दिल्ली में Jean Drèze हिरासत में, पोस्टर लेकर खड़े लोगों पर पुलिस कार्रवाई क्यों?

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता Jean Drèze समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया. ड्रेज़ का आरोप है कि वह पोस्टर लेकर मीडिया से बात कर रहे थे, तभी पुलिस उन्हें बिना कारण बताए ले गई. कुछ अन्य लोगों ने दावा किया कि वे निजी काम से निकले थे और उनके फोन भी जब्त किए गए.

दिल्ली में प्रदर्शन से पहले सख्ती, Jean Drèze ने पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा?
दिल्ली में प्रदर्शन से पहले सख्ती, Jean Drèze ने पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा?
Jean Drèze Detained: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता जीन ड्रेज़ (Jean Drèze) को शनिवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया. उनके साथ कुछ शोधकर्ताओं, विद्वानों और कलाकारों को भी हिरासत में लिया गया. ये सभी जंतर-मंतर के पास पोस्टर लेकर खड़े थे और मीडिया से बात कर रहे थे.

झारखंड में रहने वाले जीन ड्रेज़ के अलावा फिल्मकार अबान रज़ा, शोधकर्ता और विद्वान परन अमिताभा तथा विद्वान-कलाकार अंजलि एस भी केरल हाउस के पास मौजूद थे. यह जगह जंतर-मंतर के नजदीक है.

ड्रेज़ ने आदर्श नगर पुलिस स्टेशन से फोन पर द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हम पोस्टर लेकर खड़े थे और मीडिया से बात कर रहे थे. तभी पुलिस बिना कुछ बताए हमें उठाकर ले गई.”

पोस्टर लेकर खड़े थे, फिर पुलिस ने हिरासत में क्यों लिया?

जीन ड्रेज़ के मुताबिक, उनका समूह सुबह ही प्रदर्शन स्थल के पास पहुंच गया था. लेकिन सड़कें बंद होने के कारण कई अन्य लोग वहां तक नहीं पहुंच सके.

उन्होंने कहा, “हमने सोचा कि हमें अपनी मौजूदगी दर्ज करानी चाहिए. हम पोस्टर लेकर खड़े थे, मीडिया से बात कर रहे थे और कुछ भी ऐसा नहीं कर रहे थे जिससे परेशानी हो. तभी पुलिस आई और हमें हिरासत में ले लिया.”

ड्रेज़ ने कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसी घटना का अनुभव नहीं किया था. उन्होंने प्रदर्शन से पहले की गई व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक, आवाजाही पर लगी पाबंदियों के कारण लोगों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने में परेशानी हुई.

ट्रेनों के रद्द होने से भी लोगों को हुई परेशानी

ड्रेज़ ने बताया कि वह दो दिन पहले झारखंड से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे और शुक्रवार सुबह राजधानी पहुंचे थे. उनके मुताबिक, इसके बाद ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और कई ट्रेनें रद्द कर दी गईं.

उन्होंने कहा कि रांची से देश के दूसरे हिस्सों को जोड़ने वाली कुछ ट्रेनों के रद्द होने से दिल्ली आने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

ड्रेज़ ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन से असंबंधित कामों के लिए दिल्ली आए कई लोगों को भी हिरासत में लिया गया.

उनके मुताबिक, ऐसे करीब 30 से 35 लोग हिरासत में थे. उन्होंने दावा किया कि इनमें कामगार वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के लोग शामिल थे और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया.

निजी काम से दिल्ली आए लोगों को भी हिरासत में लेने का आरोप

शाहिद हुसैन: खाना तलाशने निकले थे

बिहार के भागलपुर निवासी 30 वर्षीय शाहिद हुसैन ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वह निजी काम से दिल्ली आए थे और अगले दिन घर लौटने वाले थे.

उनके मुताबिक, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर जब वह खाना तलाश रहे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया.

शाहिद ने आरोप लगाया, “उन्होंने मेरा फोन ले लिया और मुझे बस में बैठा दिया. उन्होंने मेरा फोन भी तोड़ दिया.”

गुलफाम: बंगला साहिब गुरुद्वारे जा रहे थे

उत्तर प्रदेश के हापुड़ निवासी 24 वर्षीय गुलफाम ने बताया कि वह सेवा करने के लिए बंगला साहिब गुरुद्वारे जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोक लिया.

उनके मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने उन्हें दूसरा रास्ता अपनाने को कहा. प्रदर्शन स्थल के पास कुछ देर रुकने पर पुलिसकर्मियों ने उनसे पूछा कि वह कहां जा रहे हैं और रास्ता दिखाने की बात कही.

गुलफाम ने आरोप लगाया कि जब वह उनके साथ चलने को तैयार हुए, तो उन्हें एक बस में बैठा दिया गया.

सौरभ: रेलवे स्टेशन पहुंचने की कोशिश कर रहे थे

दिल्ली के करोल बाग निवासी 22 वर्षीय सौरभ ने बताया कि वह आरके आश्रम के पास एक दोस्त से मिलने के बाद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने की कोशिश कर रहे थे.

उनके मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका और बस में बैठने को कहा. उन्हें आश्वासन दिया गया कि कुछ सवालों के जवाब देने के बाद 15 से 20 मिनट में छोड़ दिया जाएगा.

सौरभ ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका फोन भी ले लिया.

उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं लग रहा था कि हिरासत में लिए गए लोग प्रदर्शन करने आए थे. कुछ खाना खाने जा रहे थे, तो कुछ सवारी तलाश रहे थे. वे अपने निजी काम से वहां मौजूद थे.”

JNU की शोधार्थी ने कहा – पोस्टर फाड़े, मीडिया से बात नहीं करने दी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की शोधार्थी परन अमिताभा ने बताया कि उनका समूह केरल हाउस के पास पोस्टर लेकर खड़ा था और कुछ मिनटों से मीडिया को बयान दे रहा था, तभी पुलिसकर्मी वहां पहुंच गए.

उन्होंने आरोप लगाया, “पुलिस ने हमें कुछ नहीं बताया. हमें धक्का देकर बस में बैठा दिया और हमारे पोस्टर फाड़ दिए. बस के अंदर भी मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं दी गई.”

अमिताभा के मुताबिक, पुलिस पहले उन्हें किसी दूसरे थाने ले गई और बाद में आदर्श नगर पुलिस स्टेशन पहुंचाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां मौजूद कई लोगों के फोन जब्त कर लिए गए थे.

बड़ा सवाल: प्रदर्शन स्थल तक पहुंचना इतना मुश्किल क्यों हुआ?

जीन ड्रेज़ और अन्य लोगों की हिरासत के मामले में एक ओर पुलिस की कार्रवाई है, तो दूसरी ओर हिरासत में लिए गए लोगों के आरोप. कुछ लोगों का कहना है कि वे प्रदर्शन में शामिल होने आए थे, जबकि अन्य ने दावा किया कि वे निजी काम से निकले थे.

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं दी गई है. ऐसे में हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान, उन्हें रोके जाने के कारण और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है.

ये भी पढ़ें- Delhi Protest: उमर अब्दुल्ला-महबूबा मुफ्ती बोले, क्या दिल्ली में लागू हुआ कश्मीर मॉडल?

सवाल यह है कि जब कुछ लोग प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पोस्टर लेकर खड़े थे और दूसरे अपने निजी काम से निकले थे, तो पुलिस ने उन्हें किस आधार पर हिरासत में लिया?

Last Updated on October 10, 2026 8:21 pm

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