए कहा कि सरकार पर भरोसा किया जाना चाहिए।

अदालत ने केंद्र के इन तर्कों को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम पर्याप्त हैं।

Last Updated on April 22, 2026 12:38 pm

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