दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनराई विजयन, नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत कई राजनीतिक नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जानी थी.
सोनम वांगचुक ने क्या कहा?
वांगचुक ने शुक्रवार को ही स्पष्ट किया था कि वह दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पाएंगे. उन्होंने शायर फैज अहमद फैज की पंक्तियों का संदर्भ देते हुए लिखा था कि राजनीति और शासन के अलावा भी दुनिया में कई दुख हैं और जीवन में सुकून के दूसरे रास्ते भी हैं.
उन्होंने विभिन्न संगठनों के नेताओं से एकजुट रहने और परिपक्वता के साथ आंदोलन चलाने की अपील की. साथ ही, Gen Z यानी युवा प्रदर्शनकारियों से हर हाल में शांतिपूर्ण रहने का आग्रह किया.
वांगचुक ने लिखा कि उन्होंने जून में जंतर-मंतर पर महात्मा गांधी के अहिंसा के संदेश को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी. उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा प्रदर्शनकारी गांधी के सिद्धांतों को निराश नहीं करेंगे.
24 घंटे में रिहाई नहीं हुई तो फिर अनशन की चेतावनी
शनिवार को हिरासत की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देगा. लेकिन कई युवा नेताओं, सांसदों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें स्थिति अघोषित आपातकाल जैसी महसूस हो रही है.
एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि यदि हिरासत में लिए गए लोगों को 24 घंटे के भीतर रिहा नहीं किया गया, तो वह लेह या दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध का रास्ता अपना सकते हैं. इसमें अनशन, धरना या विरोध मार्च शामिल हो सकता है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इन मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझा लेगी और विरोध के अगले कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
जून में NEET-UG विवाद पर भी किया था अनशन
सोनम वांगचुक जून में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भी प्रमुख भूमिका में थे. उन्होंने NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए अनशन किया था.
उनके अनशन को छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं का समर्थन मिला, जिससे परीक्षा विवाद पर चल रहे आंदोलन को व्यापक ध्यान मिला.
रिपोर्ट के मुताबिक, अनशन के 21वें दिन, 18 जुलाई को, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए अधिकारियों ने वांगचुक को अस्पताल पहुंचाया था. इससे पहले 20 जुलाई को संसद तक मार्च करने की योजना थी.
लगातार विरोध और परीक्षा विवाद पर बढ़ते दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था.
अब आगे क्या?
दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और नेताओं की हिरासत को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है. जहां पुलिस ने सुरक्षा और अनुमति से जुड़े मुद्दे उठाए हैं, वहीं वांगचुक ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सवाल खड़े किए हैं.
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अब सवाल यह है कि क्या सरकार हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर बातचीत का रास्ता अपनाएगी, या सोनम वांगचुक को अपनी अनशन और विरोध मार्च की चेतावनी पर आगे बढ़ना पड़ेगा?
Last Updated on October 10, 2026 7:50 pm
