– जमशेद क़मर सिद्दीक़ी
Street Dog Lovers: मेरे पापा एक वेटरिनरी डॉक्टर थे, इसलिए बचपन से ही जिस घर में मेरी परवरिश हुई, वहां जानवरों के लिए एक सॉफ़्ट कॉर्नर था। हालांकि पापा गवर्नमेंट हॉस्पिटल में पोस्टेड थे, लेकिन उस वक्त वेटरिनरी डॉक्टर कम होते थे, तो पापा जब घर पर होते थे, शहर के दूर-दराज़ के लोग पूछते-पाछते पता लगाकर घर आ जाते थे। रात-बिरात कभी कोई अपना खरगोश लेकर खड़ा है कि बिल्ली ने उसे ज़ख्मी कर दिया है, कोई अपनी बिल्ली लेकर आता था कि यह बीमार है।
सबसे ज़्यादा तादाद कुत्तों को लेकर आने वालों की होती थी—जो या तो बीमार होते थे या ज़ख्मी। हमारे घर में जानवरों के लिए एक खास तरह का सॉफ़्ट कॉर्नर हमेशा रहा। मैंने बचपन में अलग-अलग वक्त पर तीन कुत्ते भी पाले और ईमानदारी से कहूं तो मुझे डॉग्स पसंद भी हैं। लेकिन अभी जो हो रहा है, वह मेरी समझ से परे है।
सरकार कुत्तों के रहने के लिए शेल्टर बना रही है, खाने-पीने का इंतज़ाम कर रही है, वैक्सीनेट भी करवाएगी, इलाज भी होगा। पहली बार ऐसा हुआ है कि कम्युनिटी डॉग्स के लिए कोई आदेश आया है। यह तो अच्छी बात होनी चाहिए।
अजीब बात है कि जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं और चाहते हैं कि वे सड़क पर ही जिएं-मरें, दुत्कारे-भगाए जाए – उन्हें डॉग लवर कहा जाता है! यह कैसा लव है भई जो किसी को सम्मानजनक जीवन का विरोध करता है? ज़िंदाबाद-मुर्दाबाद करने वालों का तर्क है कि शेल्टर में उनका ख्याल नहीं रखा जाएगा, करप्शन होगा, उन्हें खाने-पीने को पर्याप्त नहीं मिलेगा।
तो ऐसे में जो विरोध और एक्टिविज़्म लोग सड़क पर कर रहे हैं, वह उन शेल्टरों और सरकार के खिलाफ करना चाहिए। डॉग लवर्स को चाहिए कि वो एक संस्था बनाएं, जो शेल्टर से हर महीने रिपोर्ट ले, औचक निरीक्षण करे और यह सुनिश्चित करे कि सभी कुत्तों को वो सुविधाएं मिल रही हैं जो कोर्ट/सरकार की तरफ से लिस्टेड है.
पर यह क्या बात हुई कि ज़िद है कि कुत्तों को यूँ ही सड़क पर भटकने दिया जाए। वो सिर्फ इसलिए मौसम की सर्दी-गर्मी, भूख, गाड़ियों से कुचले जाने के खतरे, बीमारी और दुत्कार सहते हुए ज़िंदगी गुज़ारें… क्योंकि हम उन्हें प्यार करते हैं!
(लेखक आजतक रेडियो से जुड़े हैं और Facebook पर अपनी पहचान के तौर पर लिखते हैं- “कहानियां लिखता हूं, कहानियां सुनाता हूं”)
Last Updated on August 14, 2025 10:43 am
