भारत में स्त्रियां सेक्स (Sex) करती हैं पुरुषों को सुख देने के लिए. अपने सुख के लिए बोलने की इजाज़त नहीं यहां. जो औरतें बोलती हैं कि उन्हें क्या पसंद और क्या नहीं, पति या पार्टनर उसके बाद जो करते हैं उनके साथ वो कम से कम सेक्स नहीं होता. वो होता है मर्दों के लिए ईजैकुलेशन (ejaculation) और औरतों के लिए सिर्फ़ अधूरापन का एहसास.
किसी नज़दीकी दोस्त से बात हो रही थी और बात पर बात निकली तो यहां लिख रही हूं. उसने कहा कि सेक्स (Sex) का क्या है, जिस दिन उसका मन होता है कर लेते हैं, मुझे कुछ नहीं लगता. एकाध बार बोला था तो उसे बुरा लग गया और फिर झगड़े हो गए तो मैंने बोलना छोड़ दिया है अब. वैसे भी यार मैं घर और बाहर का काम करके इतनी थक जाती हूं कि मेरा ही मन नहीं होता.
ऑर्गेज़्म (Orgasm) पर बातें तो बहुत हुईं, बदलाव कितना हुआ?
फ़ेयर एनफ. तू थक जाती है लेकिन जब थकी नहीं रहती तब तेरे अकोर्डिंग चीजें होतीं हैं?
जवाब में वो चुप थी. वैसे भी मुझे उसका जवाब पता था. पिछले साल जब Durex वालों ने कैंपेन चलाया था ऑर्गेज़्म के ऊपर तो सोशल मीडिया पर ख़ूब बातें हुईं थी लेकिन इस एक साल में क्या बदला है इसकी किसी को नहीं पड़ी है. अब जब ये पोस्ट लिख रहीं हूं तो आधी पब्लिक तो लाज के मारे मर जाएगी कि हाय लड़की हो कर सेक्स पर लिख रही. आधी पब्लिक आ कर ये कहेगी कि ऐसा कुछ नहीं होता पुरूष ख़्याल रखते हैं.
मेरा सवाल दूसरे वाले समूह से है आप करते हैं तो क्या पूरी दुनिया करती है? आपको पता भी है भारत के पुरुषों की कितनी बड़ी आबादी सिर्फ़ अपने सुख के लिए सेक्स करता है? उनके लिए खाना खाना, ऑफ़िस का काम करना जैसे टास्क है वैसे ही सेक्स. नथिंग बीआंड दैट.
शर्म, चुप्पी और कैरेक्टर सर्टिफिकेट
अभी पिछले दिनों मैंने Four More Shots Please देखा था. उस सीरिज़ के बाक़ी चीज़ों से इत्तिफ़ाक़ नहीं रखती लेकिन उसमें सीन है जिसमें सिद्धि पटेल अपनी दोस्त उमंग को फ़ोन पर अपने प्रेमी के साथ होने वाले सेक्स (Sex) को एक्स्प्लेन कर रही होती है. सिद्धि कहती है,
“Kaan neck nibble nibble, cleavage tummy gobble gobble, go in five thrusts get out.”
और सिद्धि सिर्फ़ फ़ेक कर रही होती है ताकि उसके पार्टनर का बड़ा सा मेल ईगो हर्ट न हो जाए और सिद्धि का पार्टनर बस अपने ईजैकुलेशन (ejaculation) के बाद चैन से सो जाता है. अब ख़ुद ही अपने अंदर झांक कर देखने की ज़रूरत है कि भारत के कितने प्रतिशत पुरुष अपनी पत्नियों से पूछते हैं कि उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं? क्या वो जो कर रहें उससे उनकी पार्टनर ख़ुश है?
सेक्स = प्रजनन?
यहां ऐसी बातों पर बातें नहीं होतीं. लड़कियों के अंदर शुरू से ही ऐसी शर्म-लिहाज़ वाली ग्रंथि डेवलप करवा दी जाती है कि वो चाह कर भी नहीं बोल पाती और जो बोलती है उन्हें कैरेक्टरलेस साबित करने में फिर देर नहीं लगाते लोग.
जबकि सेक्स (Sex) पर जितना हक़ पुरुषों का है उतना ही स्त्रियों का. स्त्रियों को सेक्स सिर्फ़ बच्चा पैदा करने के लिए नहीं करना चाहिए. वैसे सुना है मैंने अपने गांव में दादी लोग कहती थी कि “गांव में औरतें अपने पति और बड़ों का इतना लिहाज़ करती थी कि पति का चेहरा तक नहीं पहचानती थी. पति सिर्फ़ रात को कमरे में आते थे जब घर के बड़े सो जाते थे.”
इस पर मैं हमेशा कहती थी हां, और फिर सात-आठ बच्चे बस होते थे घूंघट और लाज में रह कर. तब मैं मज़ाक़ उड़ा कर बोल देती थी अब समझतीं हूं कि वो मैरिटल रेप होता रहा होगा. ख़ैर, ये सालों पहले की बात है लेकिन ये बात कितनी बदली है ये देखना भी ज़रूरी है.
पत्रकार/डिजिटल क्रिएटर Anu Roy के फेसबुक पेज से…
Last Updated on July 8, 2025 2:57 pm
