Iran पर परमाणु हमले की तैयारी में अमेरिका? पाकिस्तान से भारत तक रेडिएशन का खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने पिकैक्स माउंटेन पर हमले की संभावना जताई है. टकर कार्लसन ने परमाणु हमले का दावा कर भारत और पाकिस्तान तक रेडिएशन फैलने की आशंका भी जताई. आखिर इस भूमिगत ठिकाने की खासियत क्या है और संभावित परमाणु हमले का भारत पर कितना असर पड़ सकता है?

ईरान के परमाणु ठिकाने पर हमला क्यों चाहता है अमेरिका?
ईरान के परमाणु ठिकाने पर हमला क्यों चाहता है अमेरिका?
Iran Nuclear Strike: अमेरिका में एक बार फिर परमाणु टकराव की आशंकाएं तेज हो गई हैं. सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले और फॉक्स न्यूज के पूर्व एंकर टकर कार्लसन ने दावा किया कि अमेरिका ईरान के संदिग्ध भूमिगत परमाणु ठिकाने ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर परमाणु हमला करने पर विचार कर रहा है.

ट्रंप ने भी ईरान पर किसी तरह की सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया है. अगर अमेरिका ऐसा कदम उठाता है, तो इसके परिणाम केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे. कुछ खास मौसमी परिस्थितियों में रेडियोधर्मी प्रदूषण पाकिस्तान और भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक पहुंच सकता है.

हालांकि, इस खतरे को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल भी हैं. ईरान के मध्य इस्फहान प्रांत में स्थित पिकैक्स माउंटेन भारत से करीब 2,500 किलोमीटर दूर है. रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन के मुताबिक, परमाणु हमले के बाद रेडियोधर्मी प्रभाव कितना दूर तक पहुंचेगा, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा. इनमें परमाणु हथियार की विस्फोटक क्षमता, विस्फोट का स्वरूप और उस समय हवा की दिशा और मौसम की स्थिति शामिल हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान रेडियोधर्मी कणों की सघनता कम हो सकती है. लेकिन इससे पहले सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप वास्तव में परमाणु हमले का जोखिम उठाएंगे?

पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार धमकी दे चुके हैं कि अगर ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए किसी समझौते पर सहमत नहीं हुआ, तो अमेरिका पिकैक्स माउंटेन पर बमबारी कर सकता है. हालांकि, अभी तक उन्होंने इस ठिकाने पर हमला नहीं किया है.

इस बार अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर अधिक बड़े हमले किए जाने की चर्चाएं भी तेज हैं.

ट्रंप ने खुद उठाया पिकैक्स माउंटेन पर हमले का मुद्दा

पिकैक्स माउंटेन पर हमले की संभावना सबसे पहले खुद डोनाल्ड ट्रंप ने सामने रखी. सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान की परमाणु क्षमताओं का बड़ा हिस्सा नष्ट कर चुका है, लेकिन अभी भी एक-दो ठिकानों को निशाना बनाना बाकी है.

ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, “हमें पिकैक्स पर हमला करना पड़ सकता है. हम जब चाहें, एक घंटे के भीतर ऐसा कर सकते हैं.”

इसी दिन फॉक्स न्यूज के पूर्व एंकर टकर कार्लसन ने दावा किया कि ट्रंप कुछ ही दिनों में परमाणु हमले का आदेश दे सकते हैं.

कार्लसन के मुताबिक, पिकैक्स माउंटेन पर हमला करने के लिए परमाणु हथियार ही एकमात्र सैन्य विकल्प हो सकता है. उनका तर्क था कि अमेरिका के पारंपरिक हथियार इस ठिकाने के भूमिगत सुरंगों की रक्षा कर रही करीब 300 फीट मोटी ठोस ग्रेनाइट चट्टान को भेदने में सक्षम नहीं होंगे.

कार्लसन ने कहा कि संभावित निशाना पिकैक्स माउंटेन होगा, जहां इजरायली खुफिया एजेंसियों का दावा है कि ईरान की सरकार ने अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम फिर से शुरू कर दिया है.

हालांकि, कार्लसन ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया.

टकर कार्लसन ने भारत-पाकिस्तान और तीसरे विश्व युद्ध का खतरा क्यों बताया?

टकर कार्लसन के दावों में भारत और पाकिस्तान का जिक्र भी शामिल है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से किया गया परमाणु हमला पूरे फारस की खाड़ी में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैला सकता है. उनके मुताबिक, इससे रूस, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के शामिल होने का खतरा पैदा हो सकता है और दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ सकती है.

कार्लसन ने यह आरोप भी लगाया कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर लगातार पिकैक्स माउंटेन पर हमला करने का दबाव बना रहे हैं.

उन्होंने कहा, “नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप प्रशासन ईरान पर परमाणु हमला करने से कुछ ही दिन दूर हो सकता है.”

हालांकि, ट्रंप के करीबी माने जाने वाले कार्लसन के इन दावों का सोशल मीडिया पर काफी मजाक भी उड़ाया गया है.

कार्लसन ने अपने दावों के समर्थन में किसी अमेरिकी अधिकारी का नाम नहीं बताया. उनकी चेतावनियां मुख्य रूप से अज्ञात सूत्रों पर आधारित हैं.

कुछ सप्ताह पहले ही ट्रंप ने न्यूजमैक्स को दिए एक इंटरव्यू में परमाणु हथियार के इस्तेमाल की संभावना से अलग रुख दिखाया था. उन्होंने कहा था, “मैं परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करूंगा. हमें इसकी जरूरत नहीं है.”

क्या है ईरान का पिकैक्स माउंटेन परमाणु ठिकाना?

ट्रंप और कार्लसन के लगातार बयानों के बाद ईरान का पिकैक्स माउंटेन एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

खुफिया एजेंसियों को संदेह है कि ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार का कुछ हिस्सा इस बेहद सुरक्षित भूमिगत ठिकाने में रखा है. संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है. हालांकि, इस ठिकाने को लेकर सामने आई कई जानकारियां अभी तक अपुष्ट हैं.

यह सुविधा एक विशाल पहाड़ के भीतर करीब 328 फीट की गहराई में बनाई गई है. इसकी वास्तविक संरचना और वहां मौजूद गतिविधियों को लेकर काफी रहस्य बना हुआ है.

पिकैक्स माउंटेन की गहराई ईरान के दो अन्य प्रमुख परमाणु संवर्धन केंद्रों – फोर्डो और नतांज – से भी अधिक बताई जाती है. पिछले साल अमेरिका ने इन ठिकानों पर बमबारी की थी.

उस हमले में अमेरिका ने बंकर बस्टर बम यानी GBU-57 का इस्तेमाल किया था. ये बम करीब 60 फीट तक जमीन या चट्टान के भीतर घुसकर विस्फोट करने के लिए बनाए गए हैं.

यही वजह है कि पिकैक्स माउंटेन की गहराई और सुरक्षा को देखते हुए इसके खिलाफ परमाणु हमले की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, यह दावा कि इसे नष्ट करने के लिए परमाणु हमला ही एकमात्र विकल्प है, अभी स्थापित तथ्य नहीं है.

क्या ईरान पर परमाणु हमले का रेडिएशन भारत तक पहुंच सकता है?

भू-राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ मारियो नवफाल के मुताबिक, पिकैक्स माउंटेन पर संभावित अमेरिकी परमाणु हमले का रेडियोधर्मी प्रभाव फारस की खाड़ी, अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक फैल सकता है. इसकी कम सघनता भारत के कुछ हिस्सों तक भी पहुंचने की आशंका जताई गई है.

नवफाल ने पिकैक्स माउंटेन पर एक काल्पनिक अमेरिकी परमाणु हमले का मॉडल आधारित अनुमान साझा किया है. इस अनुमान के मुताबिक, भारत के उत्तर-पश्चिमी राज्यों और क्षेत्रों – पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और गुजरात – में रेडियोधर्मी प्रदूषण की कम सघनता पहुंच सकती है.

हालांकि, इसका वास्तविक असर कई बातों पर निर्भर करेगा. मसलन, विस्फोट के दौरान आसपास की चट्टान, मिट्टी और मलबा कितनी मात्रा में हवा में जाएगा और उस समय हवा किस दिशा में बह रही होगी.

रेडियोधर्मी कण सैकड़ों किलोमीटर तक यात्रा कर सकते हैं. लेकिन जैसे-जैसे वे दूर तक फैलते हैं, उनकी सघनता और विकिरण की तीव्रता कम होती जाती है.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मुताबिक, बड़े रेडियोधर्मी कण आमतौर पर विस्फोट स्थल के आसपास ही जमीन पर बैठ जाते हैं. वहीं, छोटे कण लंबे समय तक हवा में बने रह सकते हैं और अधिक दूरी तक जा सकते हैं.

रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन ने IndiaToday.in से बातचीत में कहा कि अगर अमेरिका पिकैक्स माउंटेन पर परमाणु हमला करता है और हवाएं रेडियोधर्मी बादल को पूर्व दिशा में ले जाती हैं, तो अफगानिस्तान और पाकिस्तान सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में हो सकते हैं.

उन्होंने बताया कि मॉडल के मुताबिक पाकिस्तान के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में खतरा अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है.

हवा की दिशा और रफ्तार के आधार पर रेडियोधर्मी कण भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों की ओर भी बढ़ सकते हैं.

उन्नीथन ने कहा, “अगर ईरान के ऊपर परमाणु हथियार विस्फोट किया जाता है, तो अधिकांश रेडियोधर्मिता विस्फोट के आसपास के क्षेत्र तक ही सीमित रहेगी.”

उन्होंने आगे कहा, “हवाओं के कारण कुछ रेडियोधर्मी कण पूर्व दिशा में पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिमी भारत की ओर जा सकते हैं. लेकिन वहां पहुंचने तक उनकी मात्रा काफी कम हो जाएगी. इसे ट्रेस लेवल कहा जाता है, यानी रेडियोधर्मी पदार्थों की बेहद सूक्ष्म मात्रा.”

बारिश भी बढ़ा सकती है रेडियोधर्मी प्रदूषण का स्थानीय खतरा

परमाणु हमले के बाद रेडियोधर्मी कणों के फैलाव में बारिश की भी अहम भूमिका हो सकती है.

बारिश हवा में मौजूद रेडियोधर्मी कणों को जमीन पर जमा कर सकती है. जिन इलाकों में भारी बारिश होगी, वहां कुछ स्थानों पर रेडियोधर्मी प्रदूषण की सघनता अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है.

सेवानिवृत्त मेजर जनरल एसबी अस्थाना ने कहा कि परमाणु हथियार का इस्तेमाल ईरान के लिए तत्काल विनाशकारी होगा और इसके बाद अमेरिका को भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.

अस्थाना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इसके कई प्रभाव होंगे. रेडियोधर्मी प्रभाव पाकिस्तान, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों तक पहुंच सकता है. उन्होंने यह आशंका भी जताई कि इससे रूस को कीव पर परमाणु हमला करने और युद्ध समाप्त करने का विकल्प मिल सकता है.

परमाणु हमले का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा

अगर डोनाल्ड ट्रंप ईरान के पिकैक्स माउंटेन पर परमाणु हमला करने का फैसला लेते हैं, तो उन्हें इसके व्यापक परिणामों को ध्यान में रखना होगा.

इसका असर केवल ईरान के परमाणु ठिकाने या उसकी सैन्य क्षमताओं तक सीमित नहीं रहेगा. रेडियोधर्मी प्रदूषण का फैलाव मौसम और हवा की दिशा पर निर्भर करेगा. वहीं, पाकिस्तान, भारत और पश्चिम एशिया के दूसरे देशों पर संभावित प्रभाव भी चिंता का विषय है.

इसके अलावा रूस और अन्य देशों की प्रतिक्रिया से अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ सकता है.

ये भी पढ़ें- US Midterm Elections 2026: क्या ट्रंप से छिन जाएगा संसद का नियंत्रण?

यानी पिकैक्स माउंटेन पर संभावित परमाणु हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं होगा. यह रेडियोधर्मी प्रदूषण, क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक भू-राजनीतिक टकराव का बड़ा संकट बन सकता है.

Last Updated on November 4, 2026 8:10 am

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