‘Four Stars of Destiny’ विवाद पर Naravane का जवाब, कहा—अब ये बंद अध्याय

नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे (Naravane book controversy) ने अपने अप्रकाशित संस्मरण “Four Stars of Destiny” को लेकर हुए विवाद पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया गया और उन्हें अनावश्यक रूप से सुर्खियों में लाया गया।

एक इंटरव्यू में नरवणे ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने प्रकाशक को किताब को जांच पूरी होने तक रोकने के लिए कहा था। उनके मुताबिक, “जहां तक मेरा सवाल है, मामला वहीं खत्म हो गया था और मैं आगे बढ़ चुका हूं। यह अब एक बंद अध्याय है।”

उन्होंने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि बिना जरूरत उनके बयान को बार-बार उद्धृत किया गया और अप्रकाशित किताब को चर्चा में लाकर उन्हें भी केंद्र में ला दिया गया। नरवणे के शब्दों में, “मुझे लगता है कि यह उचित नहीं था।”

इस विवाद के बीच भी नरवणे ने अपनी लेखन यात्रा जारी रखी। हाल ही में उनकी नई किताब “The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries” रिलीज़ हुई है। उन्होंने बताया कि वह अब तक दो किताबें लिख चुके हैं और तीसरी किताब भी जल्द ही आने वाली है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयान न सिर्फ उस विवाद को शांत करने की कोशिश है, बल्कि यह भी दिखाता है कि नरवणे अब अपने लेखन और विचारों के जरिए सार्वजनिक विमर्श में अलग भूमिका निभाना चाहते हैं।

निष्कर्ष:
पूर्व सेना प्रमुख का यह बयान साफ संकेत देता है कि वह पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन सवाल अब भी कायम है—क्या अप्रकाशित किताब को लेकर उठे विवाद वाकई “अनावश्यक” थे या फिर उसके पीछे कोई बड़ी कहानी छिपी है?

Last Updated on April 25, 2026 4:33 pm

Related Posts