कश्मीर, POK और पंडित नेहरू से जुड़े वो सवाल जो whatsapp university वाले खूब गाते हैं…

अशोक कुमार पांडेय
प्रश्न: जब पाकिस्तान ने क़बायली आक्रमण किया तो कश्मीर पर किसका अधिकार था? 
 उत्तर: जब पाकिस्तान ने 1947 में कबायली आक्रमण किया, तब कश्मीर पर महाराजा हरि सिंह का अधिकार था, जो जम्मू और कश्मीर रियासत के शासक थे। उस समय जम्मू और कश्मीर एक स्वतंत्र रियासत थी, जिसने अभी तक भारत या पाकिस्तान में विलय का फैसला नहीं किया था।
प्रश्न: पंडित नेहरू ने 26 सितंबर 1947 को सरदार पटेल को पत्र में क्या लिखा था?
उत्तर: पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सरदार वल्लभभाई पटेल को कश्मीर पर पाकिस्तानी कबायली हमले से पहले पत्र लिखा था। नेहरू ने 26 सितंबर 1947 को पटेल को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कश्मीर की स्थिति पर चिंता जताई थी और संभावित खतरे की ओर इशारा किया था। इस पत्र में नेहरू ने कश्मीर रियासत की नाजुक स्थिति और वहां के हालात पर चर्चा की थी, विशेष रूप से महाराजा हरि सिंह की अनिर्णय की स्थिति और पाकिस्तान की ओर से बढ़ते दबाव के बारे में।
 
प्रश्न: क्या महाराजा हरि सिंह पाकिस्तानी हमले का सामना कर पाए?
उत्तर: महाराजा हरि सिंह की सेना 1947 में पाकिस्तानी कबायली हमले का प्रभावी ढंग से सामना नहीं कर पाई, क्योंकि उनकी सेना छोटी, कमजोर, और आधुनिक हथियारों व प्रशिक्षण से वंचित थी, जबकि हमला पाकिस्तानी सेना के समर्थन से योजनाबद्ध और तेज था; आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और अनिर्णय के कारण भी रियासत की सेना श्रीनगर की ओर बढ़ते कबायलियों को रोकने में असमर्थ रही।
 
प्रश्न: हरि सिंह ने भारत से जब सहायता मांगी तो पाकिस्तानी कहाँ तक पहुँच आए थे?
उत्तर: जब महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत से सैन्य सहायता मांगी, तब पाकिस्तानी कबायली हमलावर (पाकिस्तानी सेना के समर्थन से) श्रीनगर के काफी करीब पहुंच चुके थे। वे बारामूला और मुजफ्फराबाद जैसे प्रमुख कस्बों पर कब्जा कर चुके थे और श्रीनगर से लगभग 50-60 किलोमीटर दूर थे। कबायलियों ने तेजी से कश्मीर घाटी में प्रवेश किया था और श्रीनगर हवाई अड्डे तक खतरा पैदा हो गया था, जो रियासत की राजधानी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था। इस स्थिति में महाराजा ने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर सहायता मांगी।
 
प्रश्न: यानी महाराजा के रहते ही POK बन गया था?
उत्तर: हां, तकनीकी रूप से कहें तो महाराजा हरि सिंह के शासनकाल के दौरान ही वह क्षेत्र, जिसे आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) कहा जाता है, 1947 में पाकिस्तानी कबायली हमलावरों और पाकिस्तानी सेना के नियंत्रण में चला गया था। जब 22 अक्टूबर 1947 को कबायली हमला शुरू हुआ, तो उन्होंने मुजफ्फराबाद, मीरपुर, कोटली, और गिलगित-बाल्टिस्तान के कुछ हिस्सों पर तेजी से कब्जा कर लिया। महाराजा की सेना इन क्षेत्रों को वापस लेने में असमर्थ थी।
 
प्रश्न: महाराजा ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कब किया?
उत्तर: 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा ने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किया, जिसके बाद भारतीय सेना ने हस्तक्षेप किया और श्रीनगर सहित कश्मीर घाटी के बड़े हिस्से को बचा लिया। लेकिन उस समय तक मुजफ्फराबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान, और मीरपुर जैसे क्षेत्र पाकिस्तानी नियंत्रण में जा चुके थे, जो बाद में PoK और उत्तरी क्षेत्रों (अब गिलगित-बाल्टिस्तान) के रूप में जाने गए। इसलिए, महाराजा के शासन के दौरान ही PoK का गठन हो गया था, हालांकि यह उनके नियंत्रण के बाहर की परिस्थितियों और पाकिस्तानी आक्रमण के कारण हुआ।
 
प्रश्न: भारतीय सेना कश्मीर में कब पहुंची?
उत्तर: भारतीय सेना 27 अक्टूबर 1947 को कश्मीर में पहुंची। महाराजा हरि सिंह द्वारा 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर करने के बाद, भारतीय सेना ने तत्काल कार्रवाई की और अगले दिन सुबह श्रीनगर हवाई अड्डे पर पहली टुकड़ियां उतारीं, ताकि पाकिस्तानी कबायली हमलावरों को रोककर श्रीनगर और कश्मीर घाटी को बचाया जा सके।
 
प्रश्न: भारतीय सेना ने कौन-कौन से क्षेत्र मुक्त करवाए?
उत्तर: भारतीय सेना ने 1947-48 के प्रथम भारत-पाक युद्ध में जम्मू और कश्मीर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को पाकिस्तानी कबायली हमलावरों और पाकिस्तानी सेना से मुक्त कराया, जिनमें श्रीनगर (राजधानी और हवाई अड्डा सहित), बारामूला, उरी, बदगाम, पुंछ, राजौरी, और लद्दाख के कुछ हिस्से, विशेष रूप से लेह और ज़ोजी ला शामिल हैं; इन अभियानों ने कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र के बड़े हिस्से को सुरक्षित किया।
 
प्रश्न: क्या सरदार पटेल ने जून-1948 में गोपालस्वामी अयांगर को लिखे पत्र में क्या चिंता जताई थी?
उत्तर: सरदार वल्लभभाई पटेल ने 4 जून 1948 को गोपालस्वामी अय्यंगार को देहरादून से लिखे एक पत्र में प्रथम भारत-पाक युद्ध (1947-48) की लागत और सैन्य स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। पत्र में उन्होंने लिखा, “सैन्य स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, और मुझे डर है कि हमारी सैन्य संसाधन अपनी चरम सीमा पर हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण मामला (युद्ध) कितने समय तक चलाना होगा, यह अनुमान लगाना मुश्किल है।” सरदार पटेल ने सैन्य संसाधनों की कमी और युद्ध के लंबे समय तक चलने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
लेखक कश्मीर के इतिहास विशेषज्ञ के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं. उनके एक्स हैंडल से ली गई पोस्ट…

Last Updated on August 1, 2025 6:16 pm

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