नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने हिमालयी सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है. नेपाल पुलिस के मुताबिक 157 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार 403 लोग अब भी लापता हैं. इनमें 341 विदेशी नागरिक और 133 भारतीय शामिल हैं. हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के अपडेट में लापता लोगों की संख्या बदल रही है, इसलिए राहत और खोज अभियान के बीच आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं. (India Today)
यह तबाही नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के आसपास शुरू हुई. रसुवा तिब्बत की सीमा से लगा इलाका है और यहां से नेपाल-चीन के बीच महत्वपूर्ण व्यापार और यात्रा मार्ग गुजरता है. बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया. कई जगह पूरा इलाका पानी, कीचड़ और मलबे में बदल गया. (Reuters)
भूकंप, ग्लेशियर और मलबे ने बनाया तबाही का सैलाब
शुरुआती जानकारी में भूकंप और हिमस्खलन को इस आपदा से जोड़ा गया था. बाद की रिपोर्टों में एक ग्लेशियर के हिस्से के टूटने और उसके बाद बड़े पैमाने पर बर्फ और चट्टानों के खिसकने को संभावित ट्रिगर बताया गया है. इस मलबे ने नदी के बहाव को अचानक प्रभावित किया और तेज रफ्तार पानी तथा मलबे का सैलाब नीचे की ओर आया. (Reuters)
यही वजह है कि इसे सामान्य बारिश वाली बाढ़ से अलग अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड माना जा रहा है. पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टान और मलबा आया, जिससे लोगों को संभलने और सुरक्षित जगह पहुंचने का बहुत कम समय मिला.
त्रिशूली बाजार में घर, पुल और स्कूल तक डूबे
बाढ़ ने नुवाकोट के ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार को भी बुरी तरह प्रभावित किया. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक बाजार का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया. पुल, सड़कें, घर और दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं.
कई इलाकों में संचार और सड़क संपर्क टूटने से राहत और बचाव अभियान भी मुश्किल हो गया है. कुछ दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन खराब मौसम, तेज बहाव और मलबे के कारण बचाव अभियान आसान नहीं है. (Reuters)
133 भारतीयों का क्या हुआ?
इस आपदा का भारत से जुड़ा सबसे गंभीर पहलू 133 भारतीय नागरिकों का लापता होना है.
नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 403 लापता लोगों में 341 विदेशी हैं. इनमें 133 भारतीय नागरिक हैं. लापता विदेशी नागरिकों में अमेरिकी, ब्रिटिश और दूसरे देशों के नागरिक भी शामिल हैं. (India Today)
लापता लोगों में बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की बताई जा रही है. रसुवागढ़ी-ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण रास्ता है.
इसी बीच एक और चिंता सामने आई है. सद्गुरु से जुड़े एक कैलाश यात्रा समूह के 77 तीर्थयात्रियों के बारे में भी संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई है. (India Today)
भारत सरकार ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए कदम तेज किए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर समर्थन जताया है. भारतीय वायुसेना का C-130J विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ है. (The Economic Times)
चीन के तिब्बत में भी भारी नुकसान
बाढ़ का असर नेपाल की सीमा से आगे चीन के तिब्बत क्षेत्र तक पहुंचा है.
तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी पानी और मलबे ने भारी नुकसान किया. चीन की ओर से तीन मौतों और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. बॉर्डर क्षेत्र में सड़क, बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है. (Reuters)
यह इलाका व्यापार के साथ-साथ कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण है.
बिहार में क्यों बढ़ी चिंता?
नेपाल की इस आपदा का असर अब भारत के मैदानी इलाकों पर भी चिंता बढ़ा रहा है.
नेपाल से आने वाला पानी गंडक नदी प्रणाली में पहुंच रहा है. इसके बाद बिहार में हाई अलर्ट जारी किया गया है. वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं, ताकि बढ़ते पानी के दबाव को नियंत्रित किया जा सके. (India Today)
बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश में भी नेपाल सीमा से लगे इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है. गंडक-नारायणी नदी प्रणाली में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. (The Times of India)
बिहार प्रशासन ने लोगों को नदी और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है. हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
राहत अभियान जारी, लेकिन चुनौती बड़ी
नेपाल में पुलिस, सेना और बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं. लेकिन कई इलाकों में सड़कें और पुल टूटने के कारण जमीन के रास्ते पहुंचना मुश्किल है. बिजली और संचार व्यवस्था बाधित होने से लापता लोगों से संपर्क करना भी चुनौती बना हुआ है. (Reuters)
इस पूरी त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़, ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के खतरे को फिर सामने ला दिया है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 403 लापता लोगों में से कितने सुरक्षित हैं और 133 भारतीय नागरिकों तक बचाव दल कब पहुंच पाएंगे?
और भारत के लिए दूसरा बड़ा सवाल है…
नेपाल से आने वाले पानी का बिहार और उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों पर कितना असर पड़ेगा?
आने वाले कुछ घंटे इस पूरे घटनाक्रम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं.
Last Updated on August 27, 2026 8:13 am
