Gen-Z या IT लॉबी, Nepal Protests की असल वजह क्या?

– राजेश यादव
दुनिया में सबसे ताकतवर लॉबी IT लॉबी होती है और नेपाल में Gen-Z का आंदोलन इसका जीवंत उदाहरण है, जिसने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया। ये क्रांति बहुत बड़ी है क्योंकि डिजिटल और सोशल मीडिया की ताकत ने युवाओं को आवाज़ दी, लेकिन डिजिटल कंपनियों की ताकत इससे भी बड़ी है जो भविष्य की राजनीति और आंदोलनों को और भी बदल सकती है।
यह डिजिटल क्रांति है जो आज की जेनरेशन ने सरकार तक बदलवा दी। सोशल मीडिया की हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में जो पकड़ है, उस पर अमेरिका का बड़ा प्रभुत्व है। अगर हमारी पसंदीदा ऐप्स और प्लेटफॉर्म पर रोक लगाई जाए, तो यह सीधे-सीधे हमारी आदतों और आजादी पर हमला होता है। नेपाल की जनरेशन Z(Gen-Z) ने इसे बर्दाश्त नहीं किया और जोरदार प्रहार किया।
हां, नेपाल सरकार का भ्रष्टाचार और पॉलिटिकल खेल इस स्थिति को और भी बढ़ा गया, जिससे आंदोलन हिंसक हो गया और सरकार को बैन वापस लेना पड़ा।नेपाल में ऐसा ही बैन लगा, जिससे Gen-Z ने हिंसक प्रदर्शन कर सरकार को भी झुकना पड़ा।
दांव पर अमेरिका की बड़ी डिजिटल कंपनियां थीं, जिन्हें नेपाल की सरकार ने फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, X जैसे 26 (apps )सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन कर दिया। चीन का टिकटॉक बैन नहीं हुआ था, जिससे यह साफ़ है कि यह कदम चीन-अमेरिका के वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा है। Gen-Z ने इस बैन के खिलाफ क्रांति छेड़ी, जो लोकतंत्र के लिए फ्रांसीसी क्रांति जैसी बड़ी घटना मानी जा रही है।

कैसे 26 ऐप्स के बैन से भड़का युवा क्रांति, संसद तक पहुंची झड़पें और आखिरकार सरकार ने कबूला जनता का दबाव!

नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया ऐप्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब और एक्स पर प्रतिबंध लगाया क्योंकि इन कंपनियों ने स्थानीय रजिस्ट्रेशन और शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त नहीं किए। इससे नाराज होकर खासकर जनरेशन जेड के युवाओं में विरोध भड़क उठा, जो पहले ऑनलाइन और फिर सड़कों पर फैल गया। प्रदर्शन तेज होते ही हिंसा हुई जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई। बढ़ते दबाव और हिंसक घटनाओं के कारण सरकार ने बाद में यह बैन हटा लिया।

जनरेशन जेड का आंदोलन कैसे संसद तक पहुंचा ?

नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगाया, क्योंकि कंपनियां सरकार के रजिस्ट्रेशन नियम नहीं मान रही थीं। युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला माना और सोशल मीडिया पर विरोध तेज़ किया। फिर यह विरोध सड़कों पर फैला, खासकर काठमांडू में युवाओं ने संसद तक मार्च किया। सरकार ने प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की, लेकिन हिंसा बढ़ी और प्रदर्शनकारी संसद परिसर तक पहुंच गए, जिससे झड़पें हुईं। इस बहु-स्तरीय आंदोलन ने पूरे देश को हिला दिया।

“नेपाल के इस Gen-Z आंदोलन के पीछे गहरे मनोवैज्ञानिक कारण हैं, जो हमें समझाते हैं क्यों सोशल मीडिया बैन ने युवाओं की प्रतिक्रिया को इतनी तेज़ी से भड़काया। चलिए, इस घटना की पांच मुख्य मनोवैज्ञानिक वजहों पर नजर डालते हैं।”

1. सोशल मीडिया की लत और विड्रॉल सिंड्रोम — सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स से मिलने वाली खुशी (डोपामाइन) युवाओं को इसका आदी बना चुकी है। बैन से जैसे नशे की तरह विड्रॉल सिम्पटम्स हो गए।

2. Reactance थ्योरी — जब किसी की आज़ादी या अधिकार छीना जाता है, तो वह और ज्यादा उसके पीछे भागता है। बैन ने युवाओं में सोशल मीडिया के लिए गुस्सा और विरोध को और बढ़ा दिया।

3. पहचान और अभिव्यक्ति का संकट — Gen-Z के लिए सोशल मीडिया उनकी पहचान, सामाजिक संबंध और खुद को एक्सप्रेस करने का जरिया है। बैन ने उनकी आज़ादी और अस्तित्व को खतरे में डाल दिया।

4. समाजी असहिष्णुता और विद्रोह की प्रवृत्ति — बदलते समाज में टॉलरेंस की कमी और असमानता की भावनाएं युवाओं को ज्यादा क्रांतिकारी और विद्रोही बना रही हैं।

5. मनोरंजन से ज्यादा मानसिक निर्भरता — सोशल मीडिया नशे के समान मनोरंजन नहीं, भावनात्मक और मानसिक जरूरत बन गया है, जिससे बैन का प्रभाव हिंसक प्रदर्शन में बदला।

ये पॉइंट्स सरकार और समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं कि सोशल मीडिया बैन जैसे फैसले कैसे युवाओं के मानस और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और पूर्व में दैनिक भास्कर हाईपर लोकल हेड और इंडिया टीवी में बतौर डिजिटल हेड कार्यभार संभाल चुके हैं… उनके फेसबुक पेज से.. 

Last Updated on September 10, 2025 6:26 pm

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