“पाकिस्तान का नाम लेते-लेते इन फ्रॉड लोगों ने भारत को आधा पाकिस्तान ही बना दिया”

पुल नहीं गिरा है. भारत का चरित्र गिरा है. अगर ये लोग सत्ता में दस साल और रह गए तो भारत (India) को गुलाम बना देंगे. सिर्फ कागज पर भारत संप्रभु राष्ट्र होगा बाकी वही हाल होगा जो पाकिस्तान का है. पाकिस्तान (Pakistan) का नाम लेते-लेते इन फ्रॉड लोगों ने भारत को आधा पाकिस्तान ही बना दिया. मुट्ठी भर लोगों ने देश के संसाधनों पर कब्जा जमा रखा है. आर्थिक असमानता इतनी ज्यादा है कि ब्रिटिश राज की लूट भी कम लगने लगी है.
अंग्रेज कम से कम भारत (India) को आधुनिकता देकर गये. ये फ्रॉड तो सिर्फ लूट रहे हैं और देश को नाली में धकेल रहे हैं. सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं लेकिन सड़क पर कांवड़ियों की भीड़ और नंगई हर साल बढ़ रही है. पिछले दिनों कांवड़ियों ने सालों की मेहनत से खड़े किए गए होटल को तोड़-फोड़ कर नष्ट कर दिया. खाने में प्याज मिल गया इसलिए.
ऐसा क्यों हो रहा है? क्योंकि उन्हें पता है कि सूबे में भगवाधारी सरकार है. बनारसी भाषा में कहें तो कांवड़िए कानून को अपने एल पर रख कर चलते हैं. जेएनयू, डीयू जैसे सरकारी विश्वविद्यालय आज केशवकुंज के एक्सटेंशन ऑफिस की तरह काम कर रहे हैं. प्राइवेट यूनिवर्सिटी वैसे तो पढ़ने लायक नहीं हैं लेकिन जो हैं भी वहां नेता,नौकरशाह, कर्नल, मेजर और माफिया के बच्चे पढ़ रहे हैं.
ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में ठीक से टाईफाइड तक का इलाज तक करने की व्यवस्था नहीं है. कैंसर महामारी की तरह फैल रहा है. बच सकते हों तो खुद से बच लीजिए. सरकार से कोई उम्मीद मत रखिए. हवा,पानी, सब्जी, पनीर, दाल सब इतना प्रदूषित हो चुका है कि खाने लायक नहीं बचा. आम आदमी जाए तो जाए कहां?
जिस इलाके में रहता हूं वहां कुछ साल पहले तक साफ-सुथरी सड़कें और हरियाली हुआ करती थी. आज कचरे का ढ़ेर लगा रहता है. ग्रीन एरिया में हर साल एक दो मंदिर उग रहे हैं. हजारों करोड़ की लागत से बने फ्लाईओवर उद्घाटन से पहले ही दरक जा रहे हैं. यह किसी एक राज्य में नहीं पूरे देश में हो रहा है.
गुजरात में चलता पुल बीच से टूटकर गिर गया. दो दर्जन से ज्यादा लोग मारे गये. क्या किसी का इस्तीफा हुआ? किसी ने इस्तीफे की मांग की? कोई तो जिम्मेदार होगा? नितिन गडकरी जवाब देंगे या गुजरात का मुख्यमंत्री या गृह मंत्री या प्रधानमंत्री?
कुछ दिन पहले सूरत में एक आदमी बाइक समेत सड़क के अंदर घुस गया था. पता नहीं उसकी लाश मिली या नहीं. एक दौर था जब गुडगांव को मिलेनियम सिटी कहा जा रहा था. आज थोड़ी सी बरसात गुड़गांव को नंगा कर देती है. महीनों से गुड़गांव की गंदगी सड़क पर तैर रही थी. कोई उठाने वाला नहीं. करंट लगने से एक ग्राफिक डिजाइनर की मौत हो गई. अगला नंबर आपका हो सकता है.
दिल्ली में थोड़ी सी बारिश हुई. सैकड़ों जगहों पर गर्दन तक गंदला, बदबूदार पानी भर गया. इसी कथित शहर में दिल्ली में प्रधानमंत्री, मंत्री,सांसद, नौकरशाह रहते हैं लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता.
भारत बनाना रिपब्लिक बन चुका है. सिस्टम नाम की कोई चीज बची नहीं. सरकारें माफिया कार्टल की तरह काम कर रही है लेकिन भक्त मगन हैं कि भारत का स्वर्णकाल बस आने ही वाला है.
Seniour journalist विश्व दीपक के फेसबुक वॉल से…

Last Updated on July 11, 2025 11:30 am

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