नई दिल्ली: दिवालिया हो चुके जयपी ग्रुप (Jaypee Associates) की संपत्तियों को लेकर कॉरपोरेट जगत की बड़ी टक्कर अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। वेदांता ने अदानी ग्रुप के रेज़ोल्यूशन प्लान पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) पहले ही इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर चुका है।
सूत्रों के मुताबिक, वेदांता सुप्रीम कोर्ट में यह दलील देने की तैयारी में है कि उसका प्रस्ताव अदानी ग्रुप से अधिक मूल्यवान था, लेकिन इसके बावजूद कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने गलत निर्णय लेते हुए उसे खारिज कर दिया। इस मामले की सुनवाई आने वाले कुछ हफ्तों में होने की संभावना है।
विवाद की जड़ क्या है?
जयपी ग्रुप, जो करीब 57,000 करोड़ रुपये के कर्ज में डिफॉल्ट कर चुका है, उसकी संपत्तियों के लिए बोली प्रक्रिया इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत चलाई गई। इस प्रक्रिया में अदानी ग्रुप और वेदांता दोनों प्रमुख दावेदार बनकर सामने आए।
हालांकि, करीब 90% लेनदारों ने अदानी ग्रुप के पक्ष में वोट किया, जिसके चलते उसका प्लान मंजूर हो गया।
किसका ऑफर कितना?
- अदानी ग्रुप:
कुल प्रस्ताव – 14,535 करोड़ रुपये
अग्रिम भुगतान – 6,000 करोड़ रुपये
बाकी रकम – 2-3 साल में - वेदांता (प्रारंभिक बोली):
कुल प्रस्ताव – 17,000 करोड़ रुपये
अग्रिम भुगतान – 4,000 करोड़ रुपये
बाकी रकम – 6 साल में
लेनदारों का मानना था कि अदानी का प्रस्ताव बेहतर है क्योंकि उसमें अग्रिम भुगतान ज्यादा है और बाकी रकम भी जल्दी मिल जाती है।
वेदांता ने बदली बोली, फिर भी झटका
नवंबर में वेदांता ने अपनी बोली संशोधित करते हुए इसे और प्रतिस्पर्धी बनाया। नई बोली के तहत:
- कुल राशि – 16,726 करोड़ रुपये
- अग्रिम भुगतान – 6,563 करोड़ रुपये
- बाकी रकम – 5 साल में
इसके बावजूद लेनदारों ने अदानी ग्रुप के प्रस्ताव को ही मंजूरी दी।
कानूनी लड़ाई का सफर
वेदांता ने इस फैसले को पहले NCLT, इलाहाबाद में चुनौती दी, जहां से उसकी याचिका 17 मार्च को खारिज कर दी गई। इसके बाद कंपनी NCLAT पहुंची, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है।
अनिल अग्रवाल का दावा
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि कंपनी को पहले सफल बोलीदाता घोषित कर दिया गया था, लेकिन बाद में फैसला बदल दिया गया। उन्होंने इसे “पारदर्शी प्रक्रिया के बाद अचानक बदलाव” बताया। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा-
“आज सुबह मैं Bhagavad Gita का अध्याय 15 पढ़ रहा था। एक विचार मेरे साथ रह गया। “साहस रखो। विनम्र रहो। बिना आसक्ति के अपना कर्तव्य करो।” जीवन ने इसकी परीक्षा ली।
कुछ साल पहले, श्री जयप्रकाश गौर, जिन्होंने जयपी ग्रुप बनाया, मुझसे लंदन में मिलने आए थे। उन्होंने अपने जीवनभर की मेहनत और दृष्टि से एक साम्राज्य खड़ा किया था। उन्होंने एक से अधिक बार मुझसे संपर्क किया। उन्होंने मुझे लिखा। उनकी केवल एक साधारण इच्छा थी कि जो उन्होंने बनाया है वह सुरक्षित हाथों में जाए और सही नीयत के साथ आगे बढ़े। उन्होंने मुझे हिंदी में, अपने शब्दों में पत्र भी लिखे, जिसमें उन्होंने अपना विश्वास व्यक्त किया। उस समय, हम आगे नहीं बढ़ सके।
हाल ही में, इस संपत्ति को IBC प्रक्रिया में CoC द्वारा सार्वजनिक नीलामी में डाला गया। कई मजबूत बोलीदाता इसमें शामिल हुए। अचानक, जयप्रकाश गौर जी की भावनाएं और इच्छाएं मुझे याद आने लगीं। एक-एक करके, सभी लोग बोली से बाहर हो गए। अंत में, हमें सार्वजनिक रूप से सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया।
यह एक पारदर्शी प्रक्रिया थी। हमें लिखित में सूचित किया गया कि हम जीत गए हैं। लेकिन जीवन कभी इतना सरल नहीं होता। कुछ दिनों बाद, निर्णय बदल दिया गया। मैं विवरण में नहीं जाना चाहता। वह सही मंच के लिए है। लेकिन मैं दिल से कुछ साझा करना चाहता हूं।
हमें इस संपत्ति से कोई लगाव नहीं है। अगर यह मिलती है, तो यह भगवान की कृपा है। अगर यह चली जाती है, तो वह भी उनकी इच्छा है। लेकिन एक बात पर हम दृढ़ता से विश्वास करते हैं। जब धर्म में कुछ वादा किया जाता है, तो उसे वापस नहीं लिया जाना चाहिए। हमारे शास्त्रों में भी, हम इसे बार-बार देखते हैं। सत्य, प्रतिबद्धता और निष्पक्षता सबसे ऊपर हैं।
तो, किसी को क्या करना चाहिए? गीता एक सरल उत्तर देती है—अपना कर्तव्य करो, साहस के साथ, लेकिन बिना क्रोध या आसक्ति के। यही हम करेंगे। हम तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत करेंगे। हम सही मार्ग का पालन करेंगे।
बाकी, मैं भगवान पर छोड़ता हूं।”
This morning, I was reading Chapter 15 of the Bhagavad Gita. One thought stayed with me. “Have courage. Stay humble. Do your duty without attachment.” Life tested this.
Some years ago, Shri Jaiprakash Gaur, who built Jaypee Group, came to meet me in London. He had built an… pic.twitter.com/aEPQet0WQH
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) March 29, 2026
बड़ा सवाल क्या है?
इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल यही है—
क्या ज्यादा कुल वैल्यू वाला प्रस्ताव बेहतर होता है या ज्यादा अग्रिम भुगतान वाला?
IBC कानून के तहत CoC की “कमर्शियल विजडम” को सर्वोपरि माना जाता है, यानी अंतिम फैसला लेनदारों का ही होता है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
Last Updated on March 31, 2026 2:44 pm
