Surat Medical College में रैगिंग का खौफनाक मामला, छात्र की मौत के बाद 4 रेजिडेंट डॉक्टर निलंबित

सूरत मेडिकल कॉलेज में 29 साल के डॉक्टर हर्ष पंड्या की मौत के बाद रैगिंग का मामला सामने आया तो प्रशासन ने रातभर जांच के बाद चार रेजिडेंट डॉक्टरों को छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया. नौ जूनियर डॉक्टरों ने मानसिक प्रताड़ना, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए थे. चार फैकल्टी सदस्यों को भी नोटिस मिला है. लेकिन सवाल है, शिकायतों के बावजूद क्या पहले कार्रवाई हो सकती थी?

रैगिंग, प्रताड़ना और फिर मौत
रैगिंग, प्रताड़ना और फिर मौत

Surat Medical College Ragging: सूरत मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है. कम से कम 10 प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ कथित रैगिंग के मामले में कॉलेज ने चार रेजिडेंट डॉक्टरों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है. इनमें से एक छात्र, 29 वर्षीय डॉ. हर्ष पंड्या, रविवार 9 अगस्त को हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे.

यह कार्रवाई सोमवार तड़के करीब 4 बजे हुई एंटी-रैगिंग कमेटी की असाधारण बैठक में सर्वसम्मति से ली गई. कॉलेज की कार्रवाई के साथ चार फैकल्टी सदस्यों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

छात्र की मौत के बाद सामने आया रैगिंग का मामला

पूरा मामला तब सामने आया जब गुजरात के अरावली जिले के रहने वाले 29 वर्षीय प्रथम वर्ष के पीजी माइक्रोबायोलॉजी छात्र डॉ. हर्ष पंड्या रविवार को न्यू सिविल हॉस्पिटल के हॉस्टल में मृत पाए गए.

इसके बाद प्रथम वर्ष के छात्रों की शिकायतों और मृत छात्र के पिता की शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू हुई. स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पनशेरिया ने रविवार को मामले की जांच के लिए एक हाई-लेवल कमेटी गठित की थी.

इस कमेटी की संयुक्त अध्यक्षता सिविल हॉस्पिटल के डीन और मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने की.

9 छात्रों ने लिखित शिकायत में क्या कहा?

मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. पारुल वडगामा के मुताबिक, प्रथम वर्ष के नौ पीजी छात्रों ने लिखित शिकायत देकर चार रेजिडेंट डॉक्टरों के खिलाफ आरोप लगाए थे.

छात्रों ने इन डॉक्टरों पर मानसिक प्रताड़ना, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए.

मामले की गंभीरता को देखते हुए कमेटी ने 9 अगस्त की रात 8 बजे से लेकर 10 अगस्त की सुबह 4 बजे तक शिकायतों और आरोपों की जांच की. इसके बाद तड़के ही चार रेजिडेंट डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया गया.

चार डॉक्टरों पर छह महीने का निलंबन

मेडिकल कॉलेज की ओर से सोमवार सुबह जारी बयान में कहा गया कि डॉ. निराली वसावे, डॉ. अनुज माहेश्वरी, डॉ. दीक्षित घेवरिया और डॉ. हिना भूत को छह महीने के लिए निलंबित किया गया है.

कॉलेज ने इसे अनुशासनहीनता और गंभीर लापरवाही का मामला माना है. निलंबित डॉक्टरों को तत्काल हॉस्टल खाली करने और किसी भी अकादमिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लेने का आदेश दिया गया है.

कॉलेज के मुताबिक, एंटी-रैगिंग कमेटी की पूरी रिपोर्ट को कॉलेज काउंसिल ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है.

चार फैकल्टी सदस्यों को भी नोटिस

मामला सिर्फ रेजिडेंट डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहा. कॉलेज ने चार फैकल्टी सदस्यों को भी शो-कॉज नोटिस जारी किया है.

इनमें डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री और डॉ. लतिका पुरोहित, जिनमें माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख भी शामिल हैं, के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

कॉलेज ने कहा है कि पूरी रिपोर्ट राज्य सरकार को भी भेज दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.

रातभर चली जांच, सुबह हुआ फैसला

मामले की जांच को लेकर कॉलेज प्रशासन ने तेजी दिखाई. नौ प्रथम वर्ष के पीजी छात्रों और मृत छात्र के पिता की शिकायत के बाद हाई-लेवल कमेटी ने रातभर आरोपों की पड़ताल की.

9 अगस्त की रात 8 बजे शुरू हुई जांच 10 अगस्त की सुबह 4 बजे तक चली. इसके बाद एंटी-रैगिंग कमेटी की असाधारण बैठक में कार्रवाई पर फैसला लिया गया.

यानी जिस मामले ने रविवार को पूरे मेडिकल कॉलेज को झकझोर दिया, उस पर सोमवार की सुबह होने से पहले ही कॉलेज प्रशासन ने अपना पहला बड़ा कदम उठा दिया.

पुलिस भी कर रही जांच

मामले में पुलिस की जांच भी जारी है. The Indian Express ने खटोदरा पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर एन.वी. भरवाड़ से बात की. उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले में Accidental Death (AD) रिपोर्ट दर्ज की है और जांच की जा रही है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या चार निलंबित रेजिडेंट डॉक्टरों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है, तो इंस्पेक्टर भरवाड़ ने कहा कि उन्हें अभी एंटी-रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है. रिपोर्ट मिलने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा.

कार्रवाई हुई, लेकिन सवाल अभी बाकी हैं

सूरत मेडिकल कॉलेज में चार रेजिडेंट डॉक्टरों का छह महीने का निलंबन और चार फैकल्टी सदस्यों को शो-कॉज नोटिस फिलहाल प्रशासन की बड़ी कार्रवाई जरूर है. लेकिन डॉ. हर्ष पंड्या की मौत के बाद कई सवाल अब भी सामने हैं.

क्या कथित रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना की शिकायतों पर पहले ही कार्रवाई हो सकती थी? क्या संस्थान के भीतर जूनियर छात्रों की शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लिया गया? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान में, जहां भविष्य के डॉक्टर तैयार होते हैं, वहां रैगिंग और कथित मानसिक उत्पीड़न के लिए जवाबदेही आखिर कितनी सख्त होगी?

चार डॉक्टरों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन अब निगाहें पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर हैं.

Last Updated on August 10, 2026 3:43 pm

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *