दिल्ली की राजनीति का माहौल इन दिनों गर्म है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने चुनाव आयोग (Election Comission) और बीजेपी (BJP) पर सीधे-सीधे “वोट चोरी” का आरोप जड़ा है। उन्होंने दावा किया कि फेक लॉग-इन के जरिये मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से डिलीट किए जा रहे हैं, और इस साज़िश में दलित, आदिवासी और महिलाओं को खासतौर पर टारगेट किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा—
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“मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार वोट चोरों की रक्षा कर रहे हैं।”
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कांग्रेस वोटरों के नाम सुनियोजित ढंग से हटाए गए।
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यह कोई साधारण आरोप नहीं, बल्कि “हाइड्रोजन बम” है।
उन्होंने कर्नाटक की आलंद सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां वोटरों के नाम हटाए गए और बूथ-स्तरीय अधिकारी की शिकायत पर पूरी साज़िश सामने आई।
🔹 पिछली कड़ियां
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बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान राहुल ने चेताया था कि एटम बम से बड़ा “हाइड्रोजन बम” फटेगा।
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उन्होंने कहा था, “वोट चोरी के सुबूत जनता के सामने रखेंगे, और यह बीजेपी के लिए मुंहतोड़ जवाब होगा।”
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राहुल का दावा है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में भी लाखों फर्जी वोट जोड़े गए और कांग्रेस को चुनाव हरवाया गया।
🔹 चुनाव आयोग का जवाब
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“किसी आम नागरिक के वोट को ऑनलाइन डिलीट नहीं किया जा सकता।”
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2023 में आलंद सीट पर वोट डिलीट करने की कोशिश जरूर हुई थी, पर चुनाव आयोग ने खुद FIR दर्ज कर जांच करवाई।
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किसी का वोट काटने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुना जाता है।
🔹 बीजेपी का पलटवार
बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा—
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“राहुल गांधी को संविधान समझ में नहीं आता। आरोप बेबुनियाद हैं। उनके सारे ‘बम’ निष्क्रिय हो जाएंगे।”
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उन्होंने राहुल पर “मतदाताओं का अपमान करने” का आरोप लगाया।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी कहा कि राहुल बिना सबूत “ड्रामा” करते हैं और चुनाव आयोग पर बेवजह सवाल खड़े करते हैं।
🔹 मामले की गूंज
यह विवाद सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं।
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कांग्रेस कह रही है कि “लोकतंत्र के सबसे बड़े स्तंभ, चुनाव आयोग, को हाईजैक कर लिया गया है।”
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जबकि चुनाव आयोग और बीजेपी बार-बार इन आरोपों को “फर्जी और निराधार” बताते हैं।
इस पूरे प्रकरण ने चुनावी राजनीति में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
👉 अगर राहुल गांधी के आरोप सच हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को हिला देने वाली साजिश होगी।
👉 और अगर ये आरोप झूठे हैं, तो क्या विपक्ष जनता के भरोसे के साथ खेल रहा है?
यह लड़ाई अब केवल वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की साख और भारतीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर भी है।
Last Updated on September 18, 2025 6:54 pm
