उत्तर प्रदेश के 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में विशेष MP-MLA अदालत ने 25 बीजेपी नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की अभियोजन की अर्जी मंजूर कर ली है। आरोपियों में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व राज्य मंत्री सुरेश राणा भी शामिल हैं।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/MP-MLA अदालत के न्यायाधीश देवेंद्र कुमार फौजदार ने बुधवार को अभियोजन की ओर से दायर मुकदमा वापस लेने की अर्जी को मंजूरी दी। अभियोजन अधिकारी राहुल सिंह ने गुरुवार को इस फैसले की जानकारी दी।
यह मामला 31 जुलाई 2013 को मुजफ्फरनगर जिले के नगला मादौर में आयोजित एक महापंचायत से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, महापंचायत के दौरान निषेधाज्ञा का कथित उल्लंघन किया गया था। आरोप था कि सभा में शामिल लोगों ने सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डाली और भाषणों के जरिए सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश की।
इस मामले में 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा था। इनमें बीजेपी से जुड़े नेता और हिंदू संगठन के कुछ कार्यकर्ता शामिल थे। अब अदालत द्वारा अभियोजन को मामला वापस लेने की अनुमति दिए जाने के बाद इन आरोपियों के खिलाफ इस मामले की कार्यवाही समाप्त होने का रास्ता साफ हो गया है।
मुजफ्फरनगर में अगस्त-सितंबर 2013 में हुई सांप्रदायिक हिंसा उत्तर प्रदेश के सबसे गंभीर दंगों में शामिल रही थी। हिंसा की शुरुआत से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में तनाव का माहौल था। इसके बाद मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में हिंसा फैल गई थी। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए थे।
2013 की हिंसा के बाद कई अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें हत्या, हिंसा, आगजनी, दंगा और कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने जैसे आरोपों से जुड़े मामले शामिल थे। समय के साथ कई मामलों में अदालतों में सुनवाई हुई और कुछ मामलों में आरोपियों को राहत भी मिली।
ताजा मामला विशेष रूप से 31 जुलाई 2013 की नगला मादौर महापंचायत से संबंधित है। अभियोजन का आरोप था कि उस समय लागू निषेधाज्ञा के बावजूद बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। इसके अलावा कुछ आरोपियों पर सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा डालने और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाले भाषण देने के आरोप लगाए गए थे।
अदालत के बुधवार के आदेश के बाद इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से आगे मुकदमा चलाने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। हालांकि, मामला वापस लेने की अनुमति दिए जाने का आधार अदालत के आदेश और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से तय होता है।
इस फैसले के बाद 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े पुराने मामलों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस शुरू होने की संभावना है। मामले में शामिल प्रमुख नेताओं के कारण अदालत का यह आदेश राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Last Updated on August 13, 2026 10:45 am
