नई दिल्ली — संसद में पेश हुए Economic Survey 2025-26 ने एक बात साफ कही है:
भारत की अर्थव्यवस्था इस वक्त मज़बूत हालत में है, लेकिन आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं है।
सरकार के इस सर्वे के मुताबिक, साल 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रही। यानी देश की कमाई तेज़ी से बढ़ी है। यही वजह है कि भारत आज भी दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। अगले साल के लिए भी सरकार को उम्मीद है कि ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है।
सरल शब्दों में कहें तो—देश की गाड़ी चल रही है, रफ्तार ठीक है, लेकिन रास्ते में मोड़ और गड्ढे दोनों हैं।
आम लोगों की जेब से चल रही है अर्थव्यवस्था
Economic Survey बताता है कि इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह है—देश के लोगों का खर्च करना।
घर-घर में खरीदारी, रोज़मर्रा का खर्च और ज़रूरतें पूरी करने पर होने वाला खर्च GDP का करीब 61.5% है। मतलब साफ है—अगर लोग खर्च करते रहेंगे, तो बाजार चलता रहेगा।
इसके साथ ही सरकार और निजी कंपनियों का निवेश भी बढ़ा है। फैक्ट्रियाँ, सड़कें, इन्फ्रास्ट्रक्चर—इन सब पर खर्च GDP का करीब 30% तक पहुँच गया है।
महंगाई से राहत की खबर
Economic Survey में एक राहत की खबर भी है।
साल 2025 के ज्यादातर महीनों में महंगाई बहुत कम रही। औसतन यह 1.7% के आसपास रही। इसका सीधा मतलब है कि खाने-पीने और रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतों में बहुत ज़्यादा उछाल नहीं आया।
कम महंगाई का फायदा सीधे आम आदमी को मिलता है—घर का बजट थोड़ा संभल जाता है।
सरकार के सुधार और बड़े दावे
रिपोर्ट में सरकार ने अपने सुधारों का भी ज़िक्र किया है।
जैसे—पुराने 29 श्रम कानूनों को मिलाकर चार लेबर कोड बनाए गए, ताकि नौकरी देने और पाने की प्रक्रिया आसान हो।
सरकार का कहना है कि इससे रोजगार बढ़ेगा और कंपनियों को भी राहत मिलेगी।
विदेशी मोर्चे पर भी स्थिति ठीक
Economic Survey के मुताबिक भारत के पास इस वक्त 700 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है। यानी अगर बाहर से कोई झटका आता है—तेल महंगा हो या डॉलर मज़बूत—तो भारत के पास उससे निपटने की ताकत है।
लेकिन चेतावनी भी साफ है
सर्वे यह भी कहता है कि सब कुछ परफेक्ट नहीं है।
दुनिया भर में युद्ध, मंदी और आर्थिक अनिश्चितता का असर भारत पर भी पड़ सकता है।
इसके अलावा कई राज्यों का खर्च और कर्ज़ चिंता की वजह है। अगर यह काबू में नहीं रहा, तो आने वाले वक्त में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष
Economic Survey 2026 का सीधा संदेश यही है—
देश की अर्थव्यवस्था सही दिशा में है, रफ्तार अच्छी है, लेकिन सरकार यह नहीं चाहती कि लापरवाही हो।
अब देखना यह होगा कि Budget 2026 में सरकार इस रिपोर्ट के इशारों को कैसे ज़मीन पर उतारती है—और आम आदमी की ज़िंदगी में इसका असर कितना दिखता है।
Last Updated on January 30, 2026 3:23 pm
