– विश्व दीपक
ठीक उसी वक्त जब चीन से निकला कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा था चीन की सेना भारत के लद्दाख (Ladakh) में घुसपैठ कर रही थी. उसी वक्त जब चीन (China), लद्दाख में घुसपैठ कर रहा था मोदी सरकार चीन की एक कंपनी को ₹1126 करोड़ का ठेका देने वाली फाइल आगे सरका रही थी. यह साल 2020 की बात है.
जिस चीनी कंपनी को ठेका मिला उसका नाम है – शंघाई टनल इंजीनियरिंग लिमिटेड (STEC). जिस प्रोजेक्ट के लिये ठेका मिला उसका नाम है दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल परियोजना. संक्षेप में RRTS बोलते हैं.
अगर आपने कभी दिल्ली से मेरठ जाने वाली रैपिड रेल (Rapid Train) में सफर किया होगा तो मालूम होगा कि अशोकनगर-साहिबाबाद के बीच टनल बना है. इस टनल का निर्माण STEC ने ही किया था.
मेरी स्टोरी प्रकाशित होने के बाद संघ के स्वदेशी जागरण मंच वालों ने संपर्क किया. वो सबूत मांग रहे थे. मैंने दिया. जागरण मंच वाले अपनी ही सरकार मतलब मोदी सरकार के दोगलेपन से बेइंतहा नाराज़ थे.
प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन लॉकडाउन था. शायद उन लोगों ने मोदी जी को कुछ चिट्ठी-पत्री भी भेजी थी. उनकी मांग की थी कि शंघाई टनल लिमिटेड को रैपिड रेल परियोजना से अविलंब बाहर किया जाय.
याद रहे कि गालवान झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे. इनमें से एक कर्नल संतोष बाबू थे जिनके ऊपर सलमान खान ने हाल ही में फिल्म बनाई है. हालांकि जब राहुल गांधी और कांग्रेस ने सवाल उठाया तो मोदी जी ने कहा कि कोई नहीं घुसा.
अगर कोई घुसा ही नहीं था तो फिर चीन के साथ सीमा पर 23 राउंड की बातचीत किस लिये चल रही थी? अभी भी चल रही है. भारत लद्दाख में 2020 से पूर्व की स्थिति पर लौटने की मांग क्यों कर रहा है?
मुझे इसका ध्यान इसलिए आया क्योंकि आज ही गोमूत्र मीडिया ने दावा किया है कि इस बार मोदी जी ऐसा बजट लाने वाले हैं जो चीन की हेकड़ी टाइट कर देगा. कुछ दिन पहले इसी गोमूत्र मीडिया ने रॉयटर्स के हवाले से कहा था कि चीनी कंपनियां फिर से सरकारी ठेका-पट्टा हासिल कर सकेंगी. लद्दाख घुसपैठ के बाद भारत ने प्रतिबंध लगा दिया था.
इसका यह मतलब हुआ कि फिर से शंघाई टनल लिमिटेड को भारत में ₹1126 करोड़ या इससे भी ज्यादा का ठेका मिलेगा. एक मतलब यह भी हुआ कि भारत ने लद्दाख पर चीन का कब्जा बिना स्वीकार किये ही स्वीकार कर लिया.
यह तब है जब चीन, पाकिस्तान की तरफ से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से अपरोक्ष जंग भी लड़ चुका है. माई फ्रैंड दोलांड की दुलत्ती के बाद मोदी जी को जिनपिंग की झप्पी याद आ गई.
सोचता हूं कि स्वदेशी जागरण मंच वाले अब क्या करेंगे? अगली दिवाली चीनी झालर और छोटी आंख वाले गणेश का बहिष्कार होगा या नहीं?
लेखक लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे हैं. पूर्व में Aajtak, BBC, Zee जैसे कई बड़े संस्थानों में काम कर चुके हैं. उनके फेसबुक वॉल से.)
Last Updated on January 12, 2026 2:13 pm
