दिल्ली में प्रदूषण कम करने के नाम पर वसूले गए एनवायरनमेंट कंपनसेशन चार्ज (ECC) के इस्तेमाल को लेकर CAG की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-16 से 2024-25 के बीच ECC के तौर पर ₹1,624.63 करोड़ जमा हुए, लेकिन इनमें से ₹843.12 करोड़ अब भी खर्च नहीं किए गए हैं.
280 दिनों का हिसाब गायब
दिल्ली विधानसभा में 10 अगस्त को पेश CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, ECC कलेक्शन के रिकॉर्ड में कुल 280 दिनों का डेटा उपलब्ध नहीं था.
इसमें 6 अप्रैल से 26 अप्रैल 2018 तक 21 दिन और 18 दिसंबर 2020 से 2 सितंबर 2021 तक 259 दिन शामिल हैं. CAG ने इस गायब डेटा को लेकर स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक कोई जवाब नहीं मिला.
प्रदूषण के नाम पर आया पैसा, खर्च कितना हुआ?
ECC की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2015 में हुई थी. यह चार्ज दिल्ली में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों से वसूला जाता है और इसका मकसद प्रदूषण से निपटने के लिए संसाधन जुटाना है.
CAG के अनुसार, 10 साल में जमा हुए ₹1,624.63 करोड़ में से 31 मार्च 2025 तक सिर्फ ₹781.51 करोड़ खर्च किए गए.
यानी ₹843.12 करोड़ खर्च ही नहीं हुए.
शुरुआती वर्षों में सबसे ज्यादा कलेक्शन
रिपोर्ट के मुताबिक, ECC से शुरुआती वर्षों में बड़ी रकम जुटाई गई.
- 2015-16: ₹144.06 करोड़
- 2016-17: ₹358.11 करोड़
- 2017-18: ₹472.63 करोड़
इसके बाद कलेक्शन लगातार कम होता गया. 2023-24 में यह ₹95.3 करोड़ और 2024-25 में ₹93.54 करोड़ रहा.
कोरोना महामारी के दौरान 2021-22 में सबसे कम ₹39.4 करोड़ का कलेक्शन हुआ.
असली सवाल पैसे का नहीं, इस्तेमाल का है
प्रदूषण से जूझती दिल्ली में पर्यावरण के नाम पर हजारों करोड़ रुपये जुटाए गए. लेकिन CAG की रिपोर्ट अब यह सवाल सामने रखती है कि जब प्रदूषण रोकने के लिए पैसा मौजूद था, तो उसका बड़ा हिस्सा खर्च क्यों नहीं हुआ?
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और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि 280 दिनों के कलेक्शन का रिकॉर्ड आखिर गायब कैसे हो गया?
क्या दिल्ली की हवा साफ करने के लिए सिर्फ पैसा वसूलना काफी है, या उस पैसे का हर रुपया कहां और कैसे खर्च हुआ, इसका हिसाब भी जनता को मिलना चाहिए?
Last Updated on August 13, 2026 10:20 am
