नई दिल्ली: लोकसभा में जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 (Jan Vishwas Bill 2026) को लेकर चल रही चर्चा के बीच पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस विधेयक की प्रासंगिकता और प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि यह हर भारतीय नागरिक के लिए जानना जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम लोगों के अधिकारों पर पड़ सकता है।
क्या है मामला और क्यों जरूरी है जानना?
पप्पू यादव ने अपने भाषण में कहा कि सरकार इस विधेयक को सुधार और सरलीकरण के नाम पर पेश कर रही है, लेकिन असल सवाल यह है कि इससे किसे फायदा होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे जरूरी होती है, और यदि कोई कानून इन मूल्यों को कमजोर करता है, तो देश के हर नागरिक को इसके बारे में जागरूक होना चाहिए।
किसानों और गरीबों पर असर
उन्होंने आरोप लगाया कि आज छोटे किसान, मजदूर और गरीब लोग मामूली आर्थिक जरूरतों या कर्ज के कारण कानूनी उलझनों में फंस जाते हैं, जबकि बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को राहत मिल जाती है। उन्होंने पूछा कि इस विधेयक में छोटे व्यापारियों, लघु उद्यमियों और बटाईदारों के लिए क्या प्रावधान हैं।
युवाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल
पप्पू यादव ने कहा कि युवा लोकतंत्र की असली ताकत हैं, लेकिन उन्हें अपनी आवाज उठाने पर हेट स्पीच जैसे मामलों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर खतरा बताया और कहा कि कानून का इस्तेमाल डर पैदा करने के लिए नहीं होना चाहिए।
नकली दवाइयों और जन स्वास्थ्य पर चिंता
उन्होंने देश में बढ़ते नकली दवाओं के कारोबार को गंभीर मुद्दा बताया। उनका कहना था कि मामूली जुर्माने से ऐसे अपराधों पर रोक नहीं लग सकती। उन्होंने सरकार से मांग की कि जन स्वास्थ्य से जुड़े अपराधों के लिए कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए।
पर्यावरण और प्रदूषण का मुद्दा
सांसद ने बड़े उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कमजोर दंड व्यवस्था के कारण पर्यावरणीय अपराध बढ़ सकते हैं, जिसका सबसे अधिक असर गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ता है। उन्होंने स्वच्छ वातावरण को हर नागरिक का मौलिक अधिकार बताया।
नौकरशाही और जवाबदेही पर सवाल
पप्पू यादव ने चेतावनी दी कि नौकरशाही पर अत्यधिक निर्भरता भ्रष्टाचार और मनमानी को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और विधायिका की भूमिका सर्वोच्च रहनी चाहिए और आम नागरिक के लिए न्याय तक पहुंच आसान होनी चाहिए।
पुनर्विचार की मांग
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि यह विधेयक दलित, आदिवासी, किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं करता। उन्होंने सदन से मांग की कि इस कानून पर पुनर्विचार किया जाए और इसे अधिक जनहितकारी बनाया जाए, ताकि लोकतंत्र की मूल भावना और नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
Last Updated on April 3, 2026 5:53 pm
