Manipur Relief Camps: मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा के बाद विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए Relief Camps में हुई अप्राकृतिक मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान Chief Justice of India Surya Kant की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय Bench ने राज्य के Chief Secretary से मौतों पर Comprehensive Report मांगी और Camps में रह रहे लोगों की Safety और Dignity सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
Bench में Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana भी शामिल थे. कोर्ट मणिपुर हिंसा के बाद राहत और पुनर्वास से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.
25 IDPs की अप्राकृतिक मौत का जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें राज्य के अलग-अलग Relief Camps में रहने वाले 25 Internally Displaced Persons यानी IDPs की Unnatural Deaths की जानकारी का उल्लेख था.
इनमें एक मामले में Sexual Assault के बाद पीड़ित की मौत की बात भी सामने आई. इस जानकारी पर CJI Surya Kant ने गंभीर चिंता जताई.
कोर्ट ने कहा कि राहत और पुनर्वास की निगरानी कर रही Committee ने राज्य सरकार से इन मौतों की जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक उसे पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई.
Committee ने सबसे पहले 11 जून को Chief Secretary से Relief Camps में हुई मौतों का विवरण मांगा था. राज्य की ओर से कुछ जानकारी दी गई, लेकिन उसमें जरूरी Details नहीं थीं. इसके बाद Committee ने 4 जुलाई को दोबारा जानकारी मांगी.
CJI ने राज्य सरकार से सवाल किया कि 4 जुलाई को जानकारी मांगे जाने के बावजूद अब तक पूरी Information क्यों नहीं दी गई.
640 मौतों में 34 को बताया गया Unnatural
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि एक Nodal Officer ने Committee को जानकारी दी थी कि राज्य के 8 जिलों के Relief Camps में कुल 640 मौतें हुई हैं.
इनमें से 34 मौतों को Unnatural Deaths बताया गया.
लेकिन इन 34 मामलों में सिर्फ 20 Post-Mortems किए गए. वहीं 25 मौतों के संबंध में Criminal Cases दर्ज किए गए हैं और 4 मामलों में Prosecution शुरू हो चुका है.
इसी आंकड़े को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा.
34 मामलों में सिर्फ 20 Post-Mortem क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने Chief Secretary से पूछा कि जब 34 मौतों को अप्राकृतिक बताया गया है, तो सभी मामलों में Post-Mortem क्यों नहीं कराया गया.
Court ने यह भी कहा कि जिन 20 मामलों में Post-Mortem हुआ, उनकी Reports के आधार पर इन Unnatural Deaths के कारणों की जानकारी भी दी जाए.
यानी Court यह जानना चाहता है कि इन मौतों की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और उनकी जांच किस स्तर तक पहुंची है.
₹20,000-₹30,000 Compensation पर भी सवाल
मौतों की जांच के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने मृतकों के परिवारों को दिए गए Compensation को लेकर भी सवाल उठाया.
Court ने कहा कि कुछ मामलों में Relief Camps में रहने के दौरान अप्राकृतिक मौत का शिकार हुए IDPs के परिजनों को सिर्फ ₹20,000 से ₹30,000 का भुगतान किया गया.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के Chief Secretary से इसका कारण बताने को कहा.
Court ने Compensation के भुगतान में Inequality का भी उल्लेख किया और पूछा कि अप्राकृतिक मौतों के मामलों में मृतकों के परिजनों को इतनी कम राशि क्यों दी गई.
Gita Mittal Committee कर रही है राहत और पुनर्वास की निगरानी
मणिपुर हिंसा के बाद Relief और Rehabilitation की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही पूर्व जम्मू-कश्मीर Chief Justice Gita Mittal की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय Committee बनाई थी.
यह Committee समय-समय पर अपनी Reports सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करती है और राज्य में विस्थापित लोगों की स्थिति, राहत और पुनर्वास से जुड़ी जानकारी Court को देती है.
इसी Committee की Report पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने Relief Camps में हुई मौतों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा.
अब सरकार को किन सवालों का जवाब देना है?
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद राज्य सरकार के सामने मुख्य रूप से कई सवाल हैं.
640 मौतों में 34 को Unnatural क्यों बताया गया?
34 Unnatural Deaths में सिर्फ 20 Post-Mortems क्यों हुए?
25 मामलों में Criminal Cases दर्ज होने के बावजूद सिर्फ 4 में Prosecution शुरू क्यों हुआ?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल- Relief Camps में अप्राकृतिक मौतों का शिकार हुए IDPs के परिवारों को सिर्फ ₹20,000 से ₹30,000 Compensation क्यों दिया गया?
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सुप्रीम कोर्ट ने Chief Secretary से इन सभी मुद्दों पर विस्तृत जवाब मांगा है. साथ ही Court ने Relief Camps में रहने वाले विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है.
मणिपुर हिंसा के बाद हजारों लोग लंबे समय तक विस्थापन और राहत शिविरों की स्थिति से जूझते रहे हैं. अब सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन शिविरों में हुई मौतों की पूरी सच्चाई कब सामने आएगी और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ेगी?
Last Updated on September 18, 2026 9:11 am
