समाचार एजेंसी Reuters के मुताबिक, अमेरिकी सेना में आखिरी बार फायरिंग स्क्वॉड के जरिए फांसी 1945 में दी गई थी. यदि यह सजा तय कार्यक्रम के अनुसार लागू होती है, तो यह 60 साल से अधिक समय में अमेरिकी सेना की पहली फांसी होगी. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने फायरिंग स्क्वॉड के जरिए सजा देने की सिफारिश की थी और पहले कहा था कि इसे सार्वजनिक किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं किया था कि इसे किस तरह दिखाया जाएगा.
हेगसेथ और पेंटागन ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी Associated Press (AP) के मुताबिक, हेगसेथ ने टीवी चैनल Real America’s Voice से कहा था कि फांसी की प्रक्रिया जनता के लिए खुली होगी.
The Guardian की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस मामले को वर्दी पहने एक कट्टरपंथी इस्लामवादी के हमले के रूप में पेश किया और कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि ऐसे अपराधों के गंभीर परिणाम होते हैं.
Reuters के मुताबिक, हेगसेथ ने फोर्ट हूड में गुरुवार को दोपहर 1 बजे का समय चुना. यह समय, दिन और स्थान 2009 में हुए हमले के समय और जगह के करीब हैं.
बाद में पेंटागन के एक अधिकारी ने Reuters से कहा, “रक्षा मंत्री सही कह रहे हैं. इसका लाइव प्रसारण किया जाएगा.” अधिकारी ने अपना नाम जाहिर नहीं किया और कहा कि इससे जुड़ी अतिरिक्त जानकारी बाद में दी जाएगी.
जब The Guardian ने हेगसेथ से पूछा कि क्या हसन ने अपनी अंतिम इच्छा या कोई विशेष अनुरोध किया है, तो उन्होंने जवाब दिया, “मुझे इसकी परवाह नहीं है. हम उसे 3 दिसंबर को देखेंगे.”
Reuters के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने यह नहीं बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लाइव प्रसारण का समर्थन करते हैं या नहीं. उसने इस संबंध में सवाल पेंटागन को भेज दिए.
निदाल हसन कौन है और उसने क्या किया था?
निदाल हसन अमेरिकी सेना में मेजर के पद पर तैनात मनोचिकित्सक था. 5 नवंबर 2009 को उसने फोर्ट हूड के एक मेडिकल भवन में गोलीबारी की थी. उस समय वहां सैनिक तैनाती से पहले टीकाकरण और मेडिकल जांच के लिए इंतजार कर रहे थे.
Associated Press के मुताबिक, इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 32 अन्य घायल हुए.
अगस्त 2013 में सैन्य जूरी ने हसन को हत्या और हत्या की कोशिश से जुड़े 45 मामलों में दोषी पाया और उसे मौत की सजा सुनाई गई.
हसन की उम्र 56 वर्ष है. गिरफ्तारी के दौरान पुलिस की गोली लगने के बाद से वह व्हीलचेयर का इस्तेमाल करता है.
जांचकर्ताओं को हसन और धर्मगुरु अनवर अल-अवलाकी (Anwar al-Awlaki) के बीच हुए 18 ईमेल मिले थे. अल-अवलाकी बाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था.
FBI के पूर्व निदेशक विलियम वेबस्टर की अगुवाई में हुई समीक्षा में कहा गया था कि FBI को इन ईमेल की ज्यादा गहराई से जांच करनी चाहिए थी.
मुकदमे के दौरान हसन ने कहा था कि उसने अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान जाकर साथी मुसलमानों को मारने से रोकने के लिए हमला किया. हालांकि, AP के मुताबिक, न्यायाधीश ने उसे इस दलील को अपने बचाव के आधार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी.
ओबामा के बयान को लेकर क्या विवाद है?
हेगसेथ ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस हमले को “कार्यस्थल पर हिंसा” (Workplace Violence) बताया था.
हालांकि, The Guardian के मुताबिक, ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है जिससे पुष्टि हो कि ओबामा ने वास्तव में इस वाक्यांश का इस्तेमाल किया था.
रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने शुरुआत में इस घटना को कार्यस्थल पर हुई हिंसा के रूप में वर्गीकृत किया था. इसका असर इस बात पर पड़ा कि पीड़ितों को Purple Heart और युद्ध से संबंधित दूसरे लाभ मिल सकते थे या नहीं.
फायरिंग स्क्वॉड से फांसी क्यों?
अमेरिकी सैन्य कानून के तहत किसी सैन्य कैदी को मृत्युदंड देने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होती है.
Reuters के मुताबिक, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सिफारिश पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फायरिंग स्क्वॉड के जरिए हसन को फांसी देने की मंजूरी दी. पेंटागन ने सोमवार को इस फैसले की सार्वजनिक जानकारी दी.
The Guardian के मुताबिक, हसन की अपील प्रक्रिया पिछले साल तक पूरी हो चुकी थी और वह कंसास स्थित फोर्ट लीवनवर्थ में कैद था.
हालांकि, 3 दिसंबर की तारीख तय होने के बावजूद फांसी में देरी संभव है. AP से बातचीत में सैन्य कानून के विशेषज्ञों ने कहा कि हसन अमेरिकी सिविलियन अदालत में Habeas Corpus Petition दाखिल कर सकता है. ऐसी याचिका के जरिए वह अपनी हिरासत या कानूनी प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दे सकता है और इससे फांसी लंबे समय तक टल सकती है.
येल विश्वविद्यालय के लेक्चरर और सैन्य कानून विशेषज्ञ यूजीन फिडेल ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया इतनी लंबी हो सकती है कि मौजूदा प्रशासन का कार्यकाल भी खत्म हो जाए.
अमेरिका में फांसी के तरीकों को लेकर बदलाव
Reuters के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने गंभीर संघीय अपराधों के मामलों में फांसी के लिए उपलब्ध तरीकों में फायरिंग स्क्वॉड, बिजली के झटके और जहरीली गैस को भी शामिल किया है.
इस बदलाव की एक वजह मृत्युदंड के लिए इस्तेमाल होने वाली घातक इंजेक्शन दवाओं की उपलब्धता में कठिनाई बताई गई है.
अमेरिका के पांच राज्यों – इडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलाइना और यूटा – में फायरिंग स्क्वॉड से मृत्युदंड देने की अनुमति है. साउथ कैरोलाइना ने पिछले साल इस तरीके से एक व्यक्ति को फांसी दी थी. अमेरिका में 15 साल बाद फायरिंग स्क्वॉड के जरिए दी गई वह पहली फांसी थी.
अमेरिकी सेना में आखिरी फांसी कब हुई थी?
अमेरिकी सैन्य फांसी की आखिरी तारीख को लेकर रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है.
Reuters के मुताबिक, मृत्युदंड विरोधी संगठन Death Penalty Action अंतिम सैन्य फांसी की तारीख 1961 बताता है. उस समय आर्मी प्राइवेट जॉन बेनेट को फांसी दी गई थी.
वहीं, Death Penalty Information Center के अनुसार, अमेरिकी सेना में फायरिंग स्क्वॉड के जरिए आखिरी ज्ञात फांसी 1945 में हुई थी.
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यदि निदाल हसन की फांसी तय कार्यक्रम के अनुसार होती है और उसका लाइव प्रसारण किया जाता है, तो यह अमेरिकी सैन्य इतिहास में एक असाधारण घटना होगी. इससे मृत्युदंड की प्रक्रिया, उसकी सार्वजनिकता और कानूनी-नैतिक सीमाओं को लेकर बहस भी तेज हो सकती है.
Last Updated on October 9, 2026 8:48 am
