AQI 100 होते ही दुनिया के 10 देश कैसे करते हैं प्रदूषण से मुकाबला? भारत क्या सीख सकता है?

दुनिया के कई देश वायु प्रदूषण बढ़ने पर पहले से तय नियमों के तहत तुरंत कार्रवाई करते हैं. चीन, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, अमेरिका, फ्रांस और कनाडा जैसे देशों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अलर्ट सिस्टम, वाहनों पर पाबंदी और स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देश लागू किए जाते हैं. जानिए दुनिया के 10 देशों का मॉडल और भारत इससे क्या सीख सकता है.

हवा जहरीली होने से पहले ये 10 देश कैसे करते हैं कार्रवाई?
हवा जहरीली होने से पहले ये 10 देश कैसे करते हैं कार्रवाई?
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की समस्या हर साल गंभीर होती जा रही है. सर्दियों की शुरुआत होते ही हवा में PM2.5 और PM10 जैसे जहरीले कण बढ़ने लगते हैं. हालात बिगड़ने पर स्कूल बंद करने, निर्माण कार्यों पर रोक लगाने और गाड़ियों के परिचालन को नियंत्रित करने जैसे कदम उठाए जाते हैं. लेकिन क्या प्रदूषण से लड़ने का यही एकमात्र तरीका है?

दुनिया के कई देशों ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अलग-अलग मॉडल विकसित किए हैं. कहीं प्रदूषण बढ़ने पर गाड़ियों पर पाबंदी लगाई जाती है, कहीं उद्योगों का उत्पादन सीमित किया जाता है, तो कहीं नागरिकों को पहले से अलर्ट जारी करके स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी जाती है.

लेकिन एक जरूरी बात समझना जरूरी है. दुनिया के सभी देश AQI की गणना एक ही पैमाने पर नहीं करते. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, अलग-अलग देशों के AQI की गणना, प्रदूषकों और स्वास्थ्य संबंधी सीमाओं में अंतर है.

भारत के राष्ट्रीय AQI पैमाने पर 51-100 को संतोषजनक और 101-200 को मध्यम प्रदूषित श्रेणी में रखा गया है. यानी भारत में AQI 100 पहुंचने का अर्थ अभी गंभीर प्रदूषण नहीं है, लेकिन संवेदनशील लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है.

आइए जानते हैं दुनिया के 10 देशों के एयर पॉल्यूशन कंट्रोल मॉडल और यह भी कि भारत उनसे क्या सीख सकता है.

1. चीन: प्रदूषण बढ़ते ही फैक्ट्रियों और गाड़ियों पर कार्रवाई

air pollution in Beijing

स्रोत: बीजिंग म्युनिसिपल गवर्नमेंट – Heavy Air Pollution Contingency Plan.

चीन दुनिया के उन देशों में शामिल है जिसने प्रदूषण से निपटने के लिए बाकायदा इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार किया है.

बीजिंग में प्रदूषण की स्थिति के आधार पर येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किए जाते हैं. ये अलर्ट केवल AQI के एक दिन के आंकड़े पर निर्भर नहीं करते, बल्कि प्रदूषण की गंभीरता, पूर्वानुमान और उसके बने रहने की अवधि भी देखी जाती है.

प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर प्रशासन कई तरह के कदम उठा सकता है:

  • प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों का उत्पादन सीमित करना.
  • निर्माण स्थलों पर काम रोकना या सीमित करना.
  • भारी वाहनों के परिचालन पर प्रतिबंध.
  • सड़कों की सफाई और धूल नियंत्रण बढ़ाना.
  • खुले में कचरा और अन्य चीजें जलाने पर कार्रवाई.
  • बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को घरों में रहने की सलाह.

बीजिंग की व्यवस्था में गंभीर प्रदूषण की आशंका होने पर 24 घंटे पहले तक अलर्ट जारी करने का प्रावधान भी है.

भारत के लिए सबक: प्रदूषण बढ़ने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान के आधार पर पहले से कार्रवाई करना.

2. दक्षिण कोरिया: सर्दियों में प्रदूषण के खिलाफ सीजनल एक्शन प्लान

January 16, 2026: Seoul among top 10 most polluted cities in the world

स्रोत: दक्षिण कोरिया का Office of the Prime Minister और National Air Emission Inventory and Research Center.

दक्षिण कोरिया ने प्रदूषण को केवल आपातकालीन समस्या मानने के बजाय मौसमी चुनौती के रूप में भी लिया है.

यहां दिसंबर से मार्च तक Seasonal Particulate Matter Management System लागू किया जाता है. इस अवधि में सामान्य दिनों की तुलना में प्रदूषण नियंत्रण के ज्यादा सख्त उपाय किए जाते हैं.

इस योजना के तहत:

  • पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध.
  • सरकारी संस्थानों में वैकल्पिक वाहन परिचालन व्यवस्था.
  • कोयला आधारित बिजली उत्पादन में कटौती.
  • औद्योगिक इकाइयों की निगरानी.
  • निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण.
  • स्कूलों, अस्पतालों और बुजुर्गों की देखभाल करने वाले संस्थानों की निगरानी.

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार प्रदूषण का स्तर खतरनाक होने का इंतजार नहीं करती. सर्दियों के प्रदूषण सीजन से पहले ही नियंत्रण के उपाय शुरू कर दिए जाते हैं.

भारत के लिए सबक: दिल्ली-NCR में नवंबर से फरवरी तक केवल GRAP पर निर्भर रहने के बजाय पूरे साल और खासकर प्रदूषण सीजन से पहले एक मजबूत कार्ययोजना लागू करना.

3. सिंगापुर: प्रदूषण के आंकड़ों के साथ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी अलर्ट

Singapore Shuts Schools as Air Quality Hits Hazardous Level - Bloomberg

स्रोत: Singapore National Environment Agency (NEA) और Ministry of Health.

सिंगापुर ने प्रदूषण से निपटने के लिए Pollutant Standards Index (PSI) व्यवस्था विकसित की है.

यहां PSI 101 या उससे ऊपर पहुंचने पर हवा को अस्वस्थ माना जाता है. सरकार प्रदूषण के स्तर के अनुसार अलग-अलग वर्गों के लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सलाह जारी करती है.

उदाहरण के लिए:

  • स्वस्थ लोगों को लंबे समय तक कठिन आउटडोर गतिविधियों से बचने की सलाह.
  • बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को बाहरी गतिविधियां कम करने की सलाह.
  • दिल और फेफड़ों के मरीजों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह.
  • प्रदूषण बढ़ने पर स्कूलों और अन्य संस्थानों की गतिविधियों में बदलाव.

सिंगापुर का एक महत्वपूर्ण पहलू क्षेत्रीय सहयोग भी है. जंगलों में लगने वाली आग से निकलने वाला धुआं दूसरे देशों तक पहुंचता है. इससे निपटने के लिए सिंगापुर ASEAN देशों के साथ मिलकर निगरानी और मौसम संबंधी जानकारी साझा करता है.

सितंबर 2026 में PSI के 101 तक पहुंचने पर सरकारी एजेंसियों ने स्वास्थ्य संबंधी सलाह और हेज एक्शन प्लान सक्रिय किए थे.

भारत के लिए सबक: प्रदूषण का आंकड़ा जारी करना ही काफी नहीं है. लोगों को यह भी बताया जाना चाहिए कि उस स्तर पर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को क्या करना चाहिए.

4. फ्रांस: प्रदूषण बढ़ने पर ट्रैफिक और उद्योगों पर नियंत्रण

FRANCE-PARIS-ENVIRONMENT-TRANSPORT-POLLUTION

स्रोत: Airparif – पेरिस क्षेत्र की आधिकारिक वायु गुणवत्ता निगरानी एजेंसी और Santé publique France.

फ्रांस में प्रदूषण की स्थिति के अनुसार दो स्तरों पर कार्रवाई की व्यवस्था है.

पहला है Information and Recommendation Level और दूसरा Alert Level.

पहले स्तर पर लोगों को प्रदूषण की जानकारी दी जाती है और संवेदनशील समूहों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह मिलती है. जरूरत पड़ने पर वाहनों की गति कम करने की सिफारिश भी की जाती है.

जब प्रदूषण और गंभीर हो जाता है, तब प्रशासन के पास ज्यादा सख्त कदम उठाने का विकल्प होता है.

  • प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की गतिविधियां सीमित करना.
  • वाहनों के परिचालन पर प्रतिबंध लगाना.
  • ट्रैफिक की गति नियंत्रित करना.
  • सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करना.
  • लोगों को स्वास्थ्य संबंधी अलर्ट जारी करना.

फ्रांस में पेरिस पुलिस प्रीफेक्चर प्रदूषण की गंभीर घटनाओं के दौरान अतिरिक्त आपातकालीन उपाय भी लागू कर सकता है.

भारत के लिए सबक: प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल गाड़ियों की संख्या कम करना पर्याप्त नहीं है. औद्योगिक गतिविधियों, परिवहन और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय भी जरूरी है.

5. अमेरिका: AQI 100 के बाद संवेदनशील लोगों को विशेष सलाह

Ahead Of World Cup Final, NYC Metro Area Under Smoky Skies Due To Canadian Wildfires

स्रोत: US Environmental Protection Agency (EPA) और AirNow.

अमेरिका में Air Quality Index को छह श्रेणियों में बांटा गया है. यहां AQI 0-50 अच्छा, 51-100 मध्यम और 101-150 संवेदनशील समूहों के लिए अस्वस्थ माना जाता है.

इसका मतलब है कि अमेरिका में AQI 100 और भारत में AQI 100 का स्वास्थ्य संबंधी वर्गीकरण एक जैसा नहीं है.

अमेरिका में AQI खराब होने की आशंका पर स्थानीय प्रशासन Action Days घोषित कर सकता है. ऐसे दिनों में लोगों को प्रदूषण कम करने और उससे बचने के लिए विशेष सलाह दी जाती है.

इन उपायों में शामिल हैं:

  • अस्थमा और फेफड़ों के मरीजों को बाहर की गतिविधियां कम करने की सलाह.
  • बच्चों और बुजुर्गों को लंबे समय तक बाहर रहने से बचाना.
  • सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाना.
  • कारपूलिंग को प्रोत्साहित करना.
  • अनावश्यक वाहन इस्तेमाल कम करना.

AirNow के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में AQI के 100 के आसपास पहुंचने पर भी Action Day घोषित किया जा सकता है, यदि प्रदूषण आगे बढ़कर संवेदनशील समूहों के लिए अस्वस्थ स्तर तक पहुंचने की आशंका हो.

भारत के लिए सबक: प्रदूषण का स्तर खतरनाक होने का इंतजार किए बिना संवेदनशील लोगों को पहले से चेतावनी देना.

6. ब्रिटेन: हर प्रदूषण स्तर के लिए अलग स्वास्थ्य सलाह

London's air quality alerts 'inadequate' for protecting public health, say experts | London Evening Standard | The Standard

स्रोत: UK Department for Environment, Food and Rural Affairs (DEFRA).

ब्रिटेन में वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए Daily Air Quality Index (DAQI) का इस्तेमाल होता है.

यहां भारतीय AQI की तरह 0 से 500 तक का पैमाना नहीं है. ब्रिटेन में DAQI को 1 से 10 तक बांटा गया है.

इसके चार प्रमुख स्तर हैं:

  • 1-3: Low Pollution
  • 4-6: Moderate Pollution
  • 7-9: High Pollution
  • 10: Very High Pollution

ब्रिटेन की व्यवस्था की खास बात यह है कि हर स्तर के लिए स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी जाती है.

कम प्रदूषण होने पर सामान्य गतिविधियां जारी रखने की सलाह दी जाती है. मध्यम स्तर पर जिन लोगों को फेफड़ों या दिल की बीमारी है, उन्हें लक्षण महसूस होने पर प्रदूषण के संपर्क में आने से बचने को कहा जाता है.

प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने पर कठिन शारीरिक गतिविधियों को सीमित करने की सलाह दी जाती है.

भारत के लिए सबक: AQI के आंकड़े के साथ नागरिकों को स्पष्ट स्वास्थ्य सलाह देना. खासकर स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर इसकी जानकारी उपलब्ध कराना.

7. ऑस्ट्रेलिया: AQI 100 पर ही संवेदनशील लोगों के लिए चेतावनी

Sydney's wildfire smoke declared a 'public health emergency' - The Japan Times

स्रोत: Australian Government – State of the Environment, Air Quality Chapter.

ऑस्ट्रेलिया के वायु गुणवत्ता पैमाने में AQI 100-149 को Poor श्रेणी में रखा गया है. इस स्तर पर संवेदनशील लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.

ऑस्ट्रेलिया में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण जंगलों में लगने वाली आग भी है. इससे निकलने वाला धुआं कई बार बड़े शहरों तक पहुंच जाता है.

सरकारी स्वास्थ्य सलाह के मुताबिक:

  • खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर बाहरी गतिविधियां कम करें.

  • प्रदूषण ज्यादा होने पर घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें.

  • बाहर व्यायाम करने से बचें, खासकर जब लक्षण महसूस हों.

  • हवा की गुणवत्ता बेहतर होने पर ही सामान्य गतिविधियां शुरू करें.

यहां AQI 150 या उससे ऊपर पहुंचने पर स्थिति और गंभीर मानी जाती है और आम लोगों को भी ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी जाती है.

भारत के लिए सबक: जंगलों की आग, धूल और मौसमी प्रदूषण के लिए अलग-अलग पूर्व चेतावनी व्यवस्था विकसित करना.

8. कनाडा: AQI के बजाय स्वास्थ्य जोखिम पर ज्यादा ध्यान

Video. Toronto choked by wildfire smoke, records world's worst air quality | Euronews

स्रोत: Environment and Climate Change Canada और Health Canada.

कनाडा में Air Quality Health Index (AQHI) का इस्तेमाल किया जाता है. इसका पैमाना 1 से 10+ तक है.

यह व्यवस्था केवल हवा की गुणवत्ता बताने के बजाय लोगों के स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव को भी सामने रखती है.

इसके तहत:

  • AQHI 1-3: कम स्वास्थ्य जोखिम.
  • AQHI 4-6: मध्यम स्वास्थ्य जोखिम.
  • AQHI 7-10: उच्च स्वास्थ्य जोखिम.
  • AQHI 10 से ऊपर: बहुत अधिक स्वास्थ्य जोखिम.

मध्यम स्तर पर सामान्य लोगों को अपनी नियमित गतिविधियां जारी रखने की सलाह दी जाती है. हालांकि, जिन लोगों को सांस लेने में परेशानी या खांसी हो रही हो, उन्हें कठिन शारीरिक गतिविधियां कम करने को कहा जाता है.

उच्च स्तर पर बच्चों, बुजुर्गों और दिल या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.

कनाडा के स्वास्थ्य विभाग की सलाह में भारी ट्रैफिक वाले रास्तों पर व्यायाम से बचने और पार्क या हरित क्षेत्रों में गतिविधियां करने पर भी जोर दिया गया है.

भारत के लिए सबक: केवल AQI नंबर जारी करने के बजाय लोगों को उनके स्वास्थ्य जोखिम के अनुसार अलग-अलग सलाह देना.

9. जर्मनी: प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों के लिए Low Emission Zones

Berlin Defined Green Environmental Zone

स्रोत: German Environment Agency (Umweltbundesamt).

जर्मनी ने शहरों में वाहन प्रदूषण कम करने के लिए Low Emission Zones (LEZ) का मॉडल अपनाया है.

इसके तहत कई शहरों में विशेष पर्यावरणीय क्षेत्र बनाए गए हैं, जहां केवल निर्धारित उत्सर्जन मानकों को पूरा करने वाले वाहन ही प्रवेश कर सकते हैं.

वाहनों की श्रेणी के अनुसार उन्हें अलग-अलग रंग के पर्यावरणीय स्टिकर दिए जाते हैं. जिन वाहनों को संबंधित क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, उन्हें वहां जाने से रोका जाता है.

जर्मनी की पर्यावरण एजेंसी के मुताबिक, बर्लिन जैसे शहरों में Low Emission Zones के सख्त चरणों के बाद प्रदूषण में कमी दर्ज की गई. एजेंसी के एक आकलन के अनुसार, केवल हरे स्टिकर वाले वाहनों को अनुमति देने वाले चरण में शहरों में PM10 प्रदूषण लगभग 10-12 प्रतिशत कम हो सकता है.

इसके अलावा जर्मनी में Clean Air Plans भी बनाए जाते हैं. इनमें सार्वजनिक परिवहन, सड़क प्रबंधन, कम उत्सर्जन वाले वाहन और भारी वाहनों के परिचालन को नियंत्रित करने जैसे उपाय शामिल हैं.

भारत के लिए सबक: पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को नियंत्रित करने के लिए केवल अस्थायी प्रतिबंध नहीं, बल्कि स्थायी Low Emission Zones विकसित करना.

10. भारत: GRAP और प्रदूषण नियंत्रण के लिए चरणबद्ध व्यवस्था

Thick Smog Shrouds Delhi As AQI Hits 384; Several Areas Slip Into ‘Severe’ Pollution Despite GRAP Measures

स्रोत: Central Pollution Control Board (CPCB) और Commission for Air Quality Management (CAQM).

भारत में भी वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई व्यवस्थाएं मौजूद हैं. दिल्ली-NCR में Graded Response Action Plan (GRAP) लागू किया जाता है.

इस योजना के तहत प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग चरणों में कार्रवाई की जाती है.

  • Stage I: खराब वायु गुणवत्ता की स्थिति में शुरुआती नियंत्रण उपाय.

  • Stage II: प्रदूषण और बढ़ने पर अतिरिक्त प्रतिबंध.

  • Stage III: गंभीर प्रदूषण की स्थिति में निर्माण गतिविधियों और कुछ वाहनों पर सख्त कार्रवाई.

  • Stage IV: बेहद गंभीर प्रदूषण की स्थिति में व्यापक आपातकालीन उपाय.

इनमें निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर नियंत्रण, पुराने वाहनों पर प्रतिबंध, सड़कों की सफाई और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करना शामिल है.

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण सवाल है. जब प्रदूषण हर साल लगभग एक ही समय पर बढ़ता है, तो क्या केवल GRAP के अलग-अलग चरण लागू करके समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है?

भारत के लिए चुनौती सिर्फ प्रदूषण के दौरान कार्रवाई करना नहीं, बल्कि प्रदूषण पैदा करने वाले स्रोतों को पूरे साल नियंत्रित करना है.

एक अहम बात: CAQM के 21 नवंबर 2025 के संशोधित GRAP आदेश के अनुसार दिल्ली में Stage-I AQI 201-300, Stage-II 301-400, Stage-III 401-450 और Stage-IV 450 से ऊपर लागू होता है. GRAP की कार्रवाई मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान के आधार पर पहले भी शुरू की जा सकती है.

आखिर इन 10 देशों से भारत क्या सीख सकता है?

इन देशों के मॉडल का अध्ययन करने पर कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं.

देश प्रदूषण नियंत्रण का प्रमुख मॉडल
चीन फैक्ट्रियों और वाहनों पर आपातकालीन नियंत्रण
दक्षिण कोरिया सर्दियों के लिए सीजनल एक्शन प्लान
सिंगापुर स्वास्थ्य अलर्ट और क्षेत्रीय सहयोग
फ्रांस प्रदूषण के स्तर के अनुसार ट्रैफिक नियंत्रण
अमेरिका AQI आधारित Action Days
ब्रिटेन हर स्तर पर अलग स्वास्थ्य सलाह
ऑस्ट्रेलिया प्रदूषण के पूर्वानुमान और स्वास्थ्य चेतावनी
कनाडा स्वास्थ्य जोखिम आधारित AQHI
जर्मनी Low Emission Zones
भारत GRAP और चरणबद्ध प्रतिबंध

दिल्ली-NCR के लिए क्या हो सकते हैं पांच बड़े बदलाव?

1. प्रदूषण बढ़ने से पहले कार्रवाई: चीन और दक्षिण कोरिया की तरह मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान के आधार पर पहले से नियंत्रण उपाय लागू किए जाएं.

2. सालभर फैक्ट्रियों की निगरानी: केवल सर्दियों में उद्योगों पर कार्रवाई करने के बजाय सालभर उत्सर्जन की निगरानी हो.

3. पुराने वाहनों पर स्थायी नीति: जर्मनी की तरह ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिए शहरों में Low Emission Zones विकसित किए जाएं.

4. स्वास्थ्य संबंधी अलर्ट: सिंगापुर और कनाडा की तरह बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस के मरीजों के लिए अलग-अलग स्वास्थ्य सलाह जारी हो.

5. सार्वजनिक परिवहन मजबूत हो: प्रदूषण बढ़ने पर बसों और मेट्रो की संख्या बढ़ाई जाए ताकि लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल कम कर सकें.

क्या सिर्फ AQI कम करना ही समाधान है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 4 अक्टूबर 2024 की रिपोर्ट Air Pollution: Personal Interventions and Risk Communication में स्पष्ट किया गया है कि मास्क पहनना, एयर प्यूरीफायर लगाना और बाहरी गतिविधियां कम करना व्यक्तिगत सुरक्षा के उपाय हैं. प्रदूषण से निपटने की प्राथमिकता सार्वजनिक नीतियों के जरिए उत्सर्जन कम करना होनी चाहिए.

यानी नागरिकों को यह बताना जरूरी है कि जहरीली हवा में कैसे सांस लें, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि हवा जहरीली होने ही क्यों दी जा रही है.

दिल्ली में हर साल प्रदूषण बढ़ने पर स्कूल बंद होते हैं, निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगता है, गाड़ियों के परिचालन पर पाबंदियां लगती हैं और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी जाती है.

लेकिन असली सवाल यह है कि प्रदूषण कम करने के लिए स्थायी व्यवस्था कब बनेगी?

ये भी पढ़ें- AQI 400 पार, Delhi में Air Polution का अलर्ट, ग्रीन पटाखों पर क्या नियम?

दुनिया के इन देशों के अनुभव बताते हैं कि प्रदूषण से लड़ाई केवल इमरजेंसी प्रतिबंधों से नहीं जीती जा सकती. इसके लिए साफ ईंधन, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, उद्योगों पर सख्त निगरानी, वैज्ञानिक पूर्वानुमान और जवाबदेह प्रशासन की जरूरत है.

दिल्ली को सिर्फ प्रदूषण के दिनों में नहीं, बल्कि साल के 365 दिन साफ हवा देने वाली नीति चाहिए.

Last Updated on November 3, 2026 9:50 am

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