Mahadev Betting App: सौरभ चंद्राकर पर भारत में चलेंगे तीन केस, ओमान ने खोला रास्ता

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाने के बाद CBI की कार्रवाई तेज हो गई है. ओमान ने पुष्टि की है कि प्रत्यर्पण में ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस के साथ CBI के दो मामले भी शामिल हैं. रायपुर की विशेष अदालत ने CBI को पूछताछ के लिए आठ दिन की हिरासत दी है.

ED के बाद अब CBI भी करेगी सौरभ चंद्राकर से पूछताछ
ED के बाद अब CBI भी करेगी सौरभ चंद्राकर से पूछताछ
Mahadev Betting App: महादेव ऑनलाइन बुक के फरार प्रमोटरों में से एक और करोड़ों रुपये के कथित अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अब भारत में दो CBI मामलों में भी मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है. द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान ने भारतीय केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इसकी पुष्टि कर दी है कि चंद्राकर का प्रत्यर्पण सिर्फ प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मनी लॉन्ड्रिंग मामले तक सीमित नहीं है. ओमान ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार की ओर से भेजे गए अनुरोधों में शामिल सभी मामलों में उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है.

दो CBI मामलों और ED की ओर से दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में वांछित चंद्राकर को रविवार शाम ओमान से भारत लाया गया. CBI की एक टीम उसे लेकर भारत पहुंची और हिरासत में लिया. सोमवार को एजेंसी ने उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज निखिल चोपड़ा के सामने पेश किया. CBI ने उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश करने के लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मांगी थी, जहां महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले की सुनवाई चल रही है.

हालांकि, चंद्राकर के वकील तुषार गिरि ने उसकी गिरफ्तारी को चुनौती दी. उनका तर्क था कि ओमान में जारी प्रत्यर्पण आदेश भारत सरकार की उस गारंटी पर आधारित था, जिसके मुताबिक उनके मुवक्किल पर ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के अलावा किसी अन्य मामले में मुकदमा नहीं चलाया जाएगा. वकील के मुताबिक, ओमान की अदालत के आदेश में CBI के मामलों का कोई उल्लेख नहीं था.

गिरि ने अदालत में कहा, “ओमान की अदालत के प्रत्यर्पण आदेश में CBI के मामले का जिक्र ही नहीं है.” उन्होंने CBI के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी को उनके मुवक्किल को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं था.

उन्होंने अदालत में दलील दी, “मैं सिर्फ गिरफ्तारी की कानूनी वैधता पर सवाल उठा रहा हूं. मैं ED के गिरफ्तारी के अधिकार को चुनौती नहीं दे रहा हूं. मैं यह नहीं कह रहा कि ED उसे हिरासत में नहीं ले सकती. लेकिन जब CBI के प्रत्यर्पण अनुरोध पर कोई न्यायिक आदेश नहीं आया, तब उसका गिरफ्तार करना कानून के खिलाफ है.”

ओमान ने साफ किया – प्रत्यर्पण में CBI के दोनों मामले भी शामिल

हालांकि, सुनवाई के कुछ घंटे बाद CBI को ओमान के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB) से इस मामले में आधिकारिक पुष्टि मिल गई. ओमान ने स्पष्ट किया कि सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण केवल ED के अनुरोध तक सीमित नहीं था.

ओमान के NCB ने CBI के सवाल के जवाब में लिखा, “हम पुष्टि करना चाहते हैं कि ओमान की न्यायपालिका ने आपके अधिकारियों की ओर से भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोधों के आधार पर संबंधित व्यक्ति को आपके देश प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दी है. आपने यह पूछा है कि क्या प्रत्यर्पण में उसके खिलाफ दर्ज मामले भी शामिल हैं. हम पुष्टि करते हैं कि प्रत्यर्पण में ये मामले शामिल हैं और भारत में संबंधित अनुरोधों में उल्लिखित अपराधों के लिए उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है.”

ओमान के NCB ने अपने जवाब में CBI के दोनों मामलों का उल्लेख किया, जो 18 और 19 दिसंबर 2024 को दर्ज किए गए थे. इसके साथ ही ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले को भी सूचीबद्ध किया गया, जिसकी जांच अक्टूबर 2022 में शुरू हुई थी.

हालांकि, ओमान ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सभी कानूनी शर्तों को पूरा करने, जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने और ओमान सल्तनत के भीतर उसके खिलाफ संबंधित स्थानीय न्यायिक आदेशों को लागू करने के बाद की जाएगी.

रायपुर कोर्ट ने CBI को आठ दिन की हिरासत दी

CBI ने ओमान के NCB से मिले इस आधिकारिक संवाद की कॉपी रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश की. बुधवार को अदालत ने सौरभ चंद्राकर को पूछताछ के लिए आठ दिन की CBI हिरासत में भेजने की मंजूरी दे दी.

CBI ने अदालत से चंद्राकर को कथित अवैध सट्टेबाजी कारोबार के संबंध में पूछताछ के लिए हिरासत में देने की मांग की थी. जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित सट्टेबाजी नेटवर्क से अपराध की कमाई 75,000 करोड़ रुपये तक हो सकती है.

इससे पहले, चंद्राकर के वकील की आपत्तियों के बावजूद दिल्ली की अदालत ने उसे ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर ले जाने की अनुमति दी थी. अदालत ने टिप्पणी की थी कि वह इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकती कि ED का मामला उस मूल अपराध से जुड़ा है, जिसकी जांच CBI कर रही है.

चंद्राकर के वकील ने फिर उठाए कानूनी सवाल

द प्रिंट से इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर चंद्राकर के वकील तुषार गिरि ने अपनी दलील दोहराई. उन्होंने कहा कि CBI की ओर से अदालत में पेश किया गया संवाद दोनों देशों की एजेंसियों के बीच हुआ है, न कि कोई बाध्यकारी न्यायिक आदेश है.

गिरि ने कहा, “CBI की ओर से पेश किया गया संवाद दोनों देशों की एजेंसियों के बीच है. यह कोई बाध्यकारी न्यायिक आदेश नहीं है.”

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इस तरह ओमान की पुष्टि के बाद सौरभ चंद्राकर के खिलाफ भारत में दर्ज दोनों CBI मामलों में भी मुकदमे और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है. हालांकि, प्रत्यर्पण से जुड़े कानूनी सवालों पर चंद्राकर के बचाव पक्ष की आपत्तियां अभी भी बरकरार हैं.

Last Updated on November 5, 2026 9:51 am

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