– अशोक कुमार पांडेय
Delhi’s Stray Dog Problem: अगर आप सोसायटी में रहते हैं या घर से निकल कर कार में बैठ जाते हैं तो कुत्ते (Stray Dog) कोई समस्या नहीं हैं. अगर आपके बच्चे सुरक्षित पार्क में खेलते हैं स्कूल से बस में/कार में आते हैं तो कुत्ते (Stray Dog) कोई समस्या नहीं. लेकिन अगर आप ग़रीब इलाक़ों में रहते हैं, पैदल चलते हैं, गलियों में जाते हैं, आपके बच्चे स्कूल से पैदल आते हैं तो दिल्ली में कुत्ते बड़ी समस्या हैं.
मेरा ऑफिस ऐसे ही गली वाले इलाक़े में है और आए दिन कुत्तों और आवारा पशुओं (Stray Animals) की विस्तारित बैठकों से बच के निकलता हूं. औरतों और बच्चों को परेशान होता देखता हूं. दुनिया सबकी है. कुत्तों की भी. लेकिन उनका मैनेजमेंट क्यों नहीं किया जाता? घर में कुत्ता पालने वाले शौच सड़क पर करा के चले आते हैं, गंदगी चलने वाला झेलता है.
सड़क के कुत्तों का टीकाकरण/बंध्याकरण उनके प्रेमी भी नहीं कराते. कार से आएंगे, एक जगह खाना खिलाएंगे और फिर निकल जाएंगे, पार्कों तक पर क़ब्ज़ा है उनका, बच्चे खेलने से डरते हैं.
बातें करना आसान है लेकिन जो झेलते हैं उनकी समस्या गलियों में रात को घूमने पर साफ़ दिखेगी, ज़रा कोशिश कीजिए.
(लेखक लेखक, इतिहासकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं.)
Last Updated on August 13, 2025 12:17 pm
