MP: छतरपुर के तीन ‘मृत’ लोगों से मिलिए, खोल रहे हैं सरकारी लापरवाही की पोल

– धीरेंद्र गुप्ता

मध्य प्रदेश (MP) के छतरपुर (Chhatarpur) जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।

मामला गौरिहार विकासखंड की ग्राम पंचायत चंद्रपुरा का है। यहां आरोप है कि पंचायत स्तर पर तीन जिंदा लोगों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।

इस गड़बड़ी के कारण प्रभावित लोगों की पेंशन बंद हो गई, राशन रुक गया और सरकारी योजनाओं का लाभ भी खत्म हो गया।

गांव की गिरजा विश्वकर्मा और रामबाई रैकवार—दोनों महिलाएं आज भी जीवित हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाया गया। इसी तरह पंचायत के एक कर्मचारी कल्लू अहिरवार को भी कागजों में मृत घोषित कर उनका वेतन रोक दिया गया।

पीड़ितों ने जब इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचाई, तब जांच के आदेश दिए गए। जांच के बाद पंचायत सचिव अमर सिंह को निलंबित कर दिया गया है।

हालांकि, कार्रवाई के बाद भी कई बड़े सवाल सामने हैं। क्या इतने बड़े मामले में सिर्फ सचिव ही जिम्मेदार है? या फिर यह एक संगठित लापरवाही या साजिश का हिस्सा है?

यह सवाल भी उठ रहा है कि बिना सही जांच के किसी को मृत कैसे घोषित कर दिया गया। और इतनी बड़ी गड़बड़ी की जानकारी समय रहते किसी को क्यों नहीं हुई?

सबसे अहम सवाल—अब तक इस मामले में एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई?
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी जीवित व्यक्ति को मृत दिखाना और फर्जी दस्तावेज बनाना गंभीर आपराधिक कृत्य है।

फिलहाल निलंबन की कार्रवाई हुई है, लेकिन क्या यह पर्याप्त है?
क्या दोषियों पर आपराधिक केस दर्ज होगा?

जांच अभी जारी है। लेकिन जब तक पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह मामला एक बड़ा उदाहरण बना रहेगा—कि आखिर प्रशासनिक व्यवस्था में जिंदा इंसान कब तक कागजों में “मरते” रहेंगे।

Last Updated on April 28, 2026 9:42 am

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