केरलम की कांग्रेस सरकार ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोपों की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Vigilance and Anti-Corruption Bureau) को दिया है. इस मामले में एक नई शिकायत सामने आने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है.
इससे पहले अक्टूबर में राज्य सरकार ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ साल 2006 में शुरू हुई जांच को दोबारा खोलने का आदेश दिया था. 1988 बैच के IAS अधिकारी ज्ञानेश कुमार उस समय केरलम कैडर में तैनात थे और राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव के पद पर कार्यरत थे.
आखिर यह मामला क्या है? ज्ञानेश कुमार पर रिश्वत मांगने का आरोप किसने लगाया था और नई शिकायत में क्या दावा किया गया है? आइए समझते हैं.
क्या है ज्ञानेश कुमार पर रिश्वत मांगने का आरोप?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन (Lee See Been) से 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी. आरोप के मुताबिक, यह रकम विश्व बैंक की मदद से चल रही केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत किए गए कामों के बिल पास कराने के बदले मांगी गई थी.
ली सी बीन PATI-BEL नाम के भारत-मलेशिया संयुक्त उपक्रम के मुख्य परियोजना प्रबंधक थे. इस कंपनी को 2002 में परियोजना के तहत सड़क निर्माण का काम दिया गया था.
नवंबर 2006 में मलेशिया में ली सी बीन ने आत्महत्या कर ली थी. उनके पीछे एक सुसाइड नोट छोड़े जाने की बात सामने आई थी. उस समय ज्ञानेश कुमार केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर होने के साथ-साथ राज्य के लोक निर्माण विभाग के सचिव भी थे.
हालांकि, सुसाइड नोट को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया. लेकिन आत्महत्या के करीब एक महीने बाद, दिसंबर 2006 में तत्कालीन CPI(M) सरकार ने ज्ञानेश कुमार को PWD सचिव के पद से हटा दिया था. इसके साथ ही राज्य सरकार ने मामले की जांच भी शुरू कराई थी.
2006 का मामला फिर चर्चा में कैसे आया?
पिछले महीने कांग्रेस ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी. इसी दौरान साल 2006 का रिश्वत मांगने का आरोप एक बार फिर चर्चा में आ गया.
कांग्रेस नेता एम. वेणुगोपाल ने केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को शिकायत देकर आरोप लगाया कि 2006 में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुई जांच बाहरी दबाव के कारण प्रभावित हुई थी.
उन्होंने दावा किया कि इंजीनियर ली सी बीन के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का जिक्र होने की जानकारी सामने आई थी.
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस शिकायत को सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास भेज दिया. ब्यूरो ने मामले को दोबारा खोलने के संबंध में कानूनी राय मांगी है.
हालांकि, वेणुगोपाल ने अब तक अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया है.
दूसरे शिकायतकर्ता ने क्या दावा किया?
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच की मांग करने वाले दूसरे शिकायतकर्ता का नाम साजन वी. ओ. (Sajan V O) है. बताया जाता है कि उन्होंने 2000 के शुरुआती वर्षों में PATI-BEL को निर्माण सामग्री की आपूर्ति की थी.
साजन के मुताबिक, PATI-BEL का परियोजना कार्यालय उनके कोल्लम स्थित घर के पास था और उनकी इंजीनियर ली सी बीन से अच्छी जान-पहचान थी.
राज्य के गृह मंत्री को 23 अक्टूबर को दी गई शिकायत में साजन ने दावा किया कि परियोजना के बिल समय पर पास नहीं हो रहे थे. इस वजह से ली स्थानीय ठेकेदारों और सप्लायरों को भुगतान नहीं कर पा रहे थे.
साजन ने अपनी शिकायत में कहा, “बिल समय पर पास नहीं होने के कारण ली स्थानीय ठेकेदारों और सप्लायरों को भुगतान नहीं कर पा रहे थे. ली ने मुझे बताया था कि बिल पास कराने के लिए कुमार ने 2 करोड़ रुपये मांगे थे. लेकिन PATI-BEL बिल पास कराने के लिए रिश्वत देने को तैयार नहीं थी. इसके बाद ली के परिवार ने PATI-BEL के कर्मचारियों को बताया था कि उनके सुसाइड नोट में कुमार का जिक्र है.”
साजन ने आगे कहा, “अगर सरकार जांच का आदेश देती है तो मैं जांच अधिकारियों के सामने सबूत पेश करने के लिए तैयार हूं. इनमें ली के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं.”
हालांकि, साजन ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने मलेशिया में छोड़ा गया ली का सुसाइड नोट कभी नहीं देखा था. उनका कहना है कि 2006 की रिश्वत संबंधी जांच के सिलसिले में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उनसे अब तक संपर्क नहीं किया है.
साजन ने दावा किया कि रिश्वत की कथित मांग और स्थानीय सप्लायरों के बकाया भुगतान को लेकर ली दबाव में थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ली ने केरलम में भुगतान करने के लिए मलेशिया स्थित PATI की एक दूसरी परियोजना से पैसे का इस्तेमाल किया था.
साजन के मुताबिक, इसके बाद ली को इस मामले में जवाब देने के लिए मलेशिया में PATI के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुलाया था, जहां उन्होंने आत्महत्या कर ली.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2006 की जांच में क्या हुआ था?
केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने 14 अक्टूबर को विधानसभा में बताया था कि 2006 में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट से जुड़े कई आरोपों की जांच की थी.
इनमें यह आरोप भी शामिल था कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने पूरा हो चुका काम कराने वाले ठेकेदारों के बिल पास करने के लिए उनसे 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी.
हालांकि, जांच में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी थी. इसके बाद विभाग ने सिफारिश की थी कि मामले में आगे कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है.
ज्ञानेश कुमार का नाम 2003 से 2006 के बीच बिना टेंडर प्रक्रिया के कथित तौर पर दिए गए 76 कार्यों से जुड़ी एक अलग सतर्कता जांच में भी सामने आया था.
सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इन परियोजनाओं की जांच शुरू की थी. इनमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा एक मामला भी शामिल था.
हालांकि, जांच के दौरान कथित अनियमितताओं की पुष्टि नहीं हो सकी. इसके बाद ब्यूरो ने सभी कार्यवाहियां रोक दीं और राज्य सरकार को रिपोर्ट दी कि आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है.
साल 2012 में, जब केरलम में कांग्रेस की सरकार थी, तब विभाग ने आठ मामलों को अदालत में ‘तथ्यात्मक गलती’ (Mistake of Fact) बताते हुए रिपोर्ट किया था. अदालत ने इन रिपोर्टों को स्वीकार कर लिया था और बाद में उन्हें कभी चुनौती नहीं दी गई.
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इस तरह, करीब दो दशक पुराने रिश्वत के आरोप एक बार फिर चर्चा में हैं. नई शिकायत के बाद केरलम सरकार ने प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए हैं. हालांकि, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है और 2006 की जांच में भी कथित रिश्वत मांगने के आरोप साबित नहीं हो सके थे.
Last Updated on November 6, 2026 7:27 am
