– नितिन ठाकुर
आपने सुना होगा कि पहलगाम (Pahalgam Attack) के बाद एजेंसियां कह रही थीं कि ये हमला किसी एक आतंकी संगठन ने नहीं किया बल्कि इस बार कई संगठनों ने मिलकर किया है। टीआरएफ की छतरी तले ये एक हो गए हैं। इस तरह के गठजोड़ कश्मीर में पहले भी हुआ करते थे जब अफगान जिहाद के बाद बेरोज़गार हुए लड़के कश्मीर (Kashmir) में जिहाद के नाम पर जुटाए गए थे। उस दौर में सबको लीड लेनी थी और इस चक्कर में सब अपने हिसाब से लट्ठ चला रहे थे। आईएसआई (ISI) ने सबको एक लाइन में चलाने हेतु उस वक्त मसूद अज़हर की सेवाएं ली थीं। यही सेवा देने जब वो कश्मीर पहुंचा तब गिरफ्तार कर लिया गया था।
लश्कर, अल कायदा, ISIS और हमास: पुराने दावे और नए सबूत
अब कुछेक साल से एजेंसियां कहने लगी थीं कि लश्कर ने अपने लिंक अल कायदा से आगे फैलाकर आईएस और हमास तक जोड़ लिए हैं। इस बात को लोग हल्के में ले रहे थे। सोच रहे थे कि एजेंसियाँ तुक्के मार रही हैं मगर अब फोटो वीडियो बाहर आने लगे हैं। हमास कमांडर नाजी ज़हीर की गुजरांवाला में लश्कर कमांडर राशिद अली संधू से गलबहियां हो रही हैं। ज़हीर का ये पहला पाकिस्तान दौरा नहीं था। वो पहले भी आया है और पीओके तक पहुंचा है।
भारत की विदेश नीति, इज़रायल और फिलिस्तीन की जटिलता
ऐसे में जहां इज़रायल को कायदे से अमेरिका पर दबाव बनाकर पाकिस्तान को हड़कवाना चाहिए, वहीं संकट भारतीय उदारवादियों और मुसलमानों (Muslims) के सामने भी खड़ा होगा। मूलतः भारत की पॉलिसी प्रो फिलिस्तीन रही है। सत्ता में आए दक्षिणपंथी सरकार को एक दशक हो गए लेकिन मोटामाटी भारत खुलकर इज़रायल का समर्थन अभी भी नहीं करता। हमास तक प्रतिबंधित नहीं है। इसके उलट तेल अवीव इने गिने देशों में था जो ऑपरेशन सिंदूर के वक्त भारत का समर्थन कर रहे थे।
हमास की तस्वीरें और भारत सरकार पर बढ़ता दबाव
ऐसे में ये तस्वीरें भारत सरकार पर दबाव ज़रूर बनाएंगी कि वो कम से कम हमास के स्टेटस को लेकर पुनर्विचार करे। गाज़ा में एकतरफा संहार जितना कष्टकारी है उसकी कड़े शब्दों में आलोचना भारत के लिए अपने कारणों से पहले भी मुश्किल रही है लेकिन अब उसकी परेशानी और बढ़ेगी।
भारत के मुसलमान, हमास और एक असहज सच्चाई
ये दुखद है कि हमास कमांडर उस भारत के खिलाफ बोल रहा है जिससे वो समर्थन चाहते रहे हैं और जहां पाकिस्तान (Pakistan) से भी ज़्यादा मुसलमान हैं। सिर्फ़ कश्मीर में मुसलमान नहीं रहते बल्कि पूरा भारत मुसलमानों का घर है। वो यहां के तंत्र और पॉलिसी मेकिंग में शामिल हैं। हिंदुस्तान पर गिरने वाला कोई मिसाइल या फटने वाला बम हिंदू और मुसलमान दोनों को मारेगा लेकिन अपनी वैश्विक गतिविधियों के लिए स्पेस बनाने के लिए हमास और लश्कर को गठजोड़ करना पड़ेगा। ऐसे में हमास को अगर ये जटिलताएं इग्नोर करनी पड़ें तो वो करेगा।
भारत के लिए एक नई और अभूतपूर्व चुनौती
ये एक अभूतपूर्व स्थिति बनेगी। भारत को अपने दोस्त-दुश्मनों का चुनाव नए सिरे से करना होगा। नैतिकताओं की अपनी अहमियत है लेकिन कठोर सच्चाइयों को दरकिनार करके कोई देश चल नहीं सकता।
(लेखक सीनियर पत्रकार हैं और News 24, TV 9 Bharatvarsh, Zee News और Aajtak जैसे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. मौजूदा दौर में एक निजी चैनल के पॉडकास्ट विभाग का कार्यभार संभाल रहे हैं और ‘पढ़ाकू नितिन’ नाम से एक प्रसिद्ध कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं.)
Last Updated on January 10, 2026 9:50 am
