France Student Protest: 24 Schools में आग, 6,100 गिरफ्तार, संकट क्यों गहराया?

France Student Protest ने मंगलवार को बड़ा रूप ले लिया, जब 2.5 लाख से ज्यादा छात्र, शिक्षक और अभिभावक सड़कों पर उतरे. Teacher Shortage, पुराने स्कूल भवन और खराब Study Conditions के खिलाफ आंदोलन में कई जगह Police Action हुआ. अब तक 6,100 से ज्यादा गिरफ्तारियों और सैकड़ों घायलों के बीच France की Education Crisis सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है.

France में छात्रों का बड़ा Protest, सरकार Education Crisis क्यों नहीं सुलझा पाई?
France में छात्रों का बड़ा Protest, सरकार Education Crisis क्यों नहीं सुलझा पाई?

France Student Protest: France में High School Education यानी स्कूली शिक्षा की स्थिति सुधारने की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन मंगलवार को अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शन में बदल गया. देशभर में 2.5 लाख से ज्यादा छात्र, शिक्षक और अभिभावक सड़कों पर उतरे. कई जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों और Riot Police के बीच झड़पें हुईं और पुलिस ने Tear Gas यानी आंसू गैस का इस्तेमाल किया.

French Prime Minister Sébastien Lecornu ने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद कम से कम 215 Teenagers और 85 School Staff घायल हुए हैं. उन्होंने इसे पिछले कई दशकों में French School System द्वारा झेली गई सबसे गंभीर स्थितियों में से एक बताया.

इसी बीच President Emmanuel Macron ने मंगलवार रात Élysée Palace में सरकार के प्रमुख मंत्रियों के साथ बैठक बुलाई.

मंगलवार को सड़कों पर उतरे 2.5 लाख से ज्यादा लोग

France के Interior Ministry के मुताबिक मंगलवार को देश के अलग-अलग शहरों में करीब 2 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया.

Paris में 56,000 लोगों के शामिल होने की बात कही गई.

Marseille, Nantes और Lyon जैसे शहरों में भी बड़े मार्च निकाले गए.

हालांकि प्रदर्शन के आयोजकों ने इससे कहीं ज्यादा संख्या बताई. उनके मुताबिक देशभर में करीब 4.5 लाख लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए.

ज्यादातर मार्च शांतिपूर्ण रहे, लेकिन Paris समेत कुछ जगहों पर प्रदर्शन के अंत में तोड़फोड़, आगजनी और Police के साथ छोटी-छोटी झड़पें हुईं.

Riot Police ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए Tear Gas और Baton Charge यानी लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया.

करीब 500 लोग गिरफ्तार, 43 पुलिसकर्मी भी घायल

French Interior Ministry के आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

वहीं पुलिस की ओर से भी नुकसान की बात सामने आई. Ministry ने बताया कि 43 Police Officers घायल हुए.

यह आंकड़ा उस आंदोलन की बढ़ती हिंसक स्थिति को दिखाता है, जो शुरुआत में मुख्य रूप से Education System को बेहतर बनाने की मांग को लेकर शुरू हुआ था.

Trade Unions और Rights Groups ने हाल के दिनों में Police पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.

Amnesty International ने French authorities से युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित “disproportionate police repression” यानी अनुपातहीन पुलिस कार्रवाई रोकने की अपील की.

लेकिन Interior Minister Laurent Nuñez ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया. उनका कहना था कि लगभग सभी मामलों में Police Response proportionate यानी परिस्थितियों के अनुरूप था.

उनके मुताबिक कुछ प्रदर्शन हिंसक दंगों में बदल गए थे और ऐसी स्थिति में Police Intervention जरूरी थी.

छात्र आखिर चाहते क्या हैं?

इस आंदोलन के पीछे छात्रों की मांगें काफी सीधी हैं.

वे चाहते हैं:

  • स्कूलों में पर्याप्त Teachers हों.
  • अनुपस्थित शिक्षकों की जगह समय पर Substitute Teachers मिलें.
  • पुराने और जर्जर School Buildings की मरम्मत हो.
  • बहुत लंबे School Hours की समीक्षा हो.
  • छात्रों को बेहतर Study Conditions मिलें.
  • स्कूलों के लिए पर्याप्त Budget उपलब्ध कराया जाए.

Paris के Place de la Nation पर प्रदर्शन कर रही एक छात्रा Anna ने कहा कि उनकी मांगें साधारण हैं – बेहतर पढ़ाई की परिस्थितियां, पर्याप्त शिक्षक और ठीक-ठाक स्कूल भवन.

उन्होंने कहा कि Authorities की प्रतिक्रिया बेहद खराब रही है और पहले से मौजूद हिंसा के बीच और हिंसा नहीं चाहिए.

‘हमारी किताबों के नीचे गुस्सा है’

Paris के प्रदर्शन में छात्रों के हाथों में कई तरह के Placards और Smoke Flares दिखाई दिए.

एक प्रमुख नारा था – “Under our textbooks, anger”, यानी “हमारी किताबों के नीचे गुस्सा है.”

यह नारा France के May 1968 Student Riots के प्रसिद्ध नारे “Under the paving stones, the beach” की तर्ज पर था.

एक अन्य नारा था –

“Schools with no money = country with no future”

यानी छात्रों का तर्क है कि अगर सरकार स्कूलों में पर्याप्त निवेश नहीं करेगी, तो इसका असर पूरे देश के भविष्य पर पड़ेगा.

आंदोलन सिर्फ छात्रों का नहीं, Teachers भी साथ आए

इस Protest में बड़ी संख्या में Teachers भी शामिल हुए.

Western France के Rennes शहर में Teacher Romain Dubourg ने कहा कि उन्होंने करीब 30 अन्य शिक्षकों के साथ हाल के Police Action पर चर्चा की और तय किया कि अगर छात्रों को उनकी जरूरत होगी तो वे उनके साथ खड़े रहेंगे.

Trade Unions ने भी आंदोलन को समर्थन दिया.

CGT Union की प्रमुख Sophie Binet ने अपने सदस्यों से High School Students की “protection” करने की अपील की.

Green Party की नेता Marine Tondelier ने स्थानीय अधिकारियों और Parents से White कपड़े पहनकर प्रदर्शनों के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए आगे आने की अपील की.

3,700 में से 900 High Schools प्रभावित

France के Education Ministry के मुताबिक मंगलवार को देश के करीब 3,700 High Schools में से 900 से ज्यादा Blockade या Closure से प्रभावित हुए.

हालांकि Student Groups ने यह संख्या 1,800 बताई.

कुछ स्थानीय Education Authorities ने Classes को Online कर दिया.

Marseille में प्रदर्शन कर रही 18 वर्षीय Océanne ने कहा कि छात्र सिर्फ अपनी Education को बचाना चाहते हैं और पढ़ाई करना चाहते हैं.

उसने बताया कि उसके स्कूल में कई बार Teachers अनुपस्थित रहे और उनकी जगह या तो ऐसे Substitute Teachers भेजे गए जिन्हें छात्र उपयोगी नहीं मानते थे, या फिर किसी की व्यवस्था ही नहीं की गई.

दो हफ्ते में आंदोलन पूरे France में फैल गया

यह Protest करीब दो हफ्ते पहले Paris के उत्तरी उपनगरों से शुरू हुआ था.

धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे France में फैल गया.

लेकिन आंदोलन के दौरान केवल प्रदर्शनकारी ही घायल नहीं हुए.

Prime Minister Lecornu के कार्यालय के मुताबिक अब तक 715 Police Officers भी clashes में घायल हो चुके हैं.

प्रदर्शनकारियों ने कई जगह स्कूलों के बाहर Dustbins में आग लगाई, Bus Shelters को नुकसान पहुंचाया और Riot Police पर वस्तुएं फेंकीं.

जवाब में Police ने Batons, Tear Gas और Riot-Control Rounds का इस्तेमाल किया.

24 स्कूलों में आगजनी या तोड़फोड़

French authorities के अनुसार सितंबर के मध्य से अब तक 24 Schools में आग लगाई गई या तोड़फोड़ की गई.

इस अवधि में 6,100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

Justice Ministry के मुताबिक इनमें से ज्यादातर गिरफ्तार लोग Minors यानी नाबालिग हैं.

करीब 1,800 लोगों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जिनमें लगभग 1,500 की उम्र 18 साल से कम है.

यानी आंदोलन अब केवल Education Policy का मामला नहीं रहा. इसके साथ Law and Order यानी कानून-व्यवस्था का सवाल भी जुड़ गया है.

Police Action में छात्रों के गंभीर घायल होने के आरोप

आंदोलन के दौरान कुछ छात्रों के गंभीर रूप से घायल होने के मामले सामने आए हैं.

सोमवार को Northern France में Riot Police के साथ झड़प के दौरान एक 15 वर्षीय छात्र का हाथ गंभीर रूप से घायल होकर अलग हो गया.

Tours में एक 16 वर्षीय छात्र की दाहिनी आंख की रोशनी चली गई. वह बुधवार को एक High School Blockade के दौरान सिर में गंभीर चोट लगने से घायल हुआ था.

स्थानीय Prosecutor Catherine Sorita-Minard ने कहा कि चोटें Blast Ball यानी Police के इस्तेमाल वाले एक Defensive Projectile के प्रभाव से मेल खाती हैं.

एक अन्य घटना में Paris के उत्तर-पश्चिम इलाके में सोमवार को प्रदर्शन के दौरान एक 14 वर्षीय छात्र के ज्यादातर दांत टूट गए.

उसकी मां ने बताया कि उसका जबड़ा बंद है, वह बोल नहीं पा रहा और उसे Straw से खाना दिया जा रहा है.

इन मामलों ने Police Use of Force यानी पुलिस बल के इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज कर दी है.

Amnesty ने उठाए Police की कार्रवाई पर सवाल

Amnesty France की President Anne Savinel-Barras ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में सामने आए Videos और लोगों की गवाही Tear Gas, Batons और Police Techniques के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं.

Interior Minister Nuñez ने बताया कि Protest शुरू होने के बाद Police Brutality के आरोपों पर 10 Internal Investigations शुरू की गई हैं.

यानी सरकार एक तरफ Police Action को ज्यादातर मामलों में उचित बता रही है, वहीं दूसरी तरफ कथित Excessive Force की शिकायतों की आंतरिक जांच भी चल रही है.

सरकार ने छात्रों की मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया

Prime Minister Sébastien Lecornu ने मंत्रियों को छात्रों की मुख्य मांगों पर काम करने का निर्देश दिया है.

इन मांगों में शामिल हैं:

Absent Teachers की जगह तुरंत शिक्षक उपलब्ध कराना.

सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाले School Day की अवधि की समीक्षा करना.

पुराने और जर्जर School Buildings की मरम्मत करना.

Lecornu ने Police पर नियमित रूप से Excessive Force इस्तेमाल करने के आरोपों को खारिज किया.

उन्होंने संसद में कहा कि “Extreme Violence” High School के दरवाजे तक पहुंच गई है और इसकी निंदा होनी चाहिए.

उनका तर्क था कि स्कूल में आग लगाने से उसकी मरम्मत नहीं होगी और शिक्षक पर हमला करने से Missing Staff की समस्या हल नहीं होगी.

Macron ने बुलाई अहम बैठक

बढ़ते आंदोलन के बीच France के President Emmanuel Macron ने मंगलवार रात Élysée Palace में सरकार के प्रमुख मंत्रियों को बातचीत के लिए बुलाया.

यह कदम बताता है कि सरकार अब इस आंदोलन को केवल Local Law-and-Order Issue के तौर पर नहीं देख रही.

Education System की समस्याएं, Police Action और देश की आर्थिक स्थिति – तीनों मुद्दे अब एक-दूसरे से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं.

चुनाव से पहले सरकार पर बढ़ा दबाव

इन प्रदर्शनों का समय भी महत्वपूर्ण है.

France में महत्वपूर्ण Presidential Elections होने में करीब सात महीने बचे हैं.

इन चुनावों में Emmanuel Macron के उत्तराधिकारी के लिए मुकाबला होगा.

वहीं सरकार पहले से ही बढ़ते Budget Deficit, France के भारी कर्ज और कमजोर Economic Growth को लेकर दबाव में है.

ऐसे समय में लाखों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों का सड़क पर उतरना सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चुनौती बन गया है.

सरकार ने Left Party पर लगाया आंदोलन भड़काने का आरोप

French Government ने Radical-Left पार्टी La France Insoumise यानी LFI पर आंदोलन को बढ़ावा देने और यहां तक कि उसे Organise करने का आरोप लगाया है.

LFI के कई MPs School Blockades में शामिल हुए हैं.

पार्टी के वरिष्ठ नेता और Presidential Candidate Jean-Luc Mélenchon ने आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है.

हालांकि उन्होंने Demonstrations में Non-Violence यानी अहिंसा का समर्थन करने की बात भी कही है.

यानी सरकार और विपक्ष के बीच इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक टकराव भी बढ़ता जा रहा है.

आखिर France के स्कूलों में इतना गुस्सा क्यों?

France का यह आंदोलन केवल Students और Police के बीच टकराव की कहानी नहीं है.

इसके पीछे Teacher Shortage, पुराने School Buildings, लंबे School Hours, कम संसाधन और Education Budget को लेकर लंबे समय से मौजूद शिकायतें हैं.

लेकिन जब इन मांगों के साथ Police Action, घायल छात्रों और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का मुद्दा जुड़ गया, तो आंदोलन का स्वरूप कहीं ज्यादा गंभीर हो गया.

अब सरकार के सामने दो चुनौती हैं – एक तरफ छात्रों और शिक्षकों की Education-related demands का समाधान करना और दूसरी तरफ Protest के दौरान बढ़ती हिंसा को रोकना.

ये भी पढ़ें- Pakistan-Afghanistan Tension: अफगानिस्तान को साधने की नीति अब पाकिस्तान पर भारी क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या France सरकार स्कूलों की मूल समस्याओं को हल करके इस आंदोलन को शांत कर पाएगी, या Police Action और राजनीतिक टकराव के बीच यह संकट और गहराएगा?

Last Updated on October 7, 2026 9:37 am

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