US-India Trade Tension: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर भारत रूसी तेल के मुद्दे पर अमेरिका के साथ सहयोग नहीं करता, तो अमेरिका भारत पर टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ा सकता है। ट्रंप का कहना है कि उनकी सरकार इस मामले में नई दिल्ली से ज्यादा समर्थन की उम्मीद करती है।
रविवार को मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वे मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना जरूरी था। भारत हमारे साथ व्यापार करता है और हम बहुत जल्दी उन पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।”
उन्होंने यह बात अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों और अमेरिकी नीति पर बोलते हुए कही।
पहले भी लग चुके हैं टैरिफ
यह बयान ऐसे समय आया है जब पहले भी ट्रंप के कार्यकाल में भारत पर टैरिफ लगाए जा चुके हैं।
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साल 2018 में अमेरिका ने भारतीय स्टील और एल्युमिनियम पर शुल्क लगाया था।
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2019 में भारत को GSP योजना से बाहर कर दिया गया था, जिसके तहत कई भारतीय सामान अमेरिका में बिना शुल्क जाते थे।
निर्यात और रोजगार पर असर की आशंका
ट्रेड विशेषज्ञों का कहना है कि अगर टैरिफ और बढ़े, तो भारतीय सामान अमेरिका में महंगे हो जाएंगे। इससे भारत का निर्यात 2025-26 में करीब 40 से 45 प्रतिशत तक घट सकता है।
इसका असर कपड़ा उद्योग, जेम्स एंड ज्वेलरी, झींगा (श्रिम्प) और कालीन जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहां लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।
2025 में बढ़ाए गए भारी शुल्क
साल 2025 में अमेरिका ने भारत के कई उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। इनमें शामिल हैं—
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टेक्सटाइल और रेडीमेड कपड़े
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जेम्स एंड ज्वेलरी
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कालीन और फर्नीचर
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समुद्री उत्पाद
अमेरिकी अधिकारियों ने इसके पीछे भारत द्वारा रूस से तेल और रक्षा उपकरण खरीदने को कारण बताया।
हालांकि, करीब 30 प्रतिशत भारतीय निर्यात, जैसे दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पाद अभी भी बिना शुल्क जाते हैं। वहीं, करीब 4 प्रतिशत सामान पर 25 प्रतिशत टैरिफ है, लेकिन बाकी बड़े हिस्से पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लागू है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी, तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में और तनाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय उद्योग और रोजगार पर पड़ सकता है।
Last Updated on January 5, 2026 7:00 pm
