Odisha skeleton case: ₹20,000 निकालने के लिए कंकाल लेकर पहुंचा भाई, जांच शुरू

भुवनेश्वर/केओंझार: (Odisha skeleton case) ओडिशा के केओंझार में सामने आए दिल दहला देने वाले मामले में शुरुआती जांच ने गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक प्रक्रिया के दौरान स्टाफ की ओर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला और प्रक्रियात्मक लापरवाही इस घटना की बड़ी वजह बन सकती है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि नियमों की जटिलता, सहायता की कमी और संवादहीनता ने स्थिति को इस हद तक पहुंचा दिया कि एक व्यक्ति को अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक जाना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला तब सामने आया जब 50 वर्षीय जीतू मुंडा अपनी मृत बहन के कंकाल के साथ ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा पहुंचा। उसका उद्देश्य था अपनी बहन की मौत का सबूत देना, ताकि वह उसके खाते से ₹20,000 निकाल सके। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया।

सरकार ने दिए जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तुरंत जांच के आदेश दिए। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, नॉर्दर्न डिवीजन के रेवेन्यू डिविजनल कमिश्नर के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई, जिसने बैंक शाखा का दौरा किया।

CCTV फुटेज और जांच में क्या मिला?

जांच टीम ने बैंक की सीसीटीवी फुटेज खंगाली और स्टाफ से पूछताछ की। फुटेज में यह पुष्टि हुई कि जीतू मुंडा बैंक में मौजूद था और उसने वहां 30 मिनट से ज्यादा समय बिताया। वह दो बार बैंक मैनेजर से भी मिला, लेकिन अंत में परेशान होकर लौट गया।

हालांकि, सीसीटीवी में ऑडियो नहीं होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका कि बैंक स्टाफ और मुंडा के बीच किस तरह की बातचीत हुई।

गांव जाकर दर्ज किया गया बयान

जांच टीम मुंडा के गांव डायनाली भी पहुंची, जहां उसका बयान दर्ज किया गया। अधिकारियों को यह भी पता चला कि मुंडा और उसकी बहन पहले भी कई बार बैंक में लेन-देन के लिए जा चुके थे।

शुरुआती निष्कर्ष: कहां हुई चूक?

जांच के शुरुआती निष्कर्षों में सामने आया है कि:

  • बैंक प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी थी
  • ग्राहक को पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं दिया गया
  • दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर भ्रम बना रहा

अधिकारियों ने साफ कहा है कि अगर किसी की जिम्मेदारी तय होती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैंक का क्या कहना है?

स्पॉन्सर बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक ने पहले ही बयान जारी कर कहा था कि यह मामला क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया की जानकारी की कमी और दस्तावेजों को लेकर गलतफहमी से जुड़ा हो सकता है।

राजनीतिक गर्मी भी तेज

इस घटना के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। ओडिशा कांग्रेस और विपक्षी बीजू जनता दल (बीजेडी) के नेताओं ने मुंडा के गांव का दौरा किया और:

  • पीड़ित को मुआवजा देने
  • मामले की गहन जांच कराने

की मांग की है।

सरकार की मदद और आगे की स्थिति

राज्य सरकार ने फिलहाल जीतू मुंडा को आर्थिक सहायता प्रदान की है। साथ ही उसे उसकी दिवंगत बहन के खाते से राशि भी मिल चुकी है।

बड़ा सवाल

यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि सिस्टम की उन खामियों को उजागर करती है जहां एक आम आदमी को अपनी बात साबित करने के लिए असाधारण और दर्दनाक कदम उठाने पड़ते हैं। सवाल यही है—क्या ऐसी घटनाएं भविष्य में रोकी जा सकेंगी?

Last Updated on May 1, 2026 11:11 am

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