दिल्ली में माहौल गंभीर था और बातें सीधी. देशभर से आए विश्वकर्मा समाज के प्रतिनिधियों की आंखों में अपने परंपरागत हुनर (बढ़ई, लोहार, सुनार) को मशीनों और चाइनीज़ सामान के हाथों दम तोड़ते देखने की पीड़ा साफ़ थी. उन्होंने सत्ता और समाज में तिरस्कार, उपेक्षा और प्रतिनिधित्व की भारी कमी का दर्द बयां किया.
उनकी बातें सुनकर राहुल गांधी ने कहा, “यह लड़ाई सिर्फ़ कुछ सीटें मांगने की नहीं है.” उन्होंने समझाया कि असली जंग देश के पावर स्ट्रक्चर, शिक्षा और कॉर्पोरेट जगत में बराबर की हिस्सेदारी पाने की है.
राहुल ने इस लड़ाई का सबसे पहला और निर्णायक हथियार बताया—’ जाति जनगणना “. उन्होंने इसे एक “X-Ray” की तरह बताया, जो समाज की असली तस्वीर सामने लाएगी और बताएगी कि किसकी कितनी आबादी और हिस्सेदारी है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस इस संघर्ष में उनके साथ है और पार्टी के भीतर गुजरात से इसकी शुरुआत हो भी चुकी है, जहाँ ज़मीनी नेतृत्व को कमान सौंपी जा रही है.
मीटिंग का सार यही था कि जब तक समाज के अपने नेता नहीं उभरेंगे, तब तक स्थायी बदलाव नामुमकिन है.
बता दें, नेता विपक्ष Rahul Gandhi ने बीते दिनों देश भर से आए विश्वकर्मा समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. इस दौरान राहुल गांधी ने विश्वकर्मा समाज के प्रतिनिधियों से उनकी समस्याओं और उनके समाधानों पर विचार-विमर्श किया. विश्वकर्मा समाज के प्रतिनिधियों की मुख्य शिकायतों में- प्रतिनिधित्व की कमी, परंपरागत रोज़गार का छिन जाना- शामिल था.
वरिष्ठ पत्रकार राजेश यादव के फेसबुक पेज से…
Last Updated on June 27, 2025 1:07 pm
