ECINet और ERONet पर किसका नियंत्रण? चुनाव आयोग के आदेश से फिर चर्चा

चुनाव आयोग ने अधिकारियों के कामकाज का नया बंटवारा जारी करते हुए IT विभाग की निगरानी व्यवस्था को बरकरार रखा है. डायरेक्टर जनरल IT सीमा खन्ना को वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त के माध्यम से फाइलें प्रस्तुत करनी होंगी. इससे पहले दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची के केंद्रीकरण और 28 जुलाई के आदेश पर कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी.

ECI में IT विभाग की निगरानी किसके पास? नए आदेश में क्या बदला?
ECI में IT विभाग की निगरानी किसके पास? नए आदेश में क्या बदला?

भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने अपने अधिकारियों के बीच कामकाज के बंटवारे को लेकर बुधवार को नया आदेश जारी किया है. इस आदेश में कई बदलाव किए गए हैं. सबसे अहम बात यह है कि आयोग ने डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना के कामकाज पर निगरानी की व्यवस्था को फिर से स्पष्ट करते हुए बरकरार रखा है.

यह घटनाक्रम उस विवाद के करीब तीन महीने बाद सामने आया है, जब अधिकारियों के कामकाज के बंटवारे में बदलाव को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने चिंता जताई थी और कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन के सामने यह मामला उठाया था. द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी 23 सितंबर को प्रकाशित जांच रिपोर्ट में इस घटनाक्रम का खुलासा किया था.

बुधवार को जारी आयोग के कार्यालय आदेश के मुताबिक, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा को ‘IT/ICT’ विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं, सीमा खन्ना के संबंध में आदेश में कहा गया है, “वह उपरोक्त कार्यात्मक विभागों की फाइलें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (PKS) के माध्यम से प्रस्तुत करेंगी.”

इससे पहले 28 जुलाई के कार्य आवंटन आदेश में तत्कालीन उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार के कार्यक्षेत्र से IT और ICT विभागों को हटा दिया गया था. इन विभागों का जिम्मा केवल सीमा खन्ना के नाम पर दर्ज किया गया था. इससे यह संकेत मिलता था कि सीमा खन्ना अब किसी उप चुनाव आयुक्त के बजाय सीधे निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट करेंगी.

निर्वाचन आयोग का IT विभाग ECINet और ERONet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का संचालन करता है. ECINet नागरिकों को चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी और संवाद का डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराता है. वहीं, ERONet निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची के प्रबंधन में मदद करता है.

दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग आंतरिक टिप्पणियों में कहा था कि जमीनी स्तर पर तैनात अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि उन्हें ERONet तक उचित पहुंच नहीं मिल रही है. उनका कहना था कि इससे मतदाता सूचियों का ‘केंद्रीकरण’ हो रहा है.

28 जुलाई के आदेश के अगले ही दिन यानी 29 जुलाई को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन को पत्र लिखकर कहा था कि वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने यह आदेश निर्वाचन आयोग की मंजूरी के बिना जारी किया है.

28 जुलाई का आदेश अब तक लागू ही नहीं हुआ था

28 जुलाई के कार्य आवंटन आदेश में अब तक औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था. निर्वाचन आयोग का कहना है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद इस आदेश को कभी लागू ही नहीं किया गया.

इसका मतलब यह हुआ कि सीमा खन्ना लगातार वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के माध्यम से ही फाइलें प्रस्तुत करती रहीं. अगस्त में उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार के आयोग से जाने के बाद IT विभाग के लिए मनीष गर्ग लिंक अधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे.

गुरुवार को निर्वाचन आयोग के एक सूत्र ने कहा, “कार्य आवंटन का आदेश आयोग के सर्वसम्मत फैसले के अनुसार जारी किया गया है. DG IT की रिपोर्टिंग व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है. वह हमेशा से उप चुनाव आयुक्त स्तर के अधिकारी को ही रिपोर्ट करती रही हैं.”

30 जुलाई को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एक संयुक्त आंतरिक नोट पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे आयोग के भीतर प्रसारित किया गया था. इसमें कहा गया था, “इसलिए, जब तक कार्य आवंटन में बदलाव को लेकर आयोग के भीतर आम सहमति नहीं बन जाती, तब तक 23 सितंबर 2025 के आदेश के तहत जारी पिछला कार्य आवंटन ही जारी रहेगा.”

कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र के बाद निर्वाचन आयोग ने दी थी सफाई

23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था. इसके तीन दिन बाद यानी 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी.

आयोग ने कहा था, “कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र आयोग के किसी नीतिगत मामले या IT विभाग से संबंधित नहीं था, बल्कि निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था. संबंधित अधिकारी की ओर से जारी किए गए कार्य पुनर्वितरण आदेश वास्तव में लागू नहीं किए गए थे. दोनों आयुक्तों के आदेश के बाद IT विभाग पर उप चुनाव आयुक्त की निगरानी कभी वास्तव में हटाई ही नहीं गई थी.”

इसके बाद 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में भी निर्वाचन आयोग ने कहा था, “30 जुलाई 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से जारी संयुक्त निर्देश के मद्देनजर 28 जुलाई 2026 का आदेश कभी लागू नहीं किया गया.”

विवेक जोशी ने मनीष गर्ग के आदेश पर उठाए थे सवाल

कैबिनेट सचिव को लिखे अपने पत्र में चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने कहा था कि 28 जुलाई का आदेश मनीष गर्ग की ओर से जारी किया गया था, लेकिन इसे निर्वाचन आयोग की मंजूरी नहीं मिली थी.

जोशी ने यह भी बताया था कि जब उन्होंने इस आदेश से संबंधित फाइलें मांगीं, तो उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गईं.

अपने पत्र में जोशी ने लिखा था, “उक्त आदेश में उन्होंने काम का आवंटन स्वयं को भी किया और उन अधिकारियों को भी किया, जो उनसे वरिष्ठ या उनके समकक्ष हैं.”

इस तरह विवाद केवल IT विभाग की रिपोर्टिंग व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि अधिकारियों के बीच अधिकारों और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर भी सवाल उठे थे.

नए उप चुनाव आयुक्त प्रकाश राजपुरोहित को भी मिली जिम्मेदारी

IT विभाग के कार्य आवंटन में बदलाव के अलावा बुधवार के नए आदेश में हाल ही में नियुक्त उप चुनाव आयुक्त प्रकाश राजपुरोहित को भी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं.

उन्हें चुनाव योजना, आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) और परिसीमन (Delimitation) समेत कई विषयों का जिम्मा दिया गया है.

चुनाव योजना के मामले में वह वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग को सहयोग करेंगे.

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नए आदेश के बाद निर्वाचन आयोग के भीतर अधिकारियों की जिम्मेदारियों और रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर स्थिति फिर से स्पष्ट करने की कोशिश की गई है. हालांकि, जुलाई में जारी आदेश, दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र ने आयोग के आंतरिक कामकाज और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर कई अहम सवाल खड़े किए थे.

Last Updated on November 6, 2026 8:09 am

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