संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लगाई जाने वाली पाबंदियां जरूरत और आनुपातिकता (Necessity and Proportionality) के सख्त मानकों पर खरी उतरनी चाहिए. मानवाधिकार कार्यालय ने यह भी कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय अधिकतम संयम बरतना चाहिए.
UN ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भारतीय अधिकारियों से अपील की कि शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के लोगों के अधिकार का पूरी तरह सम्मान किया जाए और उसे सुनिश्चित किया जाए.
बयान में कहा गया कि मनमाने तरीके से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तत्काल और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों की ओर से उठाई गई व्यापक चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक बातचीत करने का भी आग्रह किया.
संयुक्त राष्ट्र ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और मानवाधिकार संबंधी दायित्वों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान संयम बरतना चाहिए.
दिल्ली में 6,000 लोगों को हिरासत में लेने का दावा
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान शनिवार को सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रही. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शाम 7 बजे तक राजधानी में करीब 6,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था. रिपोर्ट में कहा गया कि किसी भी प्रदर्शनकारी को जंतर-मंतर तक पहुंचने नहीं दिया गया.
अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनराई विजयन, नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया.
दिल्ली में करीब 25,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए थे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शनिवार से पहले की रात कम से कम 1,200 लोगों को हिरासत में लिया गया था.
#India: We are concerned by reports of mass detentions of demonstrators, protest leaders, members of civil society organisations, lawyers and journalists, before and during today’s large-scale demonstrations in Delhi. We call on the authorities to ensure that the right to peaceful assembly is fully respected and fulfilled. https://t.co/tqrQyZoXBJ
— UN Human Rights (@UNHumanRights) October 10, 2026
CJP का ऐलान – रविवार को फिर जंतर-मंतर मार्च
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने रविवार को दोबारा जंतर-मंतर तक मार्च निकालने और अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है.
पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “हम पीछे नहीं हट रहे हैं. हम कल फिर जंतर-मंतर तक मार्च करेंगे और अपनी सभी मांगें पूरी होने तक वहीं रहेंगे.”
CJP के नेता अजिंक्य शिंदे ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते.
पार्टी ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान मतदाता सूची में हेरफेर हुआ है. दिल्ली पुलिस ने पहले सुरक्षा संबंधी चिंताओं और पर्याप्त पूर्व सूचना नहीं मिलने का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
सोनम वांगचुक ने भी दी थी अनशन की चेतावनी
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो वह अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार कर सकते हैं.
इस बीच, नेहा बोरा और कुछ अन्य लोगों को शाम को मैदानगढ़ी पुलिस स्टेशन से रिहा कर दिया गया.
CJP नेता अभिजीत दीप्ते, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली में विमान उतरने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई. पुलिस के मुताबिक, दीप्ते को उनकी दादी की मृत्यु की सूचना दी गई और घर जाने के लिए मदद की पेशकश की गई.
यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी पुलिस सूत्रों के मुताबिक गुरुग्राम के सेक्टर 56 स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया.
मुंबई में भी कार्रवाई, तुषार गांधी हिरासत में
दिल्ली के अलावा मुंबई में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान को बंद कर दिया और CJP के समर्थन में जुटे सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया. इनमें महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी भी शामिल थे.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि राजधानी को “बंधक नहीं बनने दिया जाएगा”. उन्होंने CJP को कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की “बी-टीम” भी बताया.
अब आगे क्या?
संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया के बाद दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं. एक तरफ CJP ने रविवार को फिर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है, वहीं संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और प्रदर्शनकारियों की चिंताओं पर बातचीत करने की अपील की है.
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अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन प्रदर्शनकारियों की मांगों पर संवाद करेगा और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को सुनिश्चित करेगा, या दिल्ली में प्रदर्शन पर पाबंदियां आगे भी जारी रहेंगी?
Last Updated on October 10, 2026 9:34 pm
