Sikh गुरु विवाद: Kapil Mishra ने शेयर किया एडिटेड वीडियो? फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा

– खुशदीप सहगल

Sikh गुरु विवाद: दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी (Atishi) से जुड़ा एक वीडियो एक बार फिर सियासी तूफ़ान का कारण बन गया है। पंजाब के जालंधर कोर्ट ने दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो को फॉरेंसिक जांच में डॉक्टर्ड पाया है। कोर्ट ने मेटा, एक्स (ट्विटर) और टेलीग्राम को 24 घंटे के भीतर यह क्लिप हटाने का सख़्त आदेश दिया है।

जालंधर कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर साफ़ कहा कि वीडियो के ऑडियो के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की गई थी। इस क्लिप में आतिशी को कथित तौर पर नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाया गया था।

जालंधर साइबर क्राइम पुलिस की ओर से दाख़िल आवेदन पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माना कि इस वीडियो का प्रसार पंजाब में सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक सौहार्द के लिए गंभीर ख़तरा बन सकता था। कोर्ट ने राज्य साइबर क्राइम विभाग से 10 दिनों के भीतर कंप्लायंस रिपोर्ट भी मांगी है।

यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय आप नेता इकबाल सिंह बग्गा की शिकायत के बाद 7 जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राजनीतिक माहौल को भड़काने के मक़सद से वीडियो को जानबूझकर एडिट कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया। इस पूरे विवाद पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई थी।

कपिल मिश्रा का राजनीतिक ट्रैक रिकॉर्ड पहले भी विवादों से भरा रहा है। कभी अरविंद केजरीवाल सरकार में जल संसाधन मंत्री रहे मिश्रा, उस दौर में बीजेपी नेतृत्व पर तीखे आरोप लगाते नज़र आए। बाद में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच उन्हें मंत्री पद से हटाया गया, जिसके बाद उन्होंने केजरीवाल को अपना “राजनीतिक दुश्मन नंबर वन” बताया और बीजेपी जॉइन कर ली।

जनवरी 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले उनका “भारत-पाकिस्तान मुकाबले” वाला ट्वीट हो या CAA विरोध के दौरान दी गई भड़काऊ चेतावनियां—कपिल मिश्रा कई बार चुनाव आयोग, पुलिस और अदालतों के रडार पर आ चुके हैं। दिल्ली हिंसा के दौरान उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठे और दिल्ली हाईकोर्ट को पुलिस से “सचेत निर्णय” लेने तक की टिप्पणी करनी पड़ी थी।

अब जालंधर कोर्ट का यह ताज़ा आदेश एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं से खेलना और डॉक्टर्ड कंटेंट फैलाना महज़ एक संयोग है, या फिर यह उसी सियासत का हिस्सा है जो सत्ता के हिसाब से रंग बदलती है?
कभी केजरीवाल सरकार में मंत्री, कभी बीजेपी में कट्टर हिंदुत्व का चेहरा—कपिल मिश्रा का यह सफ़र एक बार फिर बहस के केंद्र में है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजतक में लंबे समय से जुड़े रहे हैं. उनके फेसबुक पेज से लिया लेख.

Last Updated on January 16, 2026 1:41 pm

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