अमेरिकी दूतावास पर कब्ज़ा, 444 दिन की कैद: क्या चुनावी साज़िश थी Iran Hostage Crisis?

– नितिन ठाकुर

Iran Hostage Crisis Explained: 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हो रही थी। अयातुल्लाह खुमैनी की अगुवाई में शाह मोहम्मद रजा पहलवी को उखाड़ फेंका गया। शाह ने परिवार के साथ ये कह कर ईरान छोड़ दिया कि वो छुट्टी मनाने जा रहे हैं। पहले वो इजिप्ट गए, फिर मोरक्को, बहामास, मैक्सिको। इसके बाद पता चला कि उनको कैंसर है। आखिर वो कैंसर के इलाज के लिए न्यूयॉर्क आए। इसी वजह से ईरान में गुस्सा भड़क गया, और 4 नवंबर 1979 को अमेरिकी दूतावास पर हमला हो गया। ईरान के गुस्साए छात्रों ने एंबेसी को घेर लिया। हज़ारों लोग किसी तरह अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। आखिर उन्होंने 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया (बाद में 14 रिहा हुए, लेकिन 52 फंसे रहे)। ये बंधक 444 दिनों तक कैद रहे!

दुनिया भर में खबर छाई रही। जिमी कार्टर, जो डेमोक्रेट प्रेसिडेंट थे, उनके लिए ये सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया। उन्होंने डिप्लोमैसी की कोशिश की, आर्थिक प्रतिबंध लगाए, लेकिन खुमैनी सरकार टस से मस नहीं हुई। तर्क? ईरान अमेरिका को “ग्रेट शैतान” मानता था, और ये क्राइसिस उनकी क्रांति की ताकत दिखाने का मौका था। ऊपर से शाह को शरण का बहाना। आखिर इतने दिनों तक शाह ने अमेरिका के बूते ईरान पर राज किया था।

अब आता है ट्विस्ट – ऑपरेशन ईगल क्लॉ। अप्रैल 1980 में भारी दबाव झेल रहे कार्टर ने एक सीक्रेट रेस्क्यू मिशन को हरी झंडी दिखा दी। 8 हेलिकॉप्टर्स, डेल्टा फोर्स के कमांडोज, और प्लान ये कि रेगिस्तान में लैंड करके दूतावास से बंधकों को निकाला जाए। लेकिन प्लान उलटा पड़ गया। डेजर्ट में धूल भरी आंधी आई, दो हेलिकॉप्टर्स क्रैश हो गए, 8 अमेरिकी सैनिक मारे गए, और पूरा ऑपरेशन फ्लॉप!

कार्टर को पहले से अंदेशा था कि प्लान रिस्की है लेकिन चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक के लालच में वो फंस कर औंधे मुंह गिरे। मीडिया ने इसे “डेजर्ट डिजास्टर” कहा। इस मिशन का ज़ाहिर है कि पहलेपहल ईरान को पता नहीं चला, लेकिन असफलता के बाद दुनिया ने कार्टर को कमजोर नेता करार दिया। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि ये ऑपरेशन टेक्निकल फेलियर था, लेकिन कार्टर की टीम की प्लानिंग की कमी भी जिम्मेदार थी। नतीजा? कार्टर की पॉपुलैरिटी और गिरी।

1980 का प्रेसिडेंशियल इलेक्शन नजदीक आ रहा था। रोनाल्ड रीगन ने कार्टर को चुनौती दी थी। रीगन रिपब्लिकन थे, हॉलीवुड स्टार से पॉलिटिशियन बने थे। क्राइसिस ने कार्टर को बेतरह घेर रखा था – इकोनॉमी खराब, इन्फ्लेशन हाई, और बंधक इशू पर कोई प्रोग्रेस नहीं। रीगन कैंपेन ने इसे भुनाया। लेकिन यहां आती है वो साजिश थ्योरी, जिसे “अक्टूबर सरप्राइज” कहते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि रीगन की टीम ने ईरान से सीक्रेट डील की- बंधकों को इलेक्शन तक रिहा मत करो, बदले में हम हथियार देंगे। क्यों? क्योंकि अगर बंधक रिहा हो जाते, तो कार्टर को “अक्टूबर सरप्राइज” मिलता, यानि आखिरी महीने में बड़ा बूस्ट, और वो जीत जाते। लेकिन क्या हुआ? रीगन ने 489 इलेक्टोरल वोट्स लिए, कार्टर के सिर्फ 49!

बंधक 4 नवंबर 1980 को इलेक्शन के दिन भी फंसे रहे। रीगन जीते, और ठीक 20 जनवरी 1981 को रीगन के इनॉगुरेशन के मिनटों बाद बंधक रिहा हो गए!

टाइमिंग काफी संदिग्ध थी।

गैरी सिक, जो कार्टर की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में ईरान एक्सपर्ट थे, उन्होंने 1991 में किताब लिखी कि रीगन कैंपेन के लोग (जैसे विलियम केसी, जो बाद में CIA डायरेक्टर बने) ने ईरान से मीटिंग्स कीं। 2023 में टेक्सास के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर बेन बार्न्स ने खुलासा किया कि जॉन कोनाली (टेक्सास गवर्नर) ने मिडल ईस्ट ट्रिप की और ईरानी लीडर्स को मैसेज दिया- होस्टेज होल्ड करो, रीगन बेहतर डील देंगे। कोनाली ने ये केसी को रिपोर्ट किया। और हां, रीगन के आने के बाद ईरान-कॉन्ट्रा स्कैंडल हुआ, जहां अमेरिका ने ईरान को हथियार बेचे! वो अलग से लिखूंगा। बाइ द वे ट्रंप को रीगन बहुत पसंद हैं। आपने ओवल ऑफिस में उनका बड़ा सा फोटो शायद इन दिनों देखा हो।

क्रिटिक्स कहते हैं कि होस्टेज घटना में साज़िश का कोई डायरेक्ट प्रूफ नहीं है और ना कांग्रेस जांच में क्लियर हुआ, लेकिन गवाहियां और टाइमिंग तर्क देती हैं कि रिपब्लिकन्स ने कार्टर को नीचा दिखाने के लिए कुछ गड़बड़ की। अगर ये सच है, तो ये कितनी बड़ा देशद्रोह था। साथ ही लॉगन एक्ट का उल्लंघन, जहां प्राइवेट सिटिजंस फॉरेन पावर्स से नेगोशिएट नहीं कर सकते।

बहरहाल, जो हुआ सो हुआ लेकिन ये घटना आज भी धुंधलके में ठिठकी हुई इंतज़ार कर रही है कि कभी ना कभी इसका सच सामने आएगा। आपको इस घटना के बारे में और जानना हो तो बेन एफ्लेक की फिल्म Argo देख सकते हैं। डॉक्युमेंट्रीज़ हैं- 444 Days: The Iran Hostage Crisis, Hostages. किताब हैं- October Surprise: America’s Hostages in Iran and the Election of Ronald Reagan – Gary Sick, en of Spies: Reagan, Carter, and the Secret History of the Treason That Stole the White House – Craig Unger।

(लेखक सीनियर पत्रकार हैं और News 24, TV 9 Bharatvarsh, Zee News और Aajtak जैसे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. मौजूदा दौर में एक निजी चैनल के पॉडकास्ट विभाग का कार्यभार संभाल रहे हैं और ‘पढ़ाकू नितिन’ नाम से एक प्रसिद्ध कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं.)

Last Updated on March 7, 2026 8:09 pm

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