– विश्व दीपक
अनिल अंबानी (Anil Ambani) के खिलाफ़ 17 हज़ार करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में सीबीआई ने छापेमारी की. यह वही अनिल अंबानी है जिसने रफाएल डील से ठीक 12 दिन पहले एक रक्षा कंपनी बनाई थी जिसे मोदी जी ने 33 हज़ार करोड़ का ऑफ सेट कॉन्ट्रैक्ट दिलवाया था. अनिल अंबानी को रक्षा क्षेत्र में काम करने का कोई अनुभव नहीं था फिर उसको इतना बड़ा ऑफ सेट कॉन्ट्रैक्ट HAL से छीनकर किस आधार पर दिया गया था? किसी को नहीं पता.
मैंने यह स्टोरी कर दी.भूचाल आ गया. अंबानी ने पूरी कोशिश की कि मैं स्टोरी गिरा दूं या पल्ला झाड़ लूं. उसने काफी बड़ा ऑफर दिया था. इतना बड़ा की एक आदमी की ज़िन्दगी बदल जाए.आने वाली पीढ़ियों की ज़िन्दगी बदल जाती है ऐसे ऑफर्स को स्वीकार करने के बाद.
टोनी भाई जो अब इस दुनिया में नहीं हैं वो अनिल अंबानी की तरफ से डील कर रहे थे. मैंने प्रस्ताव ठुकराया दिया. गुस्सा कर अनिल भाई ने 5000 करोड़ का मुकदमा दायर कर दिया.
जब साम, दाम काम नहीं आया तो अनिल भाई के लोग दंड वाली भाषा बोलने लगे. राहुल गांधी को पता चला तो उन्होंने हस्तक्षेप किया.सब तुरंत औकात पर आ गए. बाद में अनिल भाई ने स्वतः मुकदमा वापस ले लिया. ऐसा उन्होंने सत्ता प्रतिष्ठान की सलाह पर किया था- बाद में पता चला. मुकदमेबाजी से मोदी जी को राजनीतिक नुकसान हो रहा था.
अनिल अंबानी पर मोदी सरकार की मेहरबानियां इतनी हैं कि भारत के राष्ट्रीय बैंकों का बैंड बज गया. अनिल अंबानी ने 50 से ज़्यादा बैंकों से 47 हज़ार करोड़ से ऊपर का लोन लिया था. मोदी जी की कृपा से मामला 455 करोड़ में ही सेटल हो गया.
अब उसी अंबानी के खिलाफ ED और CBI [अमित शाह के अधीन] को कारवाई करनी पड़ रही है. निश्चित रूप से मोदी जी के लिए निजी तौर पर यह मजबूरी भरा फैसला रहा होगा.
मोदी जी ने क्रोनी कैपिटलिजम की कील से अर्थव्यवस्था में इतने छेद किए हैं, इतने छेद किए कि उन्हें आने वाले कई दशकों तक पाटना मुश्किल होगा.
लेखक पत्रकार हैं और वर्तमान में नेशनल हेराल्ड में कार्यरत हैं. उनके फेसबुक पेज से…
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Last Updated on August 24, 2025 12:16 pm
