“PM मोदी के लिए खून-पानी साथ नहीं बह सकता लेकिन युद्ध-व्यापार चल सकता है?”

– विश्व दीपक
PM Modi China Visit: राजेंद्र यादव ने एक बार लिखा था कि उनकी हालत दो प्रेम संबंधों के बीच उस बंदर जैसी है जो एक डाल छोड़कर दूसरे डाल पर बैठने के लिए उछाल मारता है लेकिन खतरा भांपकर या अनिश्चय की स्थिति में बीच से ही वापस पहली वाली डाल पर लौट आता है. जहां तक याद कर पा रहा हूं ‘तद्भव’ में छपे ‘मुड़-मुड़ कर देखता हूं’ में उन्होंने यह लिखा था. तब ‘तद्भव’ के संपादक अखिलेश हुआ करते थे.
बहरहाल, मुझे राजेंद्र यादव वाले बंदर की याद तब आई जब मैंने यह तस्वीर देखी. आज मोदी की के नेतृत्व में भारत की हालत उस बंदर जैसी हो गई है जो दो प्रेम संबंधों के बीच उछल कूद करता रहता है. लेकिन अंततः वह अकेला रह जाता है. राजेंद्र यादव भी अकेले रह गए थे.
अमरीकी बिल्डर ट्रंप [जो दुर्भाग्य से राष्ट्रपति भी है] के साथ हगलोमेसी की विराट असफलता के बाद मोदी जी ने एक बार फिर झुप्लोमेसी की डाल पर बैठने का निश्चय किया है. लेकिन वो हासिल क्या करना चाहते हैं? पता नहीं. अंत में उन्हें निराशा ही हाथ लगनी है. यह अभी से तय है.
बस तीन बातें मैं भक्तसाधारण और उन लोगों के सामने रिकॉर्ड के तौर पर रख रहा हूं जिन्हें आगे चलकर मोदी के चीन दौरे में मास्टरस्ट्रोक खोजना है.
1. मोदी का दौरा ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में हो रहा है. चीन,अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान के साथ उस युद्ध में शामिल था.
2. लद्दाख में चीन ने अब तक कब्ज़ा खाली नहीं किया है.
3. चीन ब्रह्मपुत्र में दुनिया का सबसे बड़ा बांध बन रहा है जिसका वह भारत के खिलाफ रणनीतिक इस्तेमाल करेगा ही करेगा.
इन सबके बाद भी मोदी जी चीन जा रहे हैं तो इसका मतलब यही है कि उनकी निगाह में खून और पानी भले ही एक साथ न बहे लेकिन युद्ध और व्यापार साथ साथ चल सकता है.
लेखक पत्रकार हैं और वर्तमान में नेशनल हेराल्ड में कार्यरत हैं. उनके फेसबुक पेज से… 
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता के लिए News Muni ज़िम्मेदार नहीं है.

Last Updated on August 23, 2025 9:06 pm

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