– राजेश यादव
“मेरिट सिर्फ आरक्षण (#Reservation ) पर ही क्यों याद आती है?”
अगर वास्तव में NEET-MBBS में मेरिट और समान अवसर की बात करनी है, तो बहस सिर्फ SC/ST आरक्षण पर क्यों रुक जाती है?
SC/ST को मुख्यधारा में लाने के लिए संविधान ने आरक्षण की व्यवस्था की है और सुप्रीम कोर्ट भी स्पष्ट कर चुका है कि आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार यदि सामान्य मेरिट से चयनित होता है, तो उसे Open/Unreserved सीट मिल सकती है।
लेकिन असली सवाल यह भी है कि जिस मेडिकल शिक्षा में एक तरफ सरकारी सीट के लिए हजारों बच्चे कड़ी प्रतियोगिता करते हैं, वहीं दूसरी तरफ निजी मेडिकल कॉलेजों की Management/NRI जैसी सीटों पर बहुत ऊंची फीस देकर MBBS में प्रवेश लिया जा सकता है। कई जगह पूरी MBBS शिक्षा की लागत ₹1 करोड़ या उससे अधिक तक पहुंच सकती है।
तो अगर सवाल “मेरिट” का है, तो सवाल हर व्यवस्था से पूछिए।
यह मत देखिए कि बच्चा SC है, ST है या General।
यह देखिए कि उसका NEET स्कोर क्या था, उसे सीट किस category/quota के तहत मिली और उसके लिए कितनी फीस लगी।
सामाजिक न्याय का मतलब किसी वर्ग को नीचे रखना नहीं है।
और मेरिट का मतलब भी केवल गरीब या आरक्षित वर्ग के बच्चे पर सवाल उठाना नहीं होना चाहिए।
बहस करनी है तो पूरी मेडिकल एडमिशन व्यवस्था कीजिए—आरक्षण से लेकर करोड़ों रुपये वाली सीटों तक।
लेकिन अगर सच में मेरिट और समान अवसर की बात करनी है, तो एक और सवाल भी पूछना चाहिए…”
#EducationSystem का एक उदाहरण सोचिए
एक छात्र #NEET में लगभग 11 लाख Rank लाता है। उसकी मेरिट सरकारी MBBS सीट के लिए पर्याप्त नहीं है। लेकिन उसके पिता के पास करोड़ों रुपये खर्च करने की क्षमता है, इसलिए वह महंगी Management/NRI सीट के जरिए MBBS में प्रवेश लेने का सपना देख सकता है।
दूसरी तरफ, एक ऐसा छात्र है जो बेहद कम संसाधनों के बावजूद NEET में बहुत अच्छी Rank लाता है और सरकारी सीट के लिए संघर्ष करता है।
अब सवाल यह है कि अगर हमें मेडिकल शिक्षा में मेरिट की बात करनी है, तो चर्चा सिर्फ SC/ST आरक्षण पर ही क्यों हो?
क्या हमें यह नहीं पूछना चाहिए कि मेडिकल सीट तक पहुंचने में NEET Rank कितनी महत्वपूर्ण है और परिवार की आर्थिक क्षमता कितनी?
मेरा सवाल किसी बच्चे से नहीं, पूरे सिस्टम से है।
अगर पैसे के दम पर बहुत खराब Rank के बाद भी MBBS का रास्ता खुल सकता है, तो यह व्यवस्था भी सामाजिक और शैक्षणिक असमानता को बढ़ाने वाली हो सकती है।
विरोध करना है तो पूरी व्यवस्था का कीजिए—आरक्षण से लेकर करोड़ों रुपये वाली Management/NRI सीटों तक।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और पूर्व में दैनिक भास्कर हाईपर लोकल हेड और इंडिया टीवी में बतौर डिजिटल हेड कार्यभार संभाल चुके हैं… उनके फेसबुक पेज से..
Last Updated on August 26, 2026 10:57 am
