विटामिन D टॉक्सिसिटी: जानिए ज्यादा खुराक लेने के खतरे और सावधानियां

सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसे दावे तेज़ी से फैल रहे हैं कि Vitamin D के सप्लीमेंट दिल और किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इन दावों में कितनी सच्चाई है, यह जानने के लिए Indian express ने वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मुंबई सेंट्रल के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. परिन संगोई से बातचीत की।

डॉ. संगोई के मुताबिक, विटामिन D स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल से गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा,
“खुद से दवा लेना और लंबे समय तक अधिक मात्रा में विटामिन D लेना गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। सप्लीमेंट को दवा की तरह ही समझें और इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लें।”

डॉ. संगोई ने स्पष्ट किया कि बिना चिकित्सकीय निगरानी के विटामिन D लेना नुकसानदायक हो सकता है।
“विटामिन D एक फैट-सॉल्यूबल विटामिन है, यानी शरीर अतिरिक्त मात्रा को आसानी से बाहर नहीं निकाल पाता। समय के साथ यह ज़हरीले स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे किडनी फेल होना, दिल की धड़कन का अनियमित होना, मतली, उल्टी और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं,” उन्होंने बताया।

भारत में आम है विटामिन D की कमी, फिर भी जोखिम क्यों?

भारत में विटामिन D की कमी आम है, लेकिन समस्या सप्लीमेंट में नहीं, बल्कि इसके बिना निगरानी के इस्तेमाल में है।
डॉ. संगोई के अनुसार,
“कमी व्यापक होने के कारण कई लोग यह मान लेते हैं कि हाई-डोज सप्लीमेंट नियमित रूप से लेना सुरक्षित है। जबकि वास्तव में विटामिन D एक सामान्य विटामिन से ज़्यादा हार्मोन की तरह काम करता है। इसकी अधिक मात्रा खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ा देती है, जिससे किडनी को नुकसान और दिल से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।”

किन लक्षणों पर सतर्क होना चाहिए?

शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं और नज़रअंदाज़ हो सकते हैं।
“इनमें लगातार मतली, उल्टी, भूख न लगना, अत्यधिक प्यास, थकान और दिल की धड़कन तेज़ महसूस होना शामिल है। गंभीर मामलों में पेशाब की मात्रा कम होना, भ्रम की स्थिति या दिल की धड़कन में अचानक बदलाव दिख सकता है, जिनमें तुरंत मेडिकल मदद ज़रूरी है,” डॉ. संगोई ने कहा।

दिल पर कैसे असर डालती है विटामिन D की अधिकता?

विटामिन D टॉक्सिसिटी से बढ़ा हुआ कैल्शियम स्तर दिल की इलेक्ट्रिकल प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
डॉ. संगोई के अनुसार, इससे धड़कन तेज़ होना, अनियमित हार्टबीट या बहुत तेज़ और बहुत धीमी धड़कन के बीच अचानक बदलाव हो सकता है, जो समय पर इलाज न मिलने पर खतरनाक साबित हो सकता है।

सबसे ज़्यादा जोखिम में कौन?

डॉ. संगोई ने बताया कि जो लोग बिना ब्लड टेस्ट के लंबे समय तक हफ्ते या महीने में हाई-डोज विटामिन D लेते हैं, उनमें खतरा ज़्यादा होता है।
“किडनी की बीमारी, दिल की समस्या वाले मरीज, या एक साथ कई सप्लीमेंट लेने वाले लोग विशेष रूप से जोखिम में हैं। अहम बात यह है कि युवा और देखने में स्वस्थ लोग भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।”

विटामिन D लेने का सही और सुरक्षित तरीका क्या है?

डॉ. संगोई ने ज़ोर देकर कहा कि विटामिन D सप्लीमेंट हमेशा ब्लड टेस्ट के आधार पर ही लेना चाहिए।
“डोज और अवधि व्यक्ति विशेष के अनुसार तय होनी चाहिए और समय-समय पर इसकी समीक्षा ज़रूरी है। ज़रूरत से ज़्यादा लेना कोई अतिरिक्त लाभ नहीं देता, बल्कि नुकसान ही पहुंचाता है,” उन्होंने कहा।

Last Updated on January 6, 2026 12:33 pm

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