– विश्व दीपक
Reichstag Fire 1933: हिटलर (Hitler) को सत्ता मिल चुकी थी लेकिन जर्मन संसद राइखस्टाग पर उसका संपूर्ण नियंत्रण नहीं था. कुछ आवाजें थीं जो उसका तीखा विरोध करती थीं. खासतौर से कम्युनिस्ट. सड़क से लेकर संसद तक नाज़ीवाद की बैंड बजाकर रखते थे. बचपन से ही इनफीरियॉरिटी कॉम्लेक्स से ग्रस्त हिटलर इससे परेशान था.
यही फरवरी का महीना था. 1933 का साल जब एक रात उसने जर्मन संसद में आग लगवा दी और इसका दोष मढ़ दिया कम्युनिस्टों पर. प्रोपगंडा मिनिस्टर जोसेफ गोएबल्स ने इसकी साजिश रची थी. हरमन गोएरिंग के साथ मिलकर उसने इसका क्रियान्वयन किया. हिटलर का मकसद था. कम्युनिस्टों का सफाया करना. संसद की सारी शक्तियां हड़पना
आग लगवाने के एक दिन बाद यानि 28 फरवरी को हिटलर ने डिक्री जारी की. उसने ‘राज्य और जनता की सुरक्षा’ के नाम पर सारे संवैधानिक और राजनैतिक अधिकार खत्म कर दिये.
ध्यान दीजिए – ‘राज्य और जनता की सुरक्षा’ के नाम पर उसने लोगों के संवैधानिक और राजनैतिक अधिकार खत्म किये. जनता ने खुशी-खुशी देशहित में इसका स्वागत किया. जर्मनी को महान बनाने के लिये इतनी कुर्बानी तो बनती ही थी.
इसके करीब एक महीने के बाद हिटलर ने मार्च में संसद से Enabling Act पास कराया. इसके पास होने के बाद जर्मन संसद अर्थहीन हो गई. सारी शक्तियां हिटलर के हाथ में आ गईं. अब उसे संसद और राष्ट्रपति को बायपास करके कोई भी डिक्री जारी करने का अधिकार मिल चुका था.
फिर इसके बाद हिटलर ने क्या-क्या किया इसका लेखा-जोखा यहां प्रस्तुत करने का कोई औचित्य नहीं. हिटलर की हरकतों की वजह से जर्मनी का क्या नुकसान हुआ – यह याद करने का औचित्य है.
संसद नाम की संस्था सर्वोच्च होती है. चाहे चांसलर हो या प्रधानमंत्री उसके प्रति जिम्मेदार होता है. जो व्यक्ति या विचारधारा संसद की शक्तियों पर कुठाराघात करे उसका प्रतिवाद करना जनता का दायित्व है.
जर्मनी का इतिहास अतीत की घटनाओं का कोई निर्रथक ब्यौरा नहीं है बल्कि एक जीवंत दस्तावेज है जिससे भारत सीख सकता है.
(लेखक लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे हैं. पूर्व में Aajtak, BBC, Zee जैसे कई बड़े संस्थानों में काम कर चुके हैं. उनके फेसबुक वॉल से.)
Last Updated on February 14, 2026 12:55 pm
