UPI MDR पर सियासी घमासान, विपक्ष ने लगाया अमेरिकी दबाव का आरोप, सरकार ने क्यों किया इनकार?

UPI MDR के नए नियम पर सियासी विवाद बढ़ गया है. ₹2,000 से ऊपर Merchant Payments पर 0.4% MDR लागू होने के बाद विपक्ष ने इसे अमेरिकी दबाव से जोड़कर सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की. सरकार ने आरोप खारिज करते हुए कहा कि UPI Customers के लिए Free रहेगा और नीति संबंधी फैसले भारत स्वतंत्र रूप से लेता है.

UPI पर MDR क्यों आया? विपक्ष के ‘American Pressure’ आरोप और सरकार के जवाब में कितना अंतर?
UPI पर MDR क्यों आया? विपक्ष के ‘American Pressure’ आरोप और सरकार के जवाब में कितना अंतर?

National Payments Corporation of India यानी NPCI की ओर से ₹2,000 से ज्यादा के Person-to-Merchant यानी P2M UPI Transactions पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की घोषणा के एक दिन बाद इस फैसले पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी. विपक्षी दलों ने सरकार से फैसला तत्काल वापस लेने की मांग की है.

विपक्ष के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि MDR का फैसला “अमेरिकी दबाव” में लिया गया है और इससे US Card Companies को UPI के मुकाबले प्रतिस्पर्धा का मौका मिलेगा. हालांकि, Finance Ministry ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि UPI से जुड़े फैसले भारत स्वतंत्र रूप से लेता है और इसका उद्देश्य एक Self-Sustaining, Inclusive और Affordable Digital Payments Ecosystem तैयार करना है.

Finance Ministry ने क्या कहा?

Finance Ministry ने स्पष्ट किया कि UPI Customers के लिए Free रहेगा. Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई Charge नहीं लगेगा. ₹2,000 तक के Merchant Payments भी Free रहेंगे.

सरकार के मुताबिक, लगभग 96% P2M Transactions नए MDR Framework से प्रभावित नहीं होंगे. ₹1 लाख प्रति महीने तक UPI QR के जरिए Payment लेने वाले छोटे Merchants और Street Vendors के लिए भी Zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी.

सरकार का कहना है कि MDR Tax नहीं है और इसे Government या NPCI द्वारा Revenue के तौर पर नहीं लिया जाएगा. यह Payment Ecosystem में Banks, Payment Service Providers और UPI Application Providers के बीच वितरित होगा.

Rahul Gandhi ने इसे ‘UPI Tax’ कहा

Lok Sabha में Leader of Opposition Rahul Gandhi ने इस फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और UPI Charge को “UPI Tax” बताया. उन्होंने सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की और इसे अमेरिकी दबाव से जोड़ते हुए आरोप लगाए. ये आरोप विपक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आए हैं.

Congress President Mallikarjun Kharge ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने MDR के फैसले को भारत की Trade और Foreign Policy पर कथित अमेरिकी दबाव से जोड़ते हुए सवाल उठाए.

हालांकि, Finance Ministry ने साफ कहा है कि Foreign Influence से जुड़े दावे गलत हैं और UPI Policy से जुड़े फैसले भारत अपने आर्थिक और डिजिटल भुगतान संबंधी उद्देश्यों के आधार पर लेता है.

Akhilesh Yadav से Sanjay Singh तक विरोध

Samajwadi Party President Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया कि UPI Payments पर Fee लगाने से आम लोगों और कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की Fees के जरिए भारत को Trillion-Dollar Economy बनाया जा सकता है.

AAP सांसद Sanjay Singh ने भी MDR को लेकर सरकार पर निशाना साधा. उनका तर्क था कि सरकार भले ही कह रही हो कि Charge Merchant से लिया जाएगा, लेकिन Merchant अपने खर्च की भरपाई सामान की कीमत बढ़ाकर Customer से कर सकता है.

RJD नेता Manoj Jha ने भी इस फैसले को अमेरिकी प्रभाव से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की. CPI महासचिव D Raja ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने और UPI Transactions को Free रखने की मांग की.

ये सभी बयान विपक्षी नेताओं के हैं और सरकार ने अमेरिकी दबाव के आरोपों को खारिज किया है.

Rajnath Singh ने UPI के 10 साल और 23.66 अरब Transactions गिनाए

वहीं Defence Minister Rajnath Singh ने Kolkata में UPI की उपलब्धियों और Digital Payments के विस्तार का उल्लेख करते हुए सरकार की नीति का बचाव किया.

उन्होंने कहा कि UPI के शुरुआती दौर में कई लोगों को इसके सफल होने पर संदेह था. उनके मुताबिक, अगस्त 2026 में UPI के जरिए करीब 23.66 अरब Transactions हुए, जिनकी कुल Value लगभग ₹29.88 लाख करोड़ रही.

उन्होंने कहा कि UPI ने खास तौर पर Street Vendors और Lower-Income Groups को Digital Financial System से जोड़ने में मदद की है.

सरकार ने MDR के समर्थन में क्या तर्क दिया?

Finance Ministry के मुताबिक नए Framework में कई Safeguards रखे गए हैं.

  • P2P UPI Transactions: किसी भी Amount पर Free.
  • ₹2,000 तक Merchant Payment: Free.
  • छोटे Merchants: UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करने वालों के लिए Zero MDR.
  • ₹2,000 से ज्यादा P2M Payment: 0.4% MDR.
  • ₹75,000 या उससे अधिक Transaction: MDR अधिकतम ₹300 प्रति Transaction तक सीमित.
  • Railways, Fuel, Telecom, Insurance जैसे Essential Sectors: ₹2,000 से ऊपर Transaction पर ₹5 Flat MDR.
  • Mutual Funds और Securities: 0.02% MDR, अधिकतम ₹300.

Customer से MDR लेने पर रोक

सरकार ने Banks को निर्देश दिया है कि Merchants MDR का खर्च Customers पर न डालें. इसके अलावा UPI Apps को Platform Fee या Hidden Charges लगाने की अनुमति नहीं है.

यानी सरकार का आधिकारिक पक्ष यह है कि MDR Merchant Payment Ecosystem का Charge है, Customer Fee नहीं.

लेकिन विपक्ष का सवाल यह है कि अगर Merchant को Digital Payment स्वीकार करने के लिए अतिरिक्त लागत उठानी पड़ेगी, तो क्या वह किसी दूसरे तरीके से यह लागत Customer तक नहीं पहुंचाएगा?

यही सवाल UPI MDR की पूरी बहस का केंद्र बन गया है.

असली विवाद क्या है?

एक तरफ सरकार कह रही है कि UPI Users पर कोई Charge नहीं लगेगा और करीब 96% Merchant Transactions भी प्रभावित नहीं होंगे. दूसरी तरफ विपक्ष MDR को आम लोगों और कारोबारियों पर संभावित अतिरिक्त बोझ बताते हुए इसका विरोध कर रहा है.

ये भी पढ़ें- UPI MDR Charge: 2,000 से ऊपर Payment पर 0.4% शुल्क, सरकार को मिलेंगे 15,000 करोड़?

सरकार ने फिलहाल 0.4% MDR के फैसले को वापस लेने से इनकार किया है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या Merchant इस लागत को खुद वहन करेंगे, या आने वाले समय में इसका कोई हिस्सा आखिरकार Customer तक पहुंचेगा?

Last Updated on September 17, 2026 8:53 am

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *