SIR रिपोर्टिंग के बाद साजिशों का जाल, पत्रकार Ajit Anjum को फंसाने की तैयारी में Bihar Police?

SIR रिपोर्टिंग के बाद साजिशों का जाल: बेगूसराय के बलिया थाने की पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि SIR फॉर्म की गड़बड़ियों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार को चुप कराने के लिए पुलिस साजिश रच रही है. पहले तो पत्रकार पर कई धाराओं में FIR दर्ज की गई और अब मामले में एक स्थानीय रिपोर्टर नोमान को जबरन आरोपी बना दिया गया है. खास बात यह है कि पत्रकार और नोमान का आपस में कोई परिचय ही नहीं था. खुद नोमान ने बताया कि पुलिस ने ज़बरदस्ती उससे BNS की धारा 35(3) के तहत नोटिस और बंधपत्र पर हस्ताक्षर करा लिए. सवाल यह है कि रिपोर्टिंग से जुड़े न होने के बावजूद नोमान को केस में घसीटने की मंशा क्या है? पत्रकार Ajit Anjum का कहना है कि वह जांच में हर संभव सहयोग कर रहे हैं, फिर भी पुलिस अधिकारियों का यह रवैया किसी गहरी साजिश की ओर इशारा करता है. यह पूरा मामला अब पुलिस की नीयत और कार्रवाई दोनों पर गंभीर शक पैदा कर रहा है. उन्होंने स्थानीय पुलिस पर सवाल खड़े करते हुए अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा

“बेगूसराय के बलिया थाने की पुलिस, ‘SIR’ पर मेरी रिपोर्टिंग के बाद मुझे फंसाने के लिए साजिशों का सहारा ले रही है . बलिया ब्लॉक में SIR के फॉर्म की अपलोडिंग के दौरान दिखी अनिमितताओं पर मेरी रिपोर्ट की वजह से मेरे खिलाफ पहले तो कई धाराओं में FIR दर्ज की गई और अब मुझे जानकारी मिली है कि बलिया के एक लोकल रिपोर्टर को मेरे केस में जबरन आरोपी बनाया गया है .

नोमान नाम के जिस रिपोर्टर को मेरे केस में एक्यूज बनाकर उससे जबरन BNS की धारा 35 ( 3 ) के तहत नोटिस और बंध पत्र पर दस्तखत कराया गया है , उससे मैं कभी मिला नहीं हूं . मेरा उससे कोई परिचय नहीं है . बलिया में रिपोर्टिंग के दौरान या उससे पहले नोमान नाम के इस रिपोर्टर से मेरी कभी कोई बातचीत नहीं हुई थी. फिर उस रिपोर्टर को किस मंशा से मेरे केस में एक्यूज बनाया जा रहा है ?

रिपोर्टिंग के वक्त या उससे पहले नोमान नाम के रिपोर्टर से मेरी कोई बात नहीं हुई , ये सब मेरे या उसके कॉल रिकॉर्ड से साबित हो सकता है . नोमान ने कहीं से मेरा नंबर लेकर मुझे फोन किया और पूरे मामले की जानकारी दी . उसी ने मुझे बताया है कि पुलिस ने नोटिस पर जबरन उससे दस्तखत कराया है . मेरी रिपोर्टिंग से जिसका कोई लेना – देना नहीं , उसे मेरे साथ केस में आरोपी बनाने के पीछे पुलिस की मंशा आखिर क्या हो सकती है ?

मैं इस जांच में पुलिस को पूरी तरह से सहयोग देने को तैयार हूं .फिर बलिया पुलिस के अधिकारी ये सब क्यों कर रहे हैं ? इसके पीछे कोई न कोई साजिश है ताकि मुझे फंसाया जा सके .

बलिया पुलिस के जांचकर्ता के फ़ोन आने पर मैं ख़ुद बेगूसराय जाकर उनसे मिला था . मैंने नोटिस भी रिसीव किया और जांच में हर तरह का सहयोग करने की बात कहकर बेगूसराय से लौटा. मैं कायदे – क़ानून का पालन करने वाला आदमी हूं . जांच के क्रम में पुलिस जब भी बुलाएगी , मैं हाजिर हो जाऊंगा लेकिन बलिया के पुलिस अधिकारी किस मंशा से ये सब कर रहे हैं ?”

Last Updated on September 5, 2025 1:56 pm

Related Posts