US Green Card पर बड़ा झटका, Infosys-Wipro समेत 6 भारतीय IT कंपनियों पर कार्रवाई क्यों?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL और Capgemini समेत छह बड़ी IT कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की है. अमेरिकी सरकार ने कथित धोखाधड़ी और अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होने का हवाला दिया है. इस कदम से कुछ भारतीय पेशेवरों की Green Card प्रक्रिया में देरी हो सकती है.

अमेरिका में भारतीय IT कंपनियों पर सख्ती, Green Card के इंतजार में क्यों बढ़ेगी देरी?
अमेरिका में भारतीय IT कंपनियों पर सख्ती, Green Card के इंतजार में क्यों बढ़ेगी देरी?
US Green Card Update: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास यानी Green Card दिलाने में इस्तेमाल होने वाले एक अहम कार्यक्रम से कई बड़ी IT कंपनियों को निलंबित करने की घोषणा की है. इनमें Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL और Capgemini जैसी कंपनियां शामिल हैं. अमेरिकी प्रशासन ने कथित धोखाधड़ी और अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होने का आरोप लगाया है.

अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग के मुताबिक, इन कंपनियों को Permanent Labor Certification Program (PERM) से निलंबित किया जा रहा है. इस कार्रवाई से अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे भारतीय IT पेशेवरों और उन कर्मचारियों की Green Card प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिनके आवेदन अभी PERM चरण तक नहीं पहुंचे हैं.

यह कदम ट्रंप प्रशासन की विदेशी कर्मचारियों पर बढ़ती सख्ती का हिस्सा है. रिपोर्ट के मुताबिक, Microsoft और Adobe को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किया गया है. अमेरिकी अधिकारी H-1B वीजा और PERM कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग, वेतन कम रखने और अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखने के आरोपों की जांच तेज कर रहे हैं.

अमेरिकी सरकार भारतीय IT कंपनियों पर कार्रवाई क्यों कर रही है?

अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कहा कि सरकार विदेशी श्रम पर निर्भरता बढ़ाने वाली कथित धोखाधड़ी को खत्म करना चाहती है. उनका दावा है कि कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देकर अमेरिकी कामगारों के अवसरों को नुकसान पहुंचाया.

सॉन्डरलिंग ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन चाहता है कि अमेरिकी कंपनियां सबसे पहले अमेरिकी कर्मचारियों को रोजगार दें. उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी कर्मचारियों के कारण अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं.

अमेरिकी श्रम मंत्री के मुताबिक, 2009 से अब तक प्रभावित कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के स्थायी निवास के लिए अनुरोध किया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि इन कंपनियों को 2.30 लाख से अधिक H-1B वीजा की मंजूरी और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणपत्र मिले हैं.

हालांकि, ये आंकड़े अमेरिकी प्रशासन के दावे हैं. उपलब्ध रिपोर्ट में कंपनियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने वाले विस्तृत निष्कर्ष नहीं दिए गए हैं.

PERM क्या है और Green Card से इसका क्या संबंध है?

PERM (Program Electronic Review Management) अमेरिकी श्रम विभाग की वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए नियोक्ता आमतौर पर किसी विदेशी कर्मचारी को रोजगार के आधार पर Green Card दिलाने से पहले श्रम प्रमाणन प्राप्त करते हैं.

इस प्रक्रिया में कंपनी को संबंधित पद के लिए प्रचलित वेतन निर्धारित कराना और तय नियमों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी होती है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसरों, वेतन या कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर न पड़े.

श्रम विभाग से प्रमाणन मिलने के बाद नियोक्ता Green Card प्रक्रिया के अगले चरण में आगे बढ़ सकता है.

PERM आवेदन स्वीकार होने की तारीख आमतौर पर कर्मचारी की Priority Date भी बनती है. यह रोजगार आधारित Green Card के लिए कतार में उसकी स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण होती है.

भारत जैसे देशों के नागरिकों के लिए यह तारीख खास मायने रखती है, क्योंकि वहां से Green Card की मांग उपलब्ध संख्या से काफी अधिक है.

H-1B वीजा और PERM में क्या अंतर है?

  • H-1B Visa: यह विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है.

  • PERM: यह रोजगार के आधार पर स्थायी निवास यानी Green Card प्राप्त करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है.

इसलिए PERM पर रोक का मतलब यह नहीं है कि सभी H-1B वीजा अपने आप रद्द हो जाएंगे. इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिनकी नियोक्ता-प्रायोजित Green Card प्रक्रिया अभी इस चरण तक नहीं पहुंची है.

Cognizant, Infosys और दूसरी कंपनियों के कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?

जिन कर्मचारियों की Green Card प्रक्रिया अभी PERM आवेदन दाखिल करने के चरण तक नहीं पहुंची है, उन्हें देरी का सामना करना पड़ सकता है. निलंबन लागू रहने के दौरान नई PERM फाइलिंग नहीं हो पाने से वे अपनी Priority Date हासिल करने और स्थायी निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में असमर्थ हो सकते हैं.

भारतीय कर्मचारियों के लिए यह समस्या इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि अमेरिकी Green Card व्यवस्था में पहले से लंबा बैकलॉग है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग के सितंबर 2026 के Visa Bulletin में भारत के लिए रोजगार आधारित दूसरी प्राथमिकता श्रेणी EB-2 में अंतिम कार्रवाई के लिए वीजा उपलब्ध नहीं बताया गया था. वहीं, तीसरी प्राथमिकता श्रेणी EB-3 की अंतिम कार्रवाई की तारीख 1 जनवरी 2014 थी.

अमेरिका में रोजगार आधारित Green Card की संख्या पर प्रत्येक देश के लिए भी सीमाएं लागू होती हैं. इससे भारतीय आवेदकों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ सकता है.

H-1B वीजा की छह साल की सीमा पर भी असर संभव

H-1B वीजा आम तौर पर छह साल तक की अवधि के लिए होता है. कुछ परिस्थितियों में कर्मचारी इस अवधि के बाद भी वीजा बढ़वा सकते हैं, खासकर तब जब उनकी श्रम प्रमाणन या Green Card प्रक्रिया निर्धारित समय से पहले शुरू हुई हो.

यदि PERM प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाती, तो छह साल की सीमा के करीब पहुंच रहे कुछ कर्मचारियों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है.

हालांकि, जिन कर्मचारियों की याचिकाएं पहले ही मंजूर हो चुकी हैं और जो केवल Green Card उपलब्ध होने का इंतजार कर रहे हैं, उनकी स्थिति अलग हो सकती है. लागू नियमों के तहत कुछ कर्मचारी एक बार में तीन साल तक H-1B विस्तार के पात्र हो सकते हैं.

क्या सभी भारतीय कर्मचारियों की Green Card प्रक्रिया रुक जाएगी?

नहीं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई का सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जिनकी प्रक्रिया निलंबित कार्यक्रम के तहत नई PERM फाइलिंग पर निर्भर है. हर कर्मचारी की स्थिति उसके आवेदन के चरण और लागू नियमों पर निर्भर करेगी.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका ने पिछले महीने Cognizant को इस प्रक्रिया से निलंबित करने की घोषणा की थी. उस समय कंपनी के खिलाफ विशिष्ट आरोपों, प्रभावित आवेदनों की संख्या और निलंबन की अवधि का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया था.

आगे क्या होगा?

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े कथित दुरुपयोग पर कार्रवाई कर रहा है. लेकिन इस कदम से भारतीय IT कंपनियों के कर्मचारियों के रोजगार, Green Card की प्रतीक्षा और अमेरिका में लंबे समय तक काम करने की योजनाओं पर असर पड़ सकता है.

ये भी पढ़ें- अमेरिका में Nidal Hasan की फांसी का होगा Live Telecast, 60 साल बाद सैन्य फांसी की तैयारी

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिकी सरकार की यह कार्रवाई वास्तव में अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार की रक्षा करेगी, या इससे उन भारतीय पेशेवरों की स्थायी निवास प्रक्रिया और अधिक लंबी हो जाएगी जो वर्षों से Green Card का इंतजार कर रहे हैं?

Last Updated on October 9, 2026 10:13 am

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