सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ी कानूनी राहत देते हुए सावरकर से जुड़ी टिप्पणी के मामले में निचली अदालत द्वारा जारी आपराधिक मानहानि की शिकायत और समन को रद्द कर दिया है।
आपको बता दें कि यह मामला राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान नवंबर 2022 में महाराष्ट्र के अकोला जिले में दिए गए एक भाषण से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
इसके बाद लखनऊ की निचली अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। राहुल गांधी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई थी। अप्रैल 2025 में सुनवाई के दौरान अदालत ने राहुल गांधी को स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में भविष्य में आपत्तिजनक या विवादित टिप्पणी करने से सावधान रहने को कहा था।
अब 14 अगस्त 2026 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेशों को रद्द कर दिया। अदालत के सामने यह बात सामने आई कि इस मामले में आवश्यक सरकारी मंजूरी (sanction) प्राप्त होने का खुलासा नहीं किया गया था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत और समन को रद्द कर दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया था। सरकार की ओर से कहा गया था कि मजिस्ट्रेट ने मामले की फाइल, गवाहों के बयान और जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद समन जारी किया था। सरकार ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए थे।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इस विशेष आपराधिक मानहानि शिकायत और निचली अदालत के समन पर कार्यवाही समाप्त हो गई है। यह राहुल गांधी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत मानी जा रही है।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सावरकर से संबंधित राहुल गांधी के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें भी सामने आई हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इसी विशेष मामले से संबंधित है और इसे सावरकर से जुड़ी हर कानूनी कार्यवाही पर लागू नहीं माना जाना चाहिए।
Last Updated on August 14, 2026 2:12 pm
