उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार को निर्माणाधीन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में काम कर रहे 7 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता मजदूरों की तलाश के लिए राहत और बचाव अभियान जारी है।
अधिकारियों के अनुसार यह हादसा मायापुर (पीपलकोटी) इलाके में हुआ। खबरों के मुताबिक भूस्खलन और जमीन धंसने की वजह से सुरंग का एक बड़ा हिस्सा मलबे और पानी से भर गया। अचानक पानी और मलबा आने के कारण सुरंग के अंदर मौजूद मजदूर फंस गए।
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचाा। सुरंग के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया। बचाव कार्य में कई एजेंसियों की टीमें जुटी हुई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग के अंदर अभी भी पानी और मलबा मौजूद है, जिससे बचाव अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनके जोशी ने बताया था कि हादसे के समय सुरंग के अंदर कुल 22 लोग मौजूद थे। रातभर चले बचाव अभियान के दौरान 19 लोगों को बाहर निकाल लिया गया था। हालांकि, इनमें से 7 लोगों की मौत हो गई। तीन लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान टिहरी के प्रदीप सिंह पवार, चमोली के मुकेश, बिहार के दुर्लभ शर्मा, झारखंड के विजय और जितेंद्र कुमार तथा लोकेश्वर और भुवनेश्वर के रूप में हुई है। लोकेश्वर और भुवनेश्वर के मूल स्थान की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
घायलों को उपचार के लिए गोपेश्वर जिला अस्पताल पहुंचाया गया है। डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है। वहीं, सुरंग के अंदर फंसे लोगों की तलाश के लिए बचावकर्मी लगातार काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लेने के लिए हेलीकॉप्टर से पीपलकोटी पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से हादसे की जानकारी ली और लापता लोगों को जल्द से जल्द खोजने के निर्देश दिए।
मौके पर मौजूद जिलाधिकारी गौरव कुमार ने लापता लोगों की तलाश के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों को जुटाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता सुरंग में फंसे लोगों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।
अधिकारियों का कहना है कि बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा। फिलहाल प्रशासन की नजर लापता तीन लोगों की तलाश पर है। सुरंग में पानी और मलबा कम होने के बाद बचाव दल को अभियान में और तेजी आने की उम्मीद है। हादसे के कारणों और निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जाएगी।
Last Updated on August 14, 2026 3:44 pm
